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वीकेंड के कुछ खास ठिकाने
पंकज घिल्डियाल First Published:07-12-2012 04:04:59 PMLast Updated:00-00-0000 12:00:00 AM
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वीकेंड पर दोस्तों या परिवार के साथ घूमने जाना किसे नहीं पसंद। लेकिन सवाल उठता है कि किस ठिकाने को मंजिल बनाया जाए। जनाब, अगर आप दिल्ली के दायरे से थोड़ा सा बाहर निकलें तो कई अच्छी जगहें आपका इंतजार कर रही हैं। जहां आप ढेर सारी मस्ती कर सकते हैं। दिल्ली के आस पास के खास ठिकानों पर पंकज घिल्डियाल की रिपोर्ट।

केवलादेव नेशनल पार्क
भरतपुर का केवलादेव नेशनल पार्क दिल्ली से 176 किलोमीटर दूर स्थित है। पक्षियों के साथ— साथ, आप यहां लोहागढ़ फोर्ट, म्यूजियम, जवाहर बुर्ज, फतेहपुर बुर्ज और खूबसूरत बाग—बगीचों से भरा डीग महल भी देख सकते हैं। यहां रहने—खाने की सुविधाएं शानदार हैं। यहां दुनिया भर की लगभग 300 प्रजातियों के एक से बढ़कर एक सुंदर पक्षी आपको देखने को मिलेंगे। यहां के खास आकर्षण होते हैं साइबेरियन पक्षी। ये पक्षी  करीब आधी दुनिया का चक्कर लगाकर सदिर्यों में यहां पहुंचते हैं। यहां ठहरने के लिए एक से बढ़कर एक होटल स्वागत के लिए तैयार रहते हैं।
दिल्ली से दूरी: 176 किमी
होटल: 750 रुपए से शुरुआत

सरिस्का
अरावली पर्वतमालाओं से घिरे इस पार्क में तरह-तरह के जानवरों और पक्षियों के संसार के साथ कई ऐतिहासिक किले और मंदिर भी हैं, जो पर्यटकों को आकर्षित करते हैं, जिसकी वजह से पर्यटक यहां साल भर आते रहते हैं। सरिस्का कभी अलवर के राजपरिवार का शिकारगाह हुआ करता था। अलवर के महाराजों ने यहां एक राजमहल भी बनवाया था जो आज एक होटल में तब्दील हो चुका है। ऐतिहासिक कनकवाड़ी किला भी यहीं मौजूद है जहां सम्राट औरंगजेब ने अपने भाई दारा शिकोह को कैद कर रखा था। इस पार्क में बहुत सारे मंदिरों के अवशेष भी हैं। दिल्ली-जयपुर मार्ग पर दिल्ली से सिर्फ 200 किमी की दूरी पर स्थित सरिस्का नेशनल पार्क राजस्थान का सबसे बड़ा अभ्यारण्य है। यह 866 वर्ग किमी में फैला है। यहां ठहरने के लिए बजट होटल से लेकर फाइव स्टार व हैरिटेज होटल तक की कोई कमी नहीं है। आप अच्छी सुविधा वाले होटल्स में ठहर सकते हैं।
दिल्ली से दूरी: 220 किमी
होटल: 2000 रुपए से शुरुआत

कुरुक्षेत्र
दिल्ली से 150 किमी की दूरी पर हरियाणा में स्थित इस शहर में रोमांच व अध्यात्म का अनुभव एक साथ होगा। यहां के प्रमुख जगहों में लक्ष्मी नारायण मंदिर, ब्रह्मा सरोवर, ज्योतिसर, स्थानेश्वर शिव मंदिर जैसे धर्म स्थल हैं। ऐतिहासिक इमारतों के शौकीनों के लिए भी यह शहर काफी आकर्षक है। ज्योतिसर में ही आपको वह रथ भी देखने को मिलेगा जिस पर श्रीकृष्ण ने अर्जुन को गीता का ज्ञान दिया था। इसके अलावा उस रणभूमि को देखा जा सकता है जहां महाभारत का युद्ध हुआ था। यहां शेख चिल्ली टॉम्ब भी है जो पर्यटकों में लोकप्रिय है। यहां ठहरने के लिए  होटल आपको मिल जाएंगे। हरियाणा टूरिज्म  के होटल में एक फैमिली रूम की ऑनलाइन बुकिंग करीब 1999 रुपए में करवाई जा सकती है।
दिल्ली से दूरी: 150 किमी
होटल: 600 रुपए से शुरुआत

ऊंचागांव किला
कल्पना कीजिए नदी किनारे गांव में एक प्राचीन किला। उस पर जब उस किले की विशेषताएं और वहां का माहौल भी आकर्षक हो तो फिर कहना ही क्या। इस किले में 18वीं सदी की वास्तुकला की खूबसूरती पर्यटकों में काफी लोकप्रिय है। गंगा किनारे मांडू घाट से सूर्योदय का दिलकश नजारा भी देखते ही बनता है। खास बात यह कि इसके लिए आपको अलग से योजना बनाने की जरूरत भी नहीं। दिल्ली-आगरा हाइवे पर दिल्ली से 110 किमी की दूरी पर स्थित इस किले को कुछ घंटों में भी देखा जा सकता है लेकिन एक रात रुककर यहां की लगभग तमाम सुविधाओं को एन्जॉय किया जा सकता है। उत्तर प्रदेश के बुलंदशहर से कुछ ही किमी की दूरी पर स्थित ऊंचागांव का नाम कभी अमरथिला था किंतु अपनी स्थिति के कारण यह ऊंचागांव कहलाने लगा। सात एकड़ क्षेत्र में फैले राजघराने के इस किले का भी मूल नाम सूर्य महल था। ऊंचागांव में स्थित होने के कारण बाद में यह ऊंचागांव किले के रूप में प्रसिद्ध हो गया।
दिल्ली से दूरी: 110 किमी
होटल: 2500 रुपए से शुरुआत

फतेहपुर सीकरी
मुगलकाल में बना प्रेम का भव्य प्रतीक ताजमहल दुनियाभर के पर्यटकों के लिए आकर्षण का केंद्र है। यहीं आगरा के करीब ऐतिहासिक इमारतों के लिए मशहूर जगह है फतेहपुर सीकरी, जिसका बुलंद दरवाजा काफी लोकप्रिय है। एशिया का सबसे ऊंचा दरवाजा होने का गौरव पाने वाला बुलंद दरवाजा फतेहपुर सीकरी की शान है। साथ ही शेख सलीम चिश्ती की दरगाह, पंचमहल आदि प्रमुख आकर्षणों में शामिल हैं। पर्यटकों के लिए बुलंद दरवाजा व शेख सलीम चिश्ती की दरगाह हमेशा आकर्षण का केंद्र बनी रहती है। यह नगरी दिल्ली से 204 किमी की दूरी पर है। वहीं आगरा से इसकी दूरी महज 37 किमी है।
दिल्ली से दूरी: 204 किमी
होटल: 450 रुपए से शुरुआत

पिंजौर
शिमला मार्ग पर स्थित पिंजौर महाभारत काल और मुगल शासकों के दौर से गुजरते हुए आज हरियाणा का प्रमुख पयर्टक स्थल है। यहां के गार्डन ही नहीं बल्कि यहां का भीमा देवी मंदिर और पिंजौर की बावडियां भी इतिहास की गवाह हैं। प्रकृति की खूबसूरती को निहारना और मुगल कालीन वस्तुओं को देखना यहां एक अद्भुत नजारा होता है। इस क्षेत्र में एक लाख वर्ष पूर्व इस्तेमाल किए गए पत्थरों के औजार भी मिले हैं, जो इस क्षेत्र की प्राचीनतम ऐतिहासिक सम्पदा और आदिकालीन मानव सभ्यता के साक्ष्य माने जाते हैं। कभी पंचपुर नाम से पहचाने जाने वाले वर्तमान पिंजौर को उत्तर भारत का वृंदावन होने का दर्जा भी प्राप्त है। यादविंद्रा गार्डन, पिंजौर का मुख्य आकर्षण है। इस गार्डन का निर्माण औरंगजेब ने करवाया था।
दिल्ली से दूरी: 204 किमी
होटल: 2 से 3 हजार

मंडावा
राजस्थान हमेशा अपनी ऐतिहासिक धरोहरों की वजह से सैलानियों को आकर्षित करता रहा है। यहां के प्रमुख आकर्षणों में प्रचीन किलों के साथ बड़ी-बड़ी हवेलियां भी शामिल हैं। यहीं एक छोटा सा गांव है मंडावा। मंडावा झूंझनू जिले में आता है। दिल्ली से बीकानेर या रेवाड़ी की ओर जाते हुए आप सिर्फ 240 किमी की दूरी पर इस गांव की जीवन शैली को इन्जॉय कर सकते हैं। इस गांव में आधा दर्जन से अधिक हवेली और किले हैं। इसमें अनेक प्रमुख होटल हैं। यहां का नजदीकी रेलवे स्टेशन सिर्फ 14 किमी की दूरी पर मुकुंदगढ़ में है। नजदीकी हवाई अड्डा जयपुर में है, जो यहां से 168 किमी की दूरी पर है। यहां स्टैंडर्ड रूम से लेकर रॉयल स्यूट्स तक बहुत से से होटल हैं।
दिल्ली से दूरी: 240 किमी
होटल: 550 रुपए से शुरुआत

केसरोली
दिल्ली से अलवर रूट पर जाने पर सिर्फ 155 किमी की दूरी पर स्थित द हिल फोर्ट किले की खासी लोकप्रियता है। अलवर से सिर्फ 15 किमी की दूरी पर स्थित यह है यह किला। 14वीं शताब्दी की भारतीय विरासतों में से
एक यह किला अनेक ऐतिहासिक स्मृतियों को अपने अंदर समेटे हुए है। इस किले में ठहरकर आप उस समय के अहसासों को महसूस करेंगे। यदुवंशी राजपूत द्वारा 14वीं शताब्दी में इसे तैयार किया गया था। आज इस किले का एक बडम हिस्सा नीमराना होटल्स के होटलों में शामिल है। अगर आप बोटिंग का शौक रखते हों तो 25 किमी की दूरी पर सिलीसेढ़ लेक भी जा सकते हैं जो बोटिंग का उत्तम ठिकाना है।
दिल्ली से दूरी: 155 किमी
होटल: 2 हजार से शुरुआत

 
 
 
 
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