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जब पड़ी गर्मी की मार
रेनू सैनी
First Published:11-06-12 12:17 PM
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शेरू महाराज ने नंदनवन के सभी पशु-पक्षियों की शिकायत सुनी। उन्होंने सोचा, गर्मी को दूर भगाने के लिए कुछ न कुछ उपाय तो होना ही चाहिए। उन्हें अपने सलाहकार चतुर खरगोश की याद आई। उन्होंने चतुर से इस प्रॉब्लम का जिक्र किया।

जून के महीने में पूरा नंदनवन तेज धूप से परेशान था। दिन में तो ऐसी लू चल रही थी कि घोंसले या गुफा से बाहर निकलना भी मुश्किल हो रहा था। पक्षियों के घोंसले भी ऐसे पेड़ों पर बने थे, जिनमें कुछ ही फल-फूल और पत्ते थे।

एक दिन मीकू बंदर छलांग लगाता हुआ अपने दोस्तों के पास आया और पसीना पोंछते हुए बोला, ‘इस बार गर्मी से हम सभी का बचना मुश्किल है।’ उसकी बात सुनकर चिंपी चिड़िया बोली, ‘हां भैया, इस बार तो गर्मी बहुत पड़ रही है। न तो ठंडा पानी पीने को मिलता है और न ही ठंडी हवा। सभी पशु-पक्षी बड़े परेशान हैं।’ चिंपी की यह बात सुनकर सभी दोस्तों ने जंगल के राजा शेरू के पास जाने की सोची।

सभी मिलकर राजा शेरू के पास पहुंचे। गजनी हाथी बोला, ‘महाराज, इस बार की गर्मियां तो हमारे लिए घातक साबित हो रही हैं। तालाब सूख रहे हैं। पानी में हाथ डालते ही बाहर निकालना पड़ता है। सूरज की गर्मी पानी को तपा देती है। ऐसे में प्यास से कई पशु-पक्षी मर रहे हैं, रहने का भी कोई ठिकाना नहीं है। अभी जिन पेड़ों, झाड़ियों और गुफाओं में हमारे घर हैं, वहां भी गर्मी पीछा नहीं छोड़ती। कोई ऐसा साधन सुझाइए, जिससे हमें ठंडी हवा, ठंडा पानी मिले।’ गजनी हाथी की बात पर चीकू खरगोश बोला, ‘इंसानों के घरों में ठंडे पानी के लिए फ्रिज, ठंडी हवा के लिए पंखे, कूलर और एसी हैं। इक्कीसवीं सदी में हमारे लिए भी नंदनवन में ऐसे इंतजाम किए जाने चाहिए’।

शेरू महाराज ने नंदनवन के सभी पशु-पक्षियों की शिकायत सुनी। उन्होंने सोचा, गर्मी को दूर भगाने के लिए कुछ न कुछ उपाय तो होना ही चाहिए। उन्हें अपने सलाहकार चतुर खरगोश की याद आई। चतुर, बड़ा होशियार था। उन्होंने चतुर से इस प्रॉब्लम का जिक्र किया। सारी बात जानने के बाद चतुर बोला, ‘महाराज, नंदनवन में पंखे, कूलर, फ्रिज का इंतजाम बहुत मुश्किल है। हम इंसानों की तरह तो रहते नहीं हैं। उनके पास तो रहने के लिए घर हैं, जबकि हम पशु-पक्षियों के लिए तो पूरा जंगल ही हमारा घर है। ऐसे में यहां पंखे, कूलर कैसे लग सकते हैं?’ चतुर खरगोश की बात सुनकर शेरू महाराज बोले, ‘पर फिर भी हमें कुछ न कुछ इंतजाम तो करना ही होगा।’ चतुर बोला, ‘मैं कुछ न कुछ करता हूं। अब आप इस काम की जिम्मेदारी मुझे सौंप दीजिए।’ इसके बाद खरगोश नंदनवन को ठंडा रखने के लिए नई-नई योजनाएं बनाने लगा। उसने पूरे नंदनवन को करीब से देखने की ठानी, इसलिए वह रोज सवेरे नंदनवन घूमने निकल पड़ता। एक दिन सवेरे जब वह घूमकर लौटा तो बड़ा खुश दिखाई दिया। वह राजा शेरू के पास जाकर बोला, ‘महाराज, मैंने नंदनवन के लिए एक बहुत बड़ा एसी ढूंढ़ लिया है, जो गर्मी में सबको ठंडा रखेगा।’ चतुर की बात सुनकर शेरू महाराज बहुत खुश हुए। उन्होंने उससे वह एसी दिखाने को कहा तो वह बोला, ‘महाराज, उस एसी को मैंने एक जगह फिट करवा दिया है, इसलिए जंगल के सभी पशु-पक्षियों को और आपको उसे देखने के लिए मेरे साथ चलना पड़ेगा।’

सभी चतुर खरगोश की अजीबो-गरीब बातें सुनकर हैरान थे कि आखिर इतना बड़ा एसी उसने कब और कहां से खरीदा और किस जगह उसे फिट करवाया।

खरगोश के साथ नंदनवन का राजा शेरू और अन्य सभी जानवर व पक्षी चल पड़े। वह एक खाली से स्थान पर आ पहुंचे। यहां पर पेड़-पौधे बहुत अधिक मात्र में थे और एक बड़ा बरगद का पेड़ था, जिसके घने पत्ते और शाखाएं दूर-दूर तक झूल रही थीं। उस बरगद के पास आकर खरगोश बोला, ‘यही है नंदनवन का एसी, जो हमारे सामने मौजूद था, लेकिन जिसका महत्व हम समझ ही नहीं पाए।’

सभी पशु-पक्षियों को बरगद के पेड़ के नीचे आते ही एक अजीब सी ठंडक का एहसास हुआ और ताजी हवा से सभी झूम उठे।

खरगोश बोला, ‘हम इंसानों की होड़ कर फ्रिज, पंखे, कूलर की मांग कर रहे थे, जबकि हमारे पास उन सबसे अधिक टिकाऊ, साफ और नेचुरल हवा देने वाला एसी मौजूद है। इस एसी की तुलना इंसानों के बनाए एसी से नहीं की जा सकती। यह घना बरगद का पेड़ कई पशु-पक्षियों के रहने का ठिकाना बन सकता है और इसके नीचे हम मटकों में पानी भरकर रख सकते हैं, जिनसे हमें पीने को ठंडा पानी मिलेगा। यहां पर और भी कई पेड़ हैं, जो हमें साफ, ठंडी और ताजी हवा देंगे और हमें गर्मी भी नहीं लगेगी। हां, हमें यह प्रॉमिस करना होगा कि नंदनवन को और हरा-भरा बनाए रखने के लिए ज्यादा से ज्यादा पेड़ लगाएंगे ताकि हमें गर्मी में कभी मुसीबत का सामना न करना पड़े।’

खरगोश की बात सुनकर सभी उसकी वाह-वाह करने लगे और महाराज बोले, ‘वाह रे मेरे चतुर, तूने तो सचमुच ऐसा एसी फिट किया है, जिसके आगे सारे एसी फेल हैं। आज ही से मैं नंदनवन में नए पेड़-पौधे लगाने के लिए आदेश देता हूं और पानी के बर्तन भरकर यहां रखवाता हूं, ताकि सभी को ठंडा पानी पीने को मिले।’

पूरा नंदनवन एसी देखकर झूम उठा और कई पशु-पक्षी उस पर अपना घर बनाने चल दिए तो कई नए पेड़-पौधे लगाने की मुहिम में जुट गए ताकि उनके नंदनवन को ऐसा सिर्फ एक एसी नहीं, बल्कि कुछ ही समय कई एसी
मिल सकें।

 
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