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टाइम मैनेजमेंट: समय सधेगा तो सध जाएगी परीक्षा
हिन्दुस्तान नई दिशाएं
First Published:08-01-13 12:34 PM
परीक्षा नजदीक है और हड़बड़ाहट बढ़ रही है। कहीं सिलेबस छूटने का भय तो नहीं सता रहा? बेहतर होगा कि आप अपना टाइम मैनेज करें और एक टाइम टेबल बना कर तैयारी करें। सब कुछ आसान होता लगने लगेगा।
किसी भी चीज की तैयारी टाइम मैनेजमेंट मांगती है, क्योंकि वक्त बहुत कीमती होता है और वह कभी लौट कर नहीं आता। वक्त पर की गई चीजें हमेशा बेवक्त की गई चीजों से ज्यादा फायदा देती हैं। अब यही बात पढ़ाई पर भी लागू होती है। पढ़ाई वक्त मांगती है। जाहिर तौर पर परीक्षा की तैयारी के लिए आपको अपनी दिनचर्या में थोड़ा तो बदलाव लाना होगा, पर टाइम मैनेजमेंट के जरिए आप उस बदलाव को भी काफी सामान्य बना पाएंगे। परीक्षा की तैयारी को सही समय व सही अनुपात में वक्त देंगे तो यकीनन सफलता आपके कदम चूमेगी।
क्या है मतलब
टाइम मैनेजमेंट का मतलब होता है आपको ओवर डू न करना पड़े। दिन में जो चौबीस घंटे आपके पास हैं, उनमें आपकी तैयारी भी हो जाए और रिलेक्स भी रहें। यकीन मानिए, एक दिन और रात को मिला कर होने वाले चौबीस घंटे किसी भी बड़ी से बड़ी परीक्षा की तैयारी करने के लिए पर्याप्त से कहीं ज्यादा हैं। टाइम स्लॉट बांटें
‘एक बार बैठ कर इस पूरी किताब को निपटा देना है, चाहे कितना भी वक्त लगे’ ऐसी सोच नुकसानदायक ही होती है। जिद करना ठीक है, पर यह तैयारी का सही तरीका नहीं है। वक्त को टुकड़े में बांटें- सुबह दो घंटे की पढ़ाई करनी है, दोपहर में दो घंटे पढ़ना है, शाम को इतने वक्त पढ़ाई करनी है। इस हिसाब से पढ़ाई करेंगे तो किताबें आप पर हावी नहीं होंगी। सामान्य दिनचर्या अपनाएं
परीक्षा की तैयारी के दौरान सामान्य दिनचर्या बनाए रखें। पढ़ाई के लिए जो टाइम स्लॉट बनाए हैं, उनके अलावा जो भी वक्त आपको मिलता है, उसमें मनोरंजन करें या जो ठीक लगता हो, वो कर सकते हैं। ब्रेक लेते रहें
पढ़ाई के दौरान ब्रेक लेते रहें। यह कतई जरूरी नहीं कि एक बार किताब में सिर गड़ा लिया तो अब उसे निपटा कर ही बाहर निकलेंगे। बीच-बीच में ब्रेक लेते रहें। इससे आप रिलेक्स रहेंगे। अटक गए तो पूछ लें
अगर किसी समस्या को लेकर अटक गए हैं तो उस पर जूझने की बजाए अध्यापक की हेल्प लें, क्योंकि खुद से हल करने की जिद में आप अपना कीमती वक्त और ऊर्जा, दोनों खर्च करेंगे। बेहतर है किसी से पूछ लें। मजबूत पार्ट को भी टाइम दें
आपके पास सीमित समय है। आपको यह पता है कि कौन से विषय के कौन से पार्ट में आप कमजोर हैं। ऐसे में सारा वक्त कमजोर पार्ट्स को मजबूत बनाने में ही न निकाल दें। जो पार्ट मजबूत है, उसके अभ्यास के लिए भी समय निकालें, क्योंकि वह तो आपकी स्ट्रेंथ है, उसे खोना ठीक नहीं। सही तकनीक का इस्तेमाल
कई बार छात्र एक लंबा-सा टाइम टेबल बना लेते हैं और उस पर अमल करने की मानो कसम-सी खा लेते हैं। अब अगर कोई चीज टाइम टेबल के हिसाब से नहीं हो पाई तो परेशान हो जाते हैं। तो ऐसे में परेशान बिल्कुल न हों। कुछ चीजों में उम्मीद से ज्यादा वक्त लग जाता है। ऐसे में अपने टाइम को कम-ज्यादा करने का लचीलापन अवश्य रखें। ट्रैवलिंग जरा कम कर दें
परीक्षा की तैयारियों के दौरान ट्रैवलिंग से थोड़ा परहेज कर सकते हैं। अगर प्लेग्राउंड दूर है तो जरूरी नहीं कि आप उसी में अपना समय बिताएं। नजदीक भी कोई ठिकाना ढूंढ़ सकते हैं। बात यह नहीं है कि आप मनोरंजन न करें, पर आने-जाने में लगने वाले वक्त को बचा लेंगे तो वह आपके काम ही आएगा।
टाइम मैनेजमेंट का मतलब होता है आपको ओवर डू न करना पड़े। दिन में जो चौबीस घंटे आपके पास हैं, उनमें आपकी तैयारी भी हो जाए और रिलेक्स भी रहें। यकीन मानिए, एक दिन और रात को मिला कर होने वाले चौबीस घंटे किसी भी बड़ी से बड़ी परीक्षा की तैयारी करने के लिए पर्याप्त से कहीं ज्यादा हैं। टाइम स्लॉट बांटें
‘एक बार बैठ कर इस पूरी किताब को निपटा देना है, चाहे कितना भी वक्त लगे’ ऐसी सोच नुकसानदायक ही होती है। जिद करना ठीक है, पर यह तैयारी का सही तरीका नहीं है। वक्त को टुकड़े में बांटें- सुबह दो घंटे की पढ़ाई करनी है, दोपहर में दो घंटे पढ़ना है, शाम को इतने वक्त पढ़ाई करनी है। इस हिसाब से पढ़ाई करेंगे तो किताबें आप पर हावी नहीं होंगी। सामान्य दिनचर्या अपनाएं
परीक्षा की तैयारी के दौरान सामान्य दिनचर्या बनाए रखें। पढ़ाई के लिए जो टाइम स्लॉट बनाए हैं, उनके अलावा जो भी वक्त आपको मिलता है, उसमें मनोरंजन करें या जो ठीक लगता हो, वो कर सकते हैं। ब्रेक लेते रहें
पढ़ाई के दौरान ब्रेक लेते रहें। यह कतई जरूरी नहीं कि एक बार किताब में सिर गड़ा लिया तो अब उसे निपटा कर ही बाहर निकलेंगे। बीच-बीच में ब्रेक लेते रहें। इससे आप रिलेक्स रहेंगे। अटक गए तो पूछ लें
अगर किसी समस्या को लेकर अटक गए हैं तो उस पर जूझने की बजाए अध्यापक की हेल्प लें, क्योंकि खुद से हल करने की जिद में आप अपना कीमती वक्त और ऊर्जा, दोनों खर्च करेंगे। बेहतर है किसी से पूछ लें। मजबूत पार्ट को भी टाइम दें
आपके पास सीमित समय है। आपको यह पता है कि कौन से विषय के कौन से पार्ट में आप कमजोर हैं। ऐसे में सारा वक्त कमजोर पार्ट्स को मजबूत बनाने में ही न निकाल दें। जो पार्ट मजबूत है, उसके अभ्यास के लिए भी समय निकालें, क्योंकि वह तो आपकी स्ट्रेंथ है, उसे खोना ठीक नहीं। सही तकनीक का इस्तेमाल
कई बार छात्र एक लंबा-सा टाइम टेबल बना लेते हैं और उस पर अमल करने की मानो कसम-सी खा लेते हैं। अब अगर कोई चीज टाइम टेबल के हिसाब से नहीं हो पाई तो परेशान हो जाते हैं। तो ऐसे में परेशान बिल्कुल न हों। कुछ चीजों में उम्मीद से ज्यादा वक्त लग जाता है। ऐसे में अपने टाइम को कम-ज्यादा करने का लचीलापन अवश्य रखें। ट्रैवलिंग जरा कम कर दें
परीक्षा की तैयारियों के दौरान ट्रैवलिंग से थोड़ा परहेज कर सकते हैं। अगर प्लेग्राउंड दूर है तो जरूरी नहीं कि आप उसी में अपना समय बिताएं। नजदीक भी कोई ठिकाना ढूंढ़ सकते हैं। बात यह नहीं है कि आप मनोरंजन न करें, पर आने-जाने में लगने वाले वक्त को बचा लेंगे तो वह आपके काम ही आएगा।
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