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सिब्बल की सफाई, दोषियों के खिलाफ होगी कार्रवाई
नई दिल्ली, एजेंसी
First Published:11-05-12 04:42 PM
Last Updated:11-05-12 06:48 PM
एनसीईआरटी की पुस्तक में संविधान निर्माता भीमराव अंबेडकर के बारे में प्रकाशित एक कार्टून को लेकर बसपा सहित विभिन्न दलों के सदस्यों के हंगामे के बीच सरकार ने शुक्रवार को स्पष्ट किया कि ऐसी कार्टून वाली सभी किताबों के वितरण को रोक देने का निर्देश दिया गया है तथा दोषियों के खिलाफ जल्द से जल्द कार्रवाई की जाएगी।
इस मुद्दे पर हुए हंगामे के कारण राज्यसभा की कार्यवाही आज तीन बार स्थगित करनी पड़ी। तीन बार के स्थगन के बाद दोपहर ढाई बजे जब बैठक फिर से शुरू हुई तो मायावती सहित विभिन्न दलों के नेताओं ने यह मुद्दा फिर उठाया। इनके जवाब में मानव संसाधन विकास मंत्री कपिल सिब्बल ने कहा कि वह इस मामले में जल्द से जल्द कार्रवाई करेंगे।
उन्होंने कहा कि उनके संज्ञान में यह मामला अप्रैल में ही आ गया था। उन्होंने एनसीईआरटी को पत्र लिख कर इस बारे में एक स्पष्टीकरण मांगा था।
सिब्बल ने कहा कि पाठ्यपुस्तकें तैयार करने का काम स्वतंत्र शिक्षाविदों की एक समिति करती है। इस समिति में हरि वासुदेवन, योगेन्द्र यादव, सुहास पाल शिखर जैसे लोग शामिल हैं। उन्होंने कहा कि जिस कार्टून वाली पुस्तक को लेकर विवाद है वह 2006 में जारी की गई थी।
सिब्बल ने कहा कि उन्होंने 26 अप्रैल को पत्र लिख कर एनसीईआरटी को निर्देश दिया कि वह थोक विक्रेता से पुस्तकें वितरण के लिए जारी करने पर रोक लगाने को कहे तथा इस पुस्तक को अब बाजार में जारी न किया जाए।
उन्होंने कहा कि एनसीईआरटी को यह भी निर्देश दिए गए हैं कि वह एक समिति गठित कर सारी पाठयपुस्तकों में शामिल किए गए कार्टूनों की जांच करे। उन्होंने कहा कि एनसीईआरटी की पुस्तकों में राष्ट्रीय नेताओं के बारे में कई ऐसे कार्टून हैं जिन्हें लेकर कई लोगों को आपत्ति हो सकती है।
सिब्बल ने कहा कि अंबेडकर किसी एक वर्ग या राजनीतिक दल के नेता नहीं बल्कि पूरे देश के नेता थे। इस कार्टून के कारण उनके प्रशंसकों और अनुयायियों को ठेस लगी और चिंता हुई है। इस बात से सरकार भी सहमत है। सरकार का मानना है कि ऐसा हरगिज नहीं होना चाहिए।
इस मामले के लिए दोषी लोगों के खिलाफ कानूनी कार्रवाई करने के सदस्यों के दबाव पर उन्होंने कहा कि इस मामले में जांच के बाद विचार करना पड़ेगा कि किस कानून के तहत उनके खिलाफ कार्रवाई की जा सकती है। उन्होंने आश्वासन दिया कि इस मामले में जल्द से जल्द कार्रवाई की जाएगी।
इससे पूर्व यह मुद्दा उठाते हुए बसपा प्रमुख मायावती ने कहा कि यह कार्टून छाप कर पूरे देश में अंबेडकर पर आस्था रखने वाले लोगों को दुख पहुंचाया गया है। उन्होंने कहा कि सरकार को इस मामले में स्पष्टीकरण देना चाहिए। मायावती ने मांग की कि इस मामले में शामिल दोषियों के खिलाफ आपराधिक कार्रवाई की जाए।
लोजपा प्रमुख रामविलास पासवान ने इसे बेहद शर्मनाक करार देते हुए कहा कि यह देश में करोड़ों की संख्या में रह रहे अंबेडकर अनुयायियों को पीड़ा पहुंचाने वाली बात है। उन्होंने कहा कि सरकार को फौरन एनसीईआरटी को भंग कर देना चाहिए। साथ ही यह कार्टून छापने के दोषी लोगों के खिलाफ अनसूचित जाति जनजाति (अत्याचार निरोधक) कानून के तहत कार्रवाई की जानी चाहिए।
कांग्रेस के विजय जवाहरलाल दर्डा ने कहा कि यह पुस्तक 2006 से ही वितरित होनी शुरू हो गई थी। उन्होंने कहा कि सरकार को इस पूरे मामले पर स्पष्टीकरण देना चाहिए। भाजपा के थावर चंद गहलोत ने कहा कि यह बेहद आपत्तिजनक मामला है और इसकी घोर निंदा की जानी चाहिए। उन्होंने मांग की कि शिक्षा को विकत करने वाले लोगों के खिलाफ कार्रवाई होनी चाहिए।
माकपा के टी के रंगराजन ने कहा कि कि सरकार को दोषी लोगों को सबसे पहले निलंबित कर उन्हें उनके खिलाफ कार्रवाई करनी चाहिए। तेदेपा के देवेंद्र गौड़ टी ने कहा कि इस मामले से न केवल बाबा साहेब अंबेडकर बल्कि पूरे देश के कमजोर तबके का अपमान हुआ है।
राजद के रामकपाल यादव ने कहा कि दोषी लोगों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जानी चाहिए। इससे पूर्व प्रश्नकाल के दौरान बसपा के ब्रजेश पाठक ने एनसीईआरटी की किताब में अंबेडकर का कार्टून प्रकाशित होने का मुद्दा उठाया और सरकार से दोषियों के खिलाफ कार्रवाई की मांग की। अन्य सदस्यों ने भी उनके पक्ष में अपनी राय जाहिर की। हंगामे की वजह से सभापति हामिद अंसारी ने प्रश्नकाल के दौरान बैठक दो बार स्थगित की।
दोपहर बारह बजे शून्यकाल शुरू होने पर भी हंगामा नहीं थमा। शोरगुल के बीच ही आवश्यक दस्तावेज सदन के पटल पर रखवाने के बाद पीठासीन अध्यक्ष पी जे कुरियन ने बैठक दोपहर ढाई बजे तक के लिए स्थगित कर दी।
इस मुद्दे पर हुए हंगामे के कारण राज्यसभा की कार्यवाही आज तीन बार स्थगित करनी पड़ी। तीन बार के स्थगन के बाद दोपहर ढाई बजे जब बैठक फिर से शुरू हुई तो मायावती सहित विभिन्न दलों के नेताओं ने यह मुद्दा फिर उठाया। इनके जवाब में मानव संसाधन विकास मंत्री कपिल सिब्बल ने कहा कि वह इस मामले में जल्द से जल्द कार्रवाई करेंगे।
सिब्बल ने कहा कि पाठ्यपुस्तकें तैयार करने का काम स्वतंत्र शिक्षाविदों की एक समिति करती है। इस समिति में हरि वासुदेवन, योगेन्द्र यादव, सुहास पाल शिखर जैसे लोग शामिल हैं। उन्होंने कहा कि जिस कार्टून वाली पुस्तक को लेकर विवाद है वह 2006 में जारी की गई थी।
सिब्बल ने कहा कि उन्होंने 26 अप्रैल को पत्र लिख कर एनसीईआरटी को निर्देश दिया कि वह थोक विक्रेता से पुस्तकें वितरण के लिए जारी करने पर रोक लगाने को कहे तथा इस पुस्तक को अब बाजार में जारी न किया जाए।
उन्होंने कहा कि एनसीईआरटी को यह भी निर्देश दिए गए हैं कि वह एक समिति गठित कर सारी पाठयपुस्तकों में शामिल किए गए कार्टूनों की जांच करे। उन्होंने कहा कि एनसीईआरटी की पुस्तकों में राष्ट्रीय नेताओं के बारे में कई ऐसे कार्टून हैं जिन्हें लेकर कई लोगों को आपत्ति हो सकती है।
सिब्बल ने कहा कि अंबेडकर किसी एक वर्ग या राजनीतिक दल के नेता नहीं बल्कि पूरे देश के नेता थे। इस कार्टून के कारण उनके प्रशंसकों और अनुयायियों को ठेस लगी और चिंता हुई है। इस बात से सरकार भी सहमत है। सरकार का मानना है कि ऐसा हरगिज नहीं होना चाहिए।
इस मामले के लिए दोषी लोगों के खिलाफ कानूनी कार्रवाई करने के सदस्यों के दबाव पर उन्होंने कहा कि इस मामले में जांच के बाद विचार करना पड़ेगा कि किस कानून के तहत उनके खिलाफ कार्रवाई की जा सकती है। उन्होंने आश्वासन दिया कि इस मामले में जल्द से जल्द कार्रवाई की जाएगी।
इससे पूर्व यह मुद्दा उठाते हुए बसपा प्रमुख मायावती ने कहा कि यह कार्टून छाप कर पूरे देश में अंबेडकर पर आस्था रखने वाले लोगों को दुख पहुंचाया गया है। उन्होंने कहा कि सरकार को इस मामले में स्पष्टीकरण देना चाहिए। मायावती ने मांग की कि इस मामले में शामिल दोषियों के खिलाफ आपराधिक कार्रवाई की जाए।
लोजपा प्रमुख रामविलास पासवान ने इसे बेहद शर्मनाक करार देते हुए कहा कि यह देश में करोड़ों की संख्या में रह रहे अंबेडकर अनुयायियों को पीड़ा पहुंचाने वाली बात है। उन्होंने कहा कि सरकार को फौरन एनसीईआरटी को भंग कर देना चाहिए। साथ ही यह कार्टून छापने के दोषी लोगों के खिलाफ अनसूचित जाति जनजाति (अत्याचार निरोधक) कानून के तहत कार्रवाई की जानी चाहिए।
कांग्रेस के विजय जवाहरलाल दर्डा ने कहा कि यह पुस्तक 2006 से ही वितरित होनी शुरू हो गई थी। उन्होंने कहा कि सरकार को इस पूरे मामले पर स्पष्टीकरण देना चाहिए। भाजपा के थावर चंद गहलोत ने कहा कि यह बेहद आपत्तिजनक मामला है और इसकी घोर निंदा की जानी चाहिए। उन्होंने मांग की कि शिक्षा को विकत करने वाले लोगों के खिलाफ कार्रवाई होनी चाहिए।
माकपा के टी के रंगराजन ने कहा कि कि सरकार को दोषी लोगों को सबसे पहले निलंबित कर उन्हें उनके खिलाफ कार्रवाई करनी चाहिए। तेदेपा के देवेंद्र गौड़ टी ने कहा कि इस मामले से न केवल बाबा साहेब अंबेडकर बल्कि पूरे देश के कमजोर तबके का अपमान हुआ है।
राजद के रामकपाल यादव ने कहा कि दोषी लोगों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जानी चाहिए। इससे पूर्व प्रश्नकाल के दौरान बसपा के ब्रजेश पाठक ने एनसीईआरटी की किताब में अंबेडकर का कार्टून प्रकाशित होने का मुद्दा उठाया और सरकार से दोषियों के खिलाफ कार्रवाई की मांग की। अन्य सदस्यों ने भी उनके पक्ष में अपनी राय जाहिर की। हंगामे की वजह से सभापति हामिद अंसारी ने प्रश्नकाल के दौरान बैठक दो बार स्थगित की।
दोपहर बारह बजे शून्यकाल शुरू होने पर भी हंगामा नहीं थमा। शोरगुल के बीच ही आवश्यक दस्तावेज सदन के पटल पर रखवाने के बाद पीठासीन अध्यक्ष पी जे कुरियन ने बैठक दोपहर ढाई बजे तक के लिए स्थगित कर दी।
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