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ईएसआई अस्पताल के विकास कार्यो में अब पैसे को लेकर रूकावट नहीं आएगी। ऐसी समस्यों से जरूरी कामों को अलग रखने को ईएसआई ने ‘ऑन लाइन फंड’ उपलब्ध कराने की व्यवस्था की है। उम्मीद की जा रही है कि इसके बाद विकास कार्यो के आड़े आने वाले फंड का मसला अब नहीं रहेगा। फंड पर निगरानी रखने को ईएसआई के चिकित्सा अधीक्षक के नेतृत्व में आठ सदस्यों की एक टीम भी बनाई गई है।
इससे पहले ऑन लाइन फंड रिलिज करने की सुविधा नहीं थी। फंड स्वीकृति के लिए मुख्यालय का चक्कर काटना पड़ता था। इसके बाद ही काम कराना संभव था। नई व्यवस्था में इस परेशानी से मुक्ति मिल जाएगी। इसके लिए ईएसआई अधीक्षक को कुछ विशेष अधिकार दिए गए हैं। माना जा रहा है ईएसआई के अस्पतालों को सुपर स्पेस्लिटी करने में नई योजना कारगर साबित होगी। अस्पताल और डिस्पेंसरी के रख-रखाव के लिए भी अब फंड उपलब्ध होना आसान हो जाएगा। नई व्यवस्था के तहतक्षेत्रीय अधिकारी एक वर्ष में तीन से चार बार मुख्यालय से फंड ले सकते हैं। खर्च का लेखा-जोखा ईएसआई के स्टेट मेडिकल अधिकारी, ब्रांच मैनेजर और एक वरिष्ठ अधिकारी को रखना होगा। अधीक्षक भी अस्पताल के विकास कार्यो पर दो लाख रुपए आसानी से खर्च कर सकेंगे। इससे पहले एक लाख रुपए तक खर्च का अधिकार था। कॉरपोरेशन के एक वरिष्ठ अधिकारी का कहना है कार्ड होल्डर को बेहतर सुविधा देने के लिए यह निर्णय लिया गया है। जल्द ही कार्ड होल्डर के स्लैब में भी बढ़ोतरी की जाएगी।
ईएसआआई के क्षेत्रीय निदेशक एके श्रीवास्तव: कार्यो की समीक्षा प्रत्येक महीने की जाएगी। जरुरत के अनुसार अस्पताल के विकास के लिए फंड मुहैया कराया जा सकता है।
टीम के सदस्य
- ईएसआई अस्पताल के अधीक्षक
- स्टेट मेडिकल अधिकारी
- अस्पताल के डॉक्टर
- मजदूर युनियन के पदाधिकारी
- अस्पताल के दो सदस्य
- एक टेक्निशयन
- ईएसआई के ब्रांच मैनेजर

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