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ब्रह्मेश्वर मुखिया के जिस्म पर हमलावरों ने दागी 40 गोलियां
नई दिल्ली, लाइव हिन्दुस्तान
First Published:01-06-12 05:02 PM
Last Updated:01-06-12 05:02 PM
बिहार में रणवीर सेना के संस्थापक माने जाने वाले ब्रह्मेश्वर मुखिया की अज्ञात हमलावरों ने शुक्रवार तड़के गोली मारकर हत्या कर दी। वे सुबह चार बजे टहलने के लिए निकले थे, तभी पहले से घात लगाए अज्ञात अपराधियों ने उन पर ताबड़तोड़ फायरिंग शुरू कर दी। अपराधियों ने उनके शरीर में लगभग 40 गोलियां दागी और फरार हो गए।
हत्या के बाद से आरा में रणवीर सेना समर्थकों ने जमकर उत्पात मचाना शुरू कर दिया है। जगह-जगह आगजनी और तोड़फोड़ की सूचना है। आरा के कतिरा थाना क्षेत्र में जहां पर मुखिया की हत्या हुई है वहां पर स्थित हरिजन छात्रावास में आग लगा दी गई है।
इसके अलावा सर्किट हाउस में भी आगजनी और तोड़फोड़ की सूचना है। आरा प्रशासन ने हालात को काबू में रखने के लिए कर्फ्यू लगा दिया है। उपद्रवियों को देखते ही गोली मारने के आदेश जारी किए गए हैं। लेकिन इसका कुछ खास असर नहीं दिख रहा है। पूरे बिहार में अलर्ट घोषित कर दिया गया है।
लोजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष रामविलास पासवान ने रणवीर सेना के प्रमुख ब्रह्मेश्वर मुखिया हत्याकांड की निंदा करते हुए शुक्रवार को इस घटना की सीबीआई से जांच कराने की मांग की है।
पासवान ने कहा कि ब्रह्मेश्वर मुखिया हत्याकांड की सीबीआई से जांच होनी चाहिए। उनकी हत्या की घटना निंदनीय है। लोकतंत्र में हिंसा को किसी भी प्रकार से उचित नहीं ठहराया जा सकता। बिहार की जातिगत लड़ाइयों का एक चर्चित चेहरा थे ब्रह्मेश्वर मुखिया। बिहार राज्य में एक वक्त ऐसा आया जब नक्सली संगठनों और बड़े किसानों के बीच खूनी लड़ाई का दौर चल पड़ा। इस दौरान ही ब्रह्मेश्वर मुखिया ने अपने नेतृत्व में अपनी एक सेना बनाई थी। सितंबर 1994 में ब्रह्मेश्वर मुखिया के नेतृत्व में जो सगंठन बना उसे रणवीर सेना का नाम दिया गया। ब्रह्मेश्वर मुखिया ने ऊंची जाति के जमींदारों की प्राइवेट आर्मी रणवीर सेना की शुरुआत की थी। 1994 से लेकर 2002 तक करीब 250 लोगों की हत्या के 22 मुकदमें का मुख्य आरोपी ब्रह्मेश्वर मुखिया को सबूतों के अभाव में कुछ दिन पहले ही जमानत दी गई थी। ब्रह्मेश्वर मुखिया पर सबसे पहले अपने ही गांव खोपिरा में रक्तपात करने का आरोप लगा था। उसके बाद 2002 तक तकरीबन 22 बार दलितों और पिछड़ों को मौत के घाट उतारने का आरोप लगाया गया। इन आरोपों को जांच के लिए लिए जो अमीरदास आयोग बनी थी उसे जनवरी 2006 में भंग कर दिया गया था। अमीरदास आयोग का गठन तत्कालीन राजद सरकार ने रणवीर सेना पर लगे आरोपों की जांच करने के लिए किया था। बिहार में ब्रह्मेश्वर मुखिया ने वर्ष 1994 के अंत में रणवीर सेना का गठन किया था। इस सेना पर 29 अप्रैल 1995 को भोजपुर जिले के संदेश प्रखंड के खोपिरा में पहली बार कहर बरपाने का आरोप लगा। आरोप था कि इस दिन ब्रह्मेश्वर मुखिया की मौजूदगी में रणवीर सेना ने 5 दलितों की हत्या कर दी थी। इसके करीब 3 महीने बाद रणवीर सेना ने भोजपुर जिले के ही उदवंतनगर प्रखंड सरथुआं गांव में 25 जुलाई 1995 को 6 लोगों की गोली मारकर हत्या कर दी गई। 7 फरवरी 1996 को रणवीर सेना ने एक बार फिर भोजपुर जिले के चरपोखरी प्रखंड के चांदी गांव में हमला कर 4 लोगों की हत्या कर दी। इसके बाद 9 मार्च 1996 को भोजपुर के सहार प्रखंड के पतलपुरा में 3, 22 अप्रैल 1996 को सहार प्रखंड के ही नोनउर नामक गांव में रणवीर सेना ने 5 लोगों की हत्या कर दी। 29 अप्रैल 1995 से लेकर 25 मई 1996 तक के बीच रणवीर सेना ने कुल 38 लोगों की हत्या कर दी। 11 जुलाई 1996 के दिन रणवीर सेना ने भोजपुर जिले के सहार प्रखंड के ही बथानी टोला नामक दलितों और पिछड़ों की बस्ती पर हमला बोलकर 21 लोगों की गर्दन रेतकर हत्या कर दी। वर्ष 1997 में रणवीर सेना ने भोजपुर जिले के बाहर कदम रखा और 31 जनवरी 1997 को जहानाबाद के मखदूमपुर प्रखंड के माछिल गांव में 4 दलितों की हत्या कर दी। इस घटना के बाद रणवीर सेना ने पटना जिले के बिक्रम प्रखंड के हैबसपुर नामक गांव में 10 लोगों की हत्या कर दी। इस घटना को रणवीर सेना ने 26 मार्च 1997 को अंजाम दिया। रणवीर सेना ने 31 दिसंबर 1997 को रणवीर सेना ने जहानाबाद के लक्ष्मणपुर-बाथे नामक गांव में एक साथ 59 लोगों की निर्मम हत्या कर दी। यह बिहार में हुआ अब तक का सबसे बड़ा सामूहिक नरसंहार है। 25 जनवरी 1999 को रणवीर सेना ने जहानाबाद में एक और बड़े नरसंहार को अंजाम दिया। जहानाबाद के अरवल प्रखंड के शंकरबिगहा नामक गांव में 23 लोगों की हत्या कर दी गई। इसके बाद 10 फरवरी 1999 को जहानाबाद के नारायणपुर में 12, 21 अप्रैल 1999 को गया जिले के बेलागंज प्रखंड के सिंदानी नामक गांव में 12, 28 मार्च 2000 को भोजपुर के सोनबरसा में 3, नोखा प्रखंड के पंचपोखरी में 3 और 16 जून 2000 को रणवीर सेना ने औरंगाबाद जिले के गोह प्रखंड के मियांपुर गांव में 33 लोगों की सामूहिक हत्या कर दी, इसमें 20 महिलाएं, 4 बच्चे और केवल 9 वयस्क पुरुष थे। गौरतलब है कि ब्रह्मेश्वर पर राज्य सरकार ने पांच लाख रुपए का इनाम घोषित कर रखा था। उसे 29 अगस्त 2002 को पटना के एक्जीबिशन रोड से गुप्त सूचना के आधार पर गिरफ्तार कर लिया गया। करीब नौ वर्ष बाद ब्रह्मेश्वर 10 जुलाई 2011 को न्यायालय के आदेश के बाद जेल से बाहर आया। जेल से बाहर आने के बाद पांच मई 2012 को ब्रह्मेश्वर ने भारतीय राष्ट्रवादी किसान संगठन के नाम से एक संगठन बनाया और कहा कि अब वह किसानों की हित की लड़ाई एक बार फिर लड़ेगा। उल्लेखनीय है कि ब्रह्मेश्वर के साक्ष्य के अभाव में अधिकांश मामलों में बरी हो जाने के बाद वर्तमान सरकार पर भी उसकी मदद करने का आरोप लगने लगा था।
हत्या के बाद से आरा में रणवीर सेना समर्थकों ने जमकर उत्पात मचाना शुरू कर दिया है। जगह-जगह आगजनी और तोड़फोड़ की सूचना है। आरा के कतिरा थाना क्षेत्र में जहां पर मुखिया की हत्या हुई है वहां पर स्थित हरिजन छात्रावास में आग लगा दी गई है।
पासवान ने कहा कि ब्रह्मेश्वर मुखिया हत्याकांड की सीबीआई से जांच होनी चाहिए। उनकी हत्या की घटना निंदनीय है। लोकतंत्र में हिंसा को किसी भी प्रकार से उचित नहीं ठहराया जा सकता। बिहार की जातिगत लड़ाइयों का एक चर्चित चेहरा थे ब्रह्मेश्वर मुखिया। बिहार राज्य में एक वक्त ऐसा आया जब नक्सली संगठनों और बड़े किसानों के बीच खूनी लड़ाई का दौर चल पड़ा। इस दौरान ही ब्रह्मेश्वर मुखिया ने अपने नेतृत्व में अपनी एक सेना बनाई थी। सितंबर 1994 में ब्रह्मेश्वर मुखिया के नेतृत्व में जो सगंठन बना उसे रणवीर सेना का नाम दिया गया। ब्रह्मेश्वर मुखिया ने ऊंची जाति के जमींदारों की प्राइवेट आर्मी रणवीर सेना की शुरुआत की थी। 1994 से लेकर 2002 तक करीब 250 लोगों की हत्या के 22 मुकदमें का मुख्य आरोपी ब्रह्मेश्वर मुखिया को सबूतों के अभाव में कुछ दिन पहले ही जमानत दी गई थी। ब्रह्मेश्वर मुखिया पर सबसे पहले अपने ही गांव खोपिरा में रक्तपात करने का आरोप लगा था। उसके बाद 2002 तक तकरीबन 22 बार दलितों और पिछड़ों को मौत के घाट उतारने का आरोप लगाया गया। इन आरोपों को जांच के लिए लिए जो अमीरदास आयोग बनी थी उसे जनवरी 2006 में भंग कर दिया गया था। अमीरदास आयोग का गठन तत्कालीन राजद सरकार ने रणवीर सेना पर लगे आरोपों की जांच करने के लिए किया था। बिहार में ब्रह्मेश्वर मुखिया ने वर्ष 1994 के अंत में रणवीर सेना का गठन किया था। इस सेना पर 29 अप्रैल 1995 को भोजपुर जिले के संदेश प्रखंड के खोपिरा में पहली बार कहर बरपाने का आरोप लगा। आरोप था कि इस दिन ब्रह्मेश्वर मुखिया की मौजूदगी में रणवीर सेना ने 5 दलितों की हत्या कर दी थी। इसके करीब 3 महीने बाद रणवीर सेना ने भोजपुर जिले के ही उदवंतनगर प्रखंड सरथुआं गांव में 25 जुलाई 1995 को 6 लोगों की गोली मारकर हत्या कर दी गई। 7 फरवरी 1996 को रणवीर सेना ने एक बार फिर भोजपुर जिले के चरपोखरी प्रखंड के चांदी गांव में हमला कर 4 लोगों की हत्या कर दी। इसके बाद 9 मार्च 1996 को भोजपुर के सहार प्रखंड के पतलपुरा में 3, 22 अप्रैल 1996 को सहार प्रखंड के ही नोनउर नामक गांव में रणवीर सेना ने 5 लोगों की हत्या कर दी। 29 अप्रैल 1995 से लेकर 25 मई 1996 तक के बीच रणवीर सेना ने कुल 38 लोगों की हत्या कर दी। 11 जुलाई 1996 के दिन रणवीर सेना ने भोजपुर जिले के सहार प्रखंड के ही बथानी टोला नामक दलितों और पिछड़ों की बस्ती पर हमला बोलकर 21 लोगों की गर्दन रेतकर हत्या कर दी। वर्ष 1997 में रणवीर सेना ने भोजपुर जिले के बाहर कदम रखा और 31 जनवरी 1997 को जहानाबाद के मखदूमपुर प्रखंड के माछिल गांव में 4 दलितों की हत्या कर दी। इस घटना के बाद रणवीर सेना ने पटना जिले के बिक्रम प्रखंड के हैबसपुर नामक गांव में 10 लोगों की हत्या कर दी। इस घटना को रणवीर सेना ने 26 मार्च 1997 को अंजाम दिया। रणवीर सेना ने 31 दिसंबर 1997 को रणवीर सेना ने जहानाबाद के लक्ष्मणपुर-बाथे नामक गांव में एक साथ 59 लोगों की निर्मम हत्या कर दी। यह बिहार में हुआ अब तक का सबसे बड़ा सामूहिक नरसंहार है। 25 जनवरी 1999 को रणवीर सेना ने जहानाबाद में एक और बड़े नरसंहार को अंजाम दिया। जहानाबाद के अरवल प्रखंड के शंकरबिगहा नामक गांव में 23 लोगों की हत्या कर दी गई। इसके बाद 10 फरवरी 1999 को जहानाबाद के नारायणपुर में 12, 21 अप्रैल 1999 को गया जिले के बेलागंज प्रखंड के सिंदानी नामक गांव में 12, 28 मार्च 2000 को भोजपुर के सोनबरसा में 3, नोखा प्रखंड के पंचपोखरी में 3 और 16 जून 2000 को रणवीर सेना ने औरंगाबाद जिले के गोह प्रखंड के मियांपुर गांव में 33 लोगों की सामूहिक हत्या कर दी, इसमें 20 महिलाएं, 4 बच्चे और केवल 9 वयस्क पुरुष थे। गौरतलब है कि ब्रह्मेश्वर पर राज्य सरकार ने पांच लाख रुपए का इनाम घोषित कर रखा था। उसे 29 अगस्त 2002 को पटना के एक्जीबिशन रोड से गुप्त सूचना के आधार पर गिरफ्तार कर लिया गया। करीब नौ वर्ष बाद ब्रह्मेश्वर 10 जुलाई 2011 को न्यायालय के आदेश के बाद जेल से बाहर आया। जेल से बाहर आने के बाद पांच मई 2012 को ब्रह्मेश्वर ने भारतीय राष्ट्रवादी किसान संगठन के नाम से एक संगठन बनाया और कहा कि अब वह किसानों की हित की लड़ाई एक बार फिर लड़ेगा। उल्लेखनीय है कि ब्रह्मेश्वर के साक्ष्य के अभाव में अधिकांश मामलों में बरी हो जाने के बाद वर्तमान सरकार पर भी उसकी मदद करने का आरोप लगने लगा था।
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टिप्पणियाँ
टिप्पणियॉ पढ़े(7)
Mukhiya ji Bhumihar ke shaan the aise awtari purush bidle hi pada hote
By Anubha Sharma (1st-November-2012 04:59:PM)
मुखिया जी को जो जानता है वही उनके बारे में कुछ कहने का अधिकारी सुबह चाय पिने के दौरान अखबार पर्ह्नेवाले एवं बीवी के साथ टीवी देखनेवाले जिन कठिनाइयों को एक किसान जीता है वह कोई नहीं जान अरबों की सम्पत्तिवाले लुटेरों की अनदेखी करके ५ - १० बीघा के जोतदारों को जमींदार बतानेवाले ये समाज विरोधी अखबार वाले पैसा लेकर कुछ भी लिख देते इसलिए अनुरोध है की इनके बहकावे में न आ करके निष्पक्ष टिपण्णी
By धनञ्जय कुमार (3rd-June-2012 04:26:PM)
jaisi करनी वैसी bharani
By saroj (2nd-June-2012 08:13:AM)
बुरे का अंजाम भी बुरा होता जो भी हुआ अच्छा जो सख्स २५० से भी ज्यादा हत्याओमें सामिल रहा हो, उसके लिए ये सही न्याय
By Samir (2nd-June-2012 01:44:AM)
Police administration in Bihar is not They failed to give right protection to was leader of many of innocent He save many live of upper I salute this There should be immediate action against guilty
By Shyam (2nd-June-2012 01:00:AM)
A Ac ha nah i hoa ?
By Deepak Singh (1st-June-2012 04:49:PM)
जब कानून लोगों को इंसाफ न दिला पाए तो ऐसा ही अंजाम देखने को मिलता है के फिर आम आदमी से कोई न कोई खुद ही इंसाफ करने को खड़ा हो उठता नितीश जी से अनुरोध है की पुलिस को इस तरह तैयार करें के वोह ठोस सबूत पेश करने में सक्षम हो सके और फास्ट ट्रैक कोर्ट के ज़रिये जल्द से जल्द मजलूम को इंसाफ मिल
By A M Samar Gilani (1st-June-2012 03:43:PM)
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