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करके देखिए, फ्लू भगाने में भी कारगर है योग
कौशल कुमार, योगाचार्य First Published:12-12-2012 12:23:59 PMLast Updated:00-00-0000 12:00:00 AM
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सामान्य जुकाम जब गंभीर रूप धारण कर लेता है तो इसे फ्लू या इंफ्लूएंजा कहते हैं। यह रोग शीत ऋतु में अधिक होता है। यह छूआछूत का रोग है तथा खासकर कमजोर प्रतिरोधक क्षमता वाले लोगों को अपना निशाना बनाता है। योग में इस रोग से दूर रहने और इससे मुक्ति पाने के भी उपाय मौजूद हैं। तो क्यों न योग की ऐसी कुछ क्रियाओं को अपनाया जाए और इससे दूर रहा जाए।

इस रोग का प्रमुख कारण सर्दी की चपेट में आना, अनुपयुक्त भोजन, जठराग्नि का कमजोर हो जाना, आरामतलब जीवनशैली, व्यायाम की कमी, रक्त संचरण का धीमा होना तथा मांसपेशियों की क्रियाशीलता में कमी आना आदि है।

योग के नियमित अभ्यास, आहार-विहार एवं जीवन शैली में थोड़ा परिवर्तन कर जुकाम होने की आशंका को ही टाला जा सकता है, ताकि बात आगे न बढ़े। जिन्हें यह समस्या हो भी गयी है, उन्हें रोग की गंभीरता से बचाकर पूर्णतया स्वस्थ किया जा सकता है। इसमें योग क्रियाएं आपकी खूब सहायता करेंगी।

सूर्य नमस्कार एवं आसन
इन क्रियाओं का अभ्यास करने वाले व्यक्ति को जुकाम या फ्लू होता ही नहीं है। यदि यह हो भी गया हो और गंभीर रूप धारण कर चुका है तो रोगी को एक या दो दिन पूर्ण आराम करना चाहिए। रोगमुक्त हो जाने पर आसनों का अभ्यास प्रारम्भ कर देना चाहिए। क्षमतानुसार सूर्य नमस्कार के चक्रों का अभ्यास करना चाहिए। साथ में सुप्त वज्रासन, शशांकासन, मण्डूकआसन, सर्वागासन, त्रिकोणासन, जानु शिरासन, मयूरासन, त्रिकोणासन, वीरासन, पश्चिमोत्तानासन आदि का अभ्यास करना चाहिए।

सुप्त वज्रासन की अभ्यास विधि
घुटने के बल जमीन पर बैठ जाइए। यह वज्रासन है। वज्रासन में नितम्ब को दोनों पैर की एडियों के बीच में रखें। वज्रासन में बैठकर दोनों हाथों के सहारे धड़ को पीछे जमीन पर ले जाएं। प्रयास करें कि सिर का ऊपरी भाग जमीन पर हो, जिससे रीढ़ जमीन के ऊपर अर्धवृत्ताकार होती है। इस स्थिति में आरामदायक समय तक रुककर वापस पूर्व स्थिति में आएं।

सावधानी
घुटनों की समस्या से पीडित लोग इसका अभ्यास योग्य मार्गदर्शन में ही करें।

योग निद्रा
रोगी को दिन में दो बार योग निद्रा का अभ्यास करना चाहिए। इसके अभ्यास से रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ती है तथा शरीर एवं मन को आराम मिलता है।

अभ्यास की विधि
पीठ के बल आरामदायक स्थिति में लेट जाएं। शरीर के एक-एक अंगों क्रमश: हाथ, पैर, पीठ, पेट, सीना, गला तथा चेहरे को ढीला करें। शरीर के सभी अंगों को पूरी तरह ढीला छोड़कर अपनी श्वास-प्रश्वास पर मन को एकाग्र करें। उल्टी गिनती में जैसे 100,99, 98 होते हुए 1 तक गिनती करते हुए श्वास-प्रश्वास पर मन को एकाग्र करें। इसके पश्चात 15 से 20 गहरी श्वास-प्रश्वास लेकर वापस पूर्व स्थिति में आएं।

अन्य सुझाव
शरीर पर रोजाना सरसों के तेल की मालिश करें और इसके तेल को सूंघें
नाक के अवरोध की अवस्था में भाप लेना चाहिए तथा गर्म नमकीन जल के गरारे लेना चाहिए
फ्लू की स्थिति में धूम्रपान बहुत हानिकारक है। इसे तुरंत बन्द कर दें

तुलसी की चाय लें
ज्वर के दौरान गर्म दूध, बार्ली, मिश्री या शहद मिले गुनगुने दूध का सेवन करें। इसके अतिरिक्त, अदरक, काली मिर्च, तुलसी तथा दालचीनी की चाय पिएं
ज्वर एवं जुकाम के दौरान फलों की अधिकता वाला हल्का सुपाच्य भोजन एवं अधिक तरल आहार लेने से रोग बहुत जल्दी ठीक होता है
मौसमी सब्जियों का गरम सूप (गाजर, आलू, धनिया पत्ती) लें तथा विटामिन ए और सी युक्त आहार लेना फायदेमन्द है
पीने के लिए गर्म पानी का सेवन करें
4-5 मुनक्के दिन में 4-5 बार खायें

 
 
 
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