मंगलवार, 02 सितम्बर, 2014 | 19:35 | IST
  RSS |    Site Image Loading Image Loading
 
राजा से टकराया पिंटू
मज्कूर आलम
First Published:20-11-13 12:01 PM
Last Updated:20-11-13 12:01 PM
 imageloadingई-मेल Image Loadingप्रिंट  टिप्पणियॉ: (0) अ+ अ-

एक दिन गंदगी में लिथड़ा पिंटू सूअर जंगल किनारे नदी में पानी पी रहा था। नदी की धारा जिस तरफ जा रही थी, उस दिशा में जंगल का राजा शेर पानी पीने के लिए आया। वह पानी पीने के लिए नदी में मुंह डालने ही वाला था कि तभी उसे पानी में बहती ढेर सारी गंदगी नजर आई। उस गंदगी की वजह से पानी पूरी तरह गंदा हो गया था और उससे बदबू आ रही थी। रंग भी मटमैला हो गया था। उसे समझ में नहीं आया कि इस साफ-सुथरी नदी में गंदगी कहां से आई, क्योंकि उसके जंगल वाले तो सफाई का काफी ध्यान रखते हैं। नदी क्या, जंगल में भी जरा-सी गंदगी नहीं फैलाते। उसने अपने चारों ओर नजर दौड़ाई। देखा, थोड़ी ही दूर पर गंदगी से लिथड़ा पिंटू पानी पी रहा है। वह पानी कम पी रहा है और पानी में लोट ज्यादा रहा है, जिसकी वजह से नदी का पानी गंदा हुआ जा रहा है और वही बहकर उसकी तरफ आ रहा है। यह देखकर उसे जोर की उबकाई आई और नदी से दूर भागा। पिंटू को लगा कि शेर उससे डर गया है और उसे देखकर भाग रहा है। वह हंसने लगा और शेर से बोला, ‘अब तुम जंगल के सबसे ताकतवर जानवर नहीं रहे, इसलिए तुम्हें राजगद्दी छोडम् देनी चाहिए। तुमसे ज्यादा शक्तिशाली तो मैं हूं, इसलिए अब इस जंगल पर मैं राज करूंगा’।

‘इसका फैसला कल जंगल के मैदान में मल्लयुद्ध से होगा और अगर कल तुम नहीं आए तो मैं पूरी सूअर जाति का नाश कर दूंगा’, कहता हुआ शेर वहां से चला गया। खुशी-खुशी पिंटू ने वह चुनौती स्वीकार कर ली और उत्साह में भरा अपने घर पहुंचा। शेखी बघारते हुए उसने अपनी पत्नी, बच्चों और माता-पिता से कहा, ‘अब जंगल पर मैं राज करूंगा। जंगल का राजा शेर नहीं।’ उसकी इस बात पर घर में सभी खुशी से नाचने लगे। लेकिन उसके पिता सशंकित हो उठे। उन्होंने पिंटू से कहा, ‘खुशी से ज्यादा उछल मत मूर्ख! पहले पूरी बात बता।’ पिंटू ने अपने पिता को सारी कहानी कह सुनाई। उसके पिता ने कहा, ‘यह क्या किया तूने बेवकूफ! तू शेर से लड़ेगा। वह तुझे कच्चा चबा जाएगा। तेरी हड्डी-पसली एक कर देगा। वह तो तेरी गंदगी की वजह से आज चला गया.. तुझसे डर कर नहीं!’ यह सुनकर पिंटू बुरी तरह डर गया। उसने कहा, ‘हाय पिताजी! यह मैंने क्या कर डाला। मुझसे तो बहुत बड़ी गलती हो गई। कल सच में शेर मुझे मार डालेगा। मुझे बचा लीजिए पिताजी।’ उसके पिता ने कहा, ‘यह गलती तो हरगिज ना करना। अब जब चुनौती दे ही डाली है तो कल  शेर से लड़ने जाना जरूर।’ ‘लेकिन पिताजी..’

‘लेकिन-वेकिन कुछ नहीं। अगर तुमने ऐसा कुछ किया तो वह न सिर्फ हमारे पूरे परिवार को मार डालेगा, बल्कि सच में वह इस जंगल से पूरी सूअर जाति को खत्म कर देगा।’ ‘..और अगर कल मैं शेर से लड़ने गया तो वह मुझे मार डालेगा पिताजी।’ डर से पिंटू सूअर की घिग्घी बंध गई थी। वह कांप रहा था। पिता ने उसे कसकर डांटा, ‘चुप! मुझे थोड़ी देर सोचने दो।’ थोड़ी देर की चुप्पी के बाद पिता सूअर खुशी से उछल पड़े। उन्होंने कहा, ‘मिल गया शेर से बचने का उपाय।’ पिंटू सूअर ने पूछा- ‘क्या?’

‘देखो राजा शेर तुमसे नहीं, तुम्हारी गंदगी की वजह से भागा था। ऐसा करना कि कल जब तुम उससे लड़ने जाना तो अपने बदन पर ढेर सारी गंदगी मल लेना। जितना हो सके, उतनी गंदगियों से खुद को लसेढ़ लेना। बाकी मैं समझा लूंगा।’ दूसरे दिन नियत समय और जगह पर राजा शेर तथा पिंटू सूअर पहुंच गए। पिंटू पूरी तरह गंदगी से लिपटा हुआ था। गंदगी की वजह से उसके बदन से निकलने वाली बदबू पूरे वातावरण में फैल गई। पिंटू सूअर ने कहा, ‘मैं आ गया हूं। चलिए अब मल्लयुद्ध शुरू किया जाए।’

पूरे जंगल को भी इस मल्लयुद्ध की जानकारी हो चुकी थी। सारे पशु-पक्षी शेर-सूअर के बीच के इस अनोखे मल्लयुद्ध को देखने के लिए वहां पहले से ही पहुंच चुके थे। राजा शेर से वह बदबू बरदाश्त नहीं हुई। वह पिंटू सूअर से दूर भागने लगा। उसने कहा, ‘जाओ! पहले नहाकर आओ। बदन में लगी गंदगी साफ कर आओ।’ पिंटू ने कहा, ‘महाराज, पहले युद्ध, क्योंकि इसका समय नियत है और पूरा जंगल इस युद्ध को देखने के लिए पहुंचा हुआ है। उसके बाद कुछ और।’ शेर ने उसे गंदगी साफ करने के लिए बहुत कहा, लेकिन वह नहीं माना तो दरुगध बरदाश्त न होने के कारण शेर उससे दूर-दूर ही रहने लगा। इस बात से उत्साहित पिंटू सूअर खुशी में यह हुंकार भरने ही वाला था कि आज से जंगल का राजा मैं हूं कि उसका पिता बूढ़ा सूअर बोल उठा, ‘शेर महाराज, जंगल के राजा आप ही हैं और आप ही रहेंगे। मेरे बेटे को कोई राजा-वाजा नहीं बनना।’ यह कह कर वे अपने बेटे और परिवार को लेकर वापस घर लौट आए।

पिंटू ने पिता से पूछा, ‘यह क्या किया आपने पिताजी। जब जंगल पर मेरा राज होने ही वाला था, तभी आपने शेर को जंगल का राज वापस कर दिया।’ बूढ़ा सूअर बोला, ‘सच में मूर्ख है तू। आज तो गंदगी ने तेरी जान बचा ली। तेरी भलाई इसी में थी। एक बात हमेशा याद रखना, जो भी काम तू करना चाहता है पहले योग्यता हासिल करना, तब करना, नहीं तो वह सफलता क्षणिक होती है।’

शिक्षा: जो कठिन से कठिन घड़ी में भी जोश में होश नहीं खोता और अपनी क्षमता जानता है। वह मुश्किल से मुश्किल विपत्तियों का भी आसानी से सामना कर लेता है।

 
 imageloadingई-मेल Image Loadingप्रिंट  टिप्पणियॉ: (0) अ+ अ- share  स्टोरी का मूल्याकंन
 
टिप्पणियाँ
 

लाइवहिन्दुस्तान पर अन्य ख़बरें

आज का मौसम राशिफल
अपना शहर चुने  
धूपसूर्यादय
सूर्यास्त
नमी
 : 05:41 AM
 : 06:55 PM
 : 16 %
अधिकतम
तापमान
43°
.
|
न्यूनतम
तापमान
24°