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राष्ट्रीय राजधानी से सटे सुरम्य स्थल सूरजकुंड में आयोजित 24वें हस्तशिल्प मेले में बिजली की बर्बादी का मामला गरमा गया है और मेला प्रबंधन से जुड़े अधिकारी अब अपना-अपना पल्ला झाड़ने की कोशिश में लगे हैं।उल्लेखनीय है कि मेला परिसर में रात में उजाला करने के लिए प्रशासन ने सैकड़ों पीले बल्ब लगाए हैं जिनका प्रयोग उसने पहले से ही वर्जित कर रखा है। यहां तक कि किसानों के ट्यूबवेलों पर भी पीले बल्ब लगाने की इजाजत नहीं है।
पीले रंग के 100 वाट वाले बल्बों से जहां बिजली की बर्बादी होती है, वहीं इन्हें ग्लोबल वार्मिंग के एक कारक के रूप में भी जाना जाता है। हरियाणा पर्यटन विभाग की सचिव एवं आयुक्त केशनी आनंद का कहना है कि मेले में प्रकाश की व्यवस्था निजी हाथों में थी और इसीलिए वहां पर पीले बल्ब लगा दिए गए। उनका कहना है कि इतनी बड़ी संख्या में इतनी जल्दी सीएफएल लगाना संभव नहीं है, लेकिन दूसरे विकल्पों पर विचार किया जा रहा है।
दूसरी ओर, मामला गरमाते देख बिजली विभाग के कार्यकारी अभियंता सुधीर छाबड़ा ने मेला अधिकारी राजेश जून को पत्र लिखकर कहा है कि किसी भी मेला या प्रदर्शनी में पीले बल्ब लगाना वर्जित है और इनकी जगह सीएफएल का इस्तेमाल किया जाना चाहिए।
मेले में पीले बल्ब लगाए जाने की पर्यावरण संरक्षण से जुड़े कार्यकर्ता भी आलोचना कर रहे हैं। उनका कहना है कि 100 वाट के पीले बल्बों में खपत होने वाली सिर्फ 15 प्रतिशत बिजली का ही इस्तेमाल प्रकाश के लिए हो पाता है, जबकि 85 फीसदी बिजली बेकार चली जाती है और इससे ग्लोबल वार्मिंग पैदा होती है।
पर्यावरण संरक्षण कार्यकर्ता ललित कुमार ने मांग की कि सूरजकुंड मेले से जल्द ही पीले बल्ब हटाकर उनकी जगह सीएफएल लगाए जाने चाहिए। केशनी आनंद का कहना है कि मेले में जल्द ही अन्य विकल्प की व्यवस्था पर विचार हो रहा है।

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