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कैसा हो आपका साबुन
अमित द्विवेदी First Published:29-05-13 12:08 PM
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तरोताजा रहने के लिए हम रोजाना स्नान करते हैं। वह स्नान जब साबुन से हो जाए तो और ताजगी महसूस करते हैं। लेकिन अगर साबुन का चयन गलत हो जाए तो कई बार हमारी त्वचा को तकलीफ भी होने लगती है। अपने साबुन का चयन कैसे करें, बता रहे हैं अमित द्विवेदी

हम में से ज्यादातर लोग नहाने का साबुन चुनते वक्त और इसके इस्तेमाल के वक्त इस बात पर ध्यान नहीं देते कि उसका हमारी त्वचा पर क्या प्रभाव पड़ सकता है। विशेषकर गर्मियों में बाहर से आने पर साबुन लगाकर स्नान करके ही हम खुद को तरोताजा महसूस करते हैं। यानी साबुन हमारी दिनचर्या का एक हिस्सा बन चुका है। लाजिमी है कि इतनी जरूरी चीज का चुनाव करते समय हमें इसके बारे में सही जानकारी होनी चाहिए। इसलिए यह जान लेना बेहद जरूरी है कि हमारा साबुन कैसा होना चाहिए। सामान्य तौर पर साबुन लवणीय  होता है, जो कि वेजिटेबल ऑयल के साथ-साथ सोडियम हाइड्रोक्साइड या पोटेशियम हाइड्रोक्साइड से मिलकर बना होता है। ये लवणीय या क्षारीय होते हैं, जिनमें पी. एच. वैल्यू (हमारे शरीर में उपस्थित लवण एवं क्षार की मात्रा को बताने का एक पैमाना है) की मात्रा लगभग 9-10 के आसपास होती है। वहीं हमारी त्वचा की पी. एच. वैल्यू की मात्रा 5.6 से 5.8 के आसपास होती है। साबुन का लगातार इस्तेमाल करने से हमारी त्वचा की पी.एच. वैल्यू की मात्रा बढ़ जाती है, जो त्वचा के लिए खतरनाक हो सकता है। फोर्टिस हॉस्पिटल (वसंत कुंज) की त्वचा विशेषज्ञ डॉं निधि रोहतगी का कहना है कि त्वचा में उपस्थित पी़एच़ वैल्यू की मात्रा और हमारे नहाने के साबुन में उपस्थित पी. एच. वैल्यू की मात्रा में समानता होनी चाहिए। आम तौर पर औषधीय रूप में प्रयोग किये जाने वाले साबुन से हमारी त्वचा की पी.एच. वैल्यू बदल जाती है या फिर यह क्षारीय हो जाती है, जो कि त्वचा के लिए ठीक नहीं है। यही वजह है कि डॉक्टर ज्यादातर ‘साबुन फ्री क्लिंजर’ की सिफारिश करते हैं। यह त्वचा को बगैर नुकसान पहुंचाए उसकी सफाई करता है।

जिनकी त्वचा रूखी-सूखी है, उन्हें साबुन फ्री क्लिंजर इस्तेमाल करना चाहिए। जिनकी त्वचा तैलीय है, उन्हें औषधीय रूप में प्रयोग किए जाने वाले साबुन का इस्तेमाल करना चाहिए, जिसमें सेलि-साइटिक एसिड हो। जिनकी त्वचा सामान्य होती है, वे कोई भी साबुन इस्तेमाल कर सकते हैं, लेकिन 40 साल की उम्र के बाद उन्हें इसका इस्तेमाल बंद कर देना चाहिए, क्योंकि त्वचा पर उम्र का असर दिखने लगता है। 

रूखी त्वचा की समस्या
सबसे आम समस्या होती है ऑयली और ड्राई त्वचा वालो में। रूखी-सूखी त्वचा के लिए ज्यादातर साबुन जिम्मेदार होते हैं, इसलिए ये त्वचा के लिए ठीक नहीं होते। जिनकी त्वचा तैलीय होती है, वे अपना चेहरा दिनभर में कई बार धोते हैं, जिससे उनकी त्वचा और भी तैलीय हो जाती है। साबुन त्वचा की नमी और तेल का संतुलन बदल सकते हैं, इसलिए ये आपकी त्वचा को नुकसान पहुंचा सकते हैं।

साबुन में मौजूद नुकसानदेह रसायन
सरफेक्टेन्ट:
सरफेक्टेन्ट एक प्रकार का केमिकल होता है, जो पानी और साबुन का मिश्रण होता है। यह गंदगी दूर करने का काम करता है। इससे त्वचा पर नकारात्मक प्रभाव भी पड़ सकता है।

डिटर्जेट: डिटर्जेट सिंथेटिक मेटेरियल्स के बने होते हैं और त्वचा की नमी को चुरा लेते हैं।
खुशबू: चंदन, गुलाब, स्ट्रॉबरी, एलोवेरा जैसी खुशबू त्वचा को नुकसान पहुंचा सकती हैं। इस प्रकार के साबुन नुकसान ज्यादा पहुंचा सकते हैं।

कैसे-कैसे साबुन
रोजमर्रा प्रयोग में लाये जाने वाले साबुन: जिनकी त्वचा सामान्य होती है, वे रोज प्रयोग में लाये जाने वाले साबुनों को खरीदते वक्त सोचते नहीं हैं। इस प्रकार के ज्यादातर साबुनों में खुशबू, डिटर्जेट और कुछ अन्य प्रकार के रसायन मिले होते हैं, जो हमारी त्वचा को तो साफ कर देते हैं, किन्तु ये नमी को भी कम कर देते हैं।

ग्लिसरीन: ग्लिसरीन का इस्तेमाल साबुन बनाने तथा अन्य प्रकार के लोशनों में भी किया जाता है। यह साबुन खासकर रूखे मौसम के लिए अच्छा होता है। यह आपकी त्वचा की नमी को बरकरार रखने के साथ-साथ उसे मुलायम बनाने का काम भी करता है। यह उन लोगों के लिए काफी फायदेमंद है, जिनकी त्वचा बेहद रूखी होती है।

हल्के साबुन: ऐसे साबुन काफी महंगे होते हैं, क्योंकि इनमें मिश्रित मिल्क, क्रीम, ग्लिसरीन आदि तत्व होते हैं। इस प्रकार का साबुन प्रयोग करने से त्वचा की नमी पर भी कोई असर नहीं पडम्ता है।  

कीटाणुनाशक: ऐसे साबुन में ट्रिक्लोशन (फिनायल के रूप में प्रयोग किया जाने वाला एक प्रकार का केमिकल) का ज्यादा मात्रा में प्रयोग किया जाता है, जो आपकी त्वचा के लिए बेहद हानिकारक है। इस प्रकार के साबुन रोज प्रयोग में लाने के लिए बिल्कुल भी सही नहीं होते हैं, क्योंकि ये आपकी त्वचा को काफी रूखा कर देते हैं। ऐसे साबुनों का प्रयोग डॉक्टर की सलाह पर ही करना चाहिए, वह भी उन स्थितियों में जब आपकी त्वचा में किसी प्रकार की एलर्जी या कोई संक्रमण हो गया हो। 

ऑर्गेनिक साबुन: इस प्रकार के साबुन काफी महंगे होते हैं। किसी भी ऑर्गेनिक साबुन को खरीदने से पहले हमें उनमें प्रयोग किये गये प्राकृतिक तत्वों को विस्तारपूर्वक पढ़ लेना चाहिए। इनका अधिक प्रयोग भी आपके लिए नुकसानदेह हो सकता है।

इन बातों पर भी ध्यान दें
आप उसी साबुन का प्रयोग करें, जो आपकी त्वचा के लिए उपयुक्त हो।
बालों में शैम्पू का प्रयोग करना चाहिए, क्योंकि इसमें कंडीशनर होता है।
चेहरे पर फेश वॉश का प्रयोग करना चाहिए, क्योंकि यह चेहरे पर निकले हुए दानों को रोकने में सहायता करता है तथा रोम छिद्रों को भी पूरी तरह से खोलता है
बार-बार साबुन लगाने या फिर दूसरे का साबुन इस्तेमाल करने से बचना चाहिए।
ग्लिसरीन और मिल्क युक्त साबुन का इस्तेमाल करना चाहिए।
साबुन का प्रयोग करने के बाद उसे धोकर रखना चाहिए, जिससे कि आप जब उसका इस्तेमाल दोबारा करें तो उसमें किसी प्रकार की गंदगी न जमी हो।
नहाने वाले साबुन को कपड़ा धोने वाले साबुन के साथ मिक्स नहीं करना चाहिए। अक्सर हम घरों में देखते हैं कि लोग इन दोनों साबुनों को एक साथ ऊपर-नीचे रख देते हैं।

 
 
 
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