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पूर्व राष्ट्रपति डा. एपीजे अब्दुल कलाम ने गुरुवार को वैज्ञानिकों का आह्वान किया कि वे वैज्ञानिक पद्धति से बिहार की आर्थिक चुनौतियों को सुलझाएं। यहां की बाढ़ की समस्या का निजात यदि हम बेहतर जल प्रबंधन से ढूंढ निकालते हैं तो फिर इस सूबे के विकास के रास्ते में कोई दूसरी दुश्वारी नहीं रह जाएगी। यहां अच्छे वाटरवेज की व्यवस्था करने की जरूरत है।
डा. कलाम गया कॉलेज में बिहार ब्रेन्स डेवलपमेंट सोसाइटी के तत्वावधान में आयोजित तीन दिवसीय थर्ड बिहार साइंस कांफ्रेंस का उद्घाटन कर रहे थे। इस मौके पर मुख्यमंत्री नीतीश कुमार और आईटी मंत्री डा. अनिल कुमार भी मौजूद थे।
डा. कलाम ने कहा कि बिहार का वाटरवेज (जलपथ) एक तकनीकी चुनौती है। यहां जितना पानी है उसका सही इस्तेमाल करने की जरूरत है। अच्छे जल प्रबंधन से इस सूबे को न सिर्फ अनाज - भंडार में तब्दील किया जा सकता है बल्कि बिजली संकट को भी विदा किया जा सकता है। एक सुदृढ़ जल परिवहन भी विकसित किया जा सकता है।
उन्होंने कहा कि बाढ़ से निबटने के लिए यह जरूरी है कि यहां की बड़ी नदियों को आपस में जोड़ा जाए। इसके लेवल को ऊंचा कर सिंचाई और पीने के काम में इसके पानी को ला सकते हैं। उन्होंने कहा कि इस संकट से उबरने के लिए बिहार विधानसभा को कुछ बिंदुओं पर मैंने सलाह भी दी है।
डा. कलाम ने कहा कि बिहार के विकास के बारे में जो मेरी सोच है वह यह है कि यहां पांच सौ किमी जल परिवहन की व्यवस्था की जाए। यह तभी संभव है जब पूरे प्रदेश को नहरों से जोड़ा जाए। इससे रेलवे से दूना और पथ परिवहन से आठ गुना सुविधा लोगों को मिलेगी। इतना ही नहीं पांच मिलियन एकड़ जमीन की सिंचाई होगी। एक हजार मेगावाट बिजली की सुविधा भी मिलेगी साथ ही नब्बे लाख लोगों को रोजगार मिलेगा।
मिसाइल मैन ने कहा कि इस प्रदेश के बयालिस प्रतिशत लोग अभी भी गरीबी रेखा के नीचे जीवन बसर कर रहे हैं। ऐसे लोगों के चेहरे पर खुशी और मुस्कान तभी दिखेगी जब हम समवेत प्रयास से उनकी आय बढ़ाएंगे। हमारा मिशन हो कि बिहार की प्रति व्यक्ति आय में छह गुणा इजाफा हो। यहां के शत-प्रतिशत लोग साक्षर हों और जच्च की दर घटकर एक हजार पर दस रह जाए।
उन्होंने उन दस बिंदुओं की चर्चा भी की जो 2006 में बिहार विधानसभा में विकास के मुद्दे पर कहे थे। डा. कलाम ने पर्यावरण की सुरक्षा की खातिर पौधरोपण पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि आप सभी जीवन में ऐसा कुछ काम करें जिसके लिए याद किए जाएं। डा. कलाम ने गया आने पर बेहद प्रसन्नता जतायी और कहा कि कांफ्रेंस का आयोजन सही जगह पर किया गया है। बोधगया वह जगह है जो ढाई हजार वर्षो से जीवन का दर्शन देते आ रहा है।
इस मौके पर मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने कहा कि मैं कलाम साहब को सिर्फ सुनने आया हूं। मैं जब भी सुनता हूं प्रेरित होता हूं। वे राष्ट्रपति रहे तब और अब भी युवा वर्ग तथा किसानों के लिए आकर्षण का केन्द्र बने रहे। कांफ्रेंस की अध्यक्षता मगध विश्वविद्यालय के कुलपति डा. बिलट पासवान शास्त्री ने की। इस मौके पर एक स्मारिका का विमोचन भी किया गया।

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