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देर से ही सही, दिल्ली ने की गुटखे से तौबा
नई दिल्ली, एजेंसी
First Published:11-09-12 01:18 PM
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देर आये, दुरुस्त आये...बेहद आकर्षक पैकिंग में मजेदार स्वाद का दावा करने वाले और आसानी से उपलब्ध हो जाने वाले गुटखे पर आखिरकार राजधानी दिल्ली में आज से प्रतिबंध लगने जा रहा है।

सेहत को होने वाले नुकसान के मद्देनजर इस मीठे जहर पर 11 राज्य पहले ही प्रतिबंध लगा चुके हैं। गुटखे पर प्रतिबंध लगाने के लिए प्रयासरत डॉक्टरों के गैर सरकारी संगठन डॉक्टर्स फॉर यू के सदस्य और मुंबई स्थित टाटा मेमोरियल हॉस्पिटल के डॉ. पंकज चतुर्वेदी ने फोन पर बताया कि हम चाहते हैं कि गुटखे से सेहत को होने वाले नुकसान को देखते हुए इस पर पूरे देश में प्रतिबंध लगा दिया जाए।

हमने पिछले साल उत्तर प्रदेश और कर्नाटक में गुटखे पर प्रतिबंध के लिए जनहित याचिका दाखिल की थी, लेकिन दिल्ली का नतीजा इन राज्यों से पहले मिल गया। बहरहाल उन्होंने इस बात पर अफसोस जताया कि दिल्ली ने गुटखे पर प्रतिबंध का फैसला बहुत देर से लिया। 11 राज्यों में गुटखा प्रतिबंधित हो चुका है। जबकि देश की राजधानी को यह कदम सबसे पहले उठा कर उदाहरण पेश करना चाहिए था।

उच्चतम न्यायालय में मामले की सुनवाई के दौरान स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय की ओर से बताया गया था कि मुंह के कैंसर के करीब 90 फीसदी मामलों का कारण गुटखा है। डॉ. चतुर्वेदी ने कहा हर तीसरा व्यक्ति गुटखे का सेवन करता है और ज्यादातर मामलों में इसका नतीजा मुंह, गले, फेफड़े या पेट के कैंसर के तौर पर सामने आता है। विकसित देश बनने के लिए कदम उठा रहे भारत की युवा आबादी के इस तरह बीमारियों की गिरफ्त में आने से देश का विकास तो प्रभावित होगा ही, साथ ही अर्थव्यवस्था और श्रम बल पर भी असर होगा।

दिल्ली में गुटखा चबाते हुए पाए जाने पर छह माह से एक साल की कैद और 25 हजार रुपये जुर्माने की सजा दी जा सकती है। गुटखा की बिक्री करते पाए जाने पर उसे जब्त किया जा सकता है। उसकी बिक्री करने वाली दुकान का लाइसेंस, गुटखा निर्माता का उत्पादन लाइसेंस भी जब्त किया जा सकता है। इसके अलावा दिल्ली क्षेत्र में इसका परिवहन करने पर ट्रांसपोर्टर पर भी जुर्माना होगा।

डॉ. चतुर्वेदी ने कहा केवल प्रतिबंध लगाने से ही काम नहीं चलेगा। आज धूम्रपान पर प्रतिबंध लगने के बावजूद लोग खुलेआम सिगरेट पीते दिखते हैं। प्रतिबंध को सही तरीके से लागू किया जाना चाहिए और इसमें मीडिया और समाज का सहयोग भी बहुत जरूरी है।

गुटखे पर प्रतिबंध के लिए अभियान चला रहे गैर सरकारी संगठन सलाम बॉम्बे फाउंडेशन की कार्यक्रम निदेशक देविका चड्ढा ने फोन पर बताया गुटखा 10 साल से कम उम्र के बच्चों भी खाते हैं। खास बात यह है कि गुटखे के नाम से लेकर पूरा प्रचार बच्चों को लक्ष्य कर किया जाता है। शुरू में बच्चों शौक से खाते हैं और बाद में वह उसके आदी हो जाते हैं। यह स्लो प्वॉइजन धीरे-धीरे उनके स्वास्थ्य पर प्रतिकूल असर डालने लगता है।

देविका ने कहा संविधान में भी बच्चों के स्वास्थ्य को प्राथमिकता दी गई है और इसीलिए हमने गुटखे पर प्रतिबंध की मांग शुरू की। तंबाकू उनकी सेहत पर विपरीत प्रभाव डालते हैं। मप्र, हरियाणा, बिहार, महाराष्ट्र, केरल, राजस्थान, सहित 11 राज्यों में इस पर प्रतिबंध लग चुका है। हिमाचल प्रदेश में दो अक्टूबर से और गुजरात में जल्दी ही इस पर प्रतिबंध लग जाएगा। सभी राज्यों ने अलग-अलग सजा और जुर्माना तय किया है।

 

 

 
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