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ज्यादा मीठा खाने से बचना जरा

ज्यादा मीठा खाने से बचना जरा

अगर आप भी ‘ज्यादा मीठा’ के शौकीनों में हैं, तो कृपया अब सावधान हो जाएं। विशेषज्ञ कहते हैं कि मीठे व्यंजन के ज्यादा सेवन से आप शुगर मेटाबॉलिज्म के शिकार हो सकते हैं। बता रही हैं पूनम

हम भारतीय मीठा खाने के शौकीन हैं। पर्व-त्योहार हो या फिर शादी-ब्याह मिठाई या मीठा व्यंजन हमारे खान-पान का हिस्सा जरूर होता है। लेकिन हममें से ज्यादातर लोग मिठाई खाते वक्त इसके खतरों के बारे में नहीं सोचते। हाल के दिनों में यह साफ तौर पर प्रमाणित हो गया है कि लगातार आवश्यकता से ज्यादा चीनी युक्त खाद्य पदार्थ के इस्तेमाल से मोटापा, डायबिटीज, हृदय रोग एवं दांतों के क्षय का सामना करना पड़ सकता है। नेशनल डायबिटीज, ओबेसिटी एंड कोलेस्ट्रॉल फाउंडेशन (एन-डोक) द्वारा हाल ही में दिल्ली में किए गए एक अध्ययन के मुताबिक, राजधानी दिल्ली में बच्चों व बड़े में वर्ष 2002 में जहां मोटापे में 16 प्रतिशत की वृद्धि देखी गई, वहीं वर्ष 2006-07 में यह आंकड़ा 24 प्रतिशत तक पहुंच गया। एन-डोक के न्यूट्रिशन एंड फैटी एसिड रिसर्च की हेड स्वाति भारद्वाज का कहना है कि ज्यादा मीठे खाद्य पदार्थों (जैसे, कोल्ड ड्रिंक, रेडिमेड जूस, चॉकलेट, कैंडी, मिठाई, डेजर्ट आदि) के सेवन और साथ ही कम शारीरिक श्रम से मोटापा हो सकता है, जिससे आगे चलकर इंसुलिन प्रतिरोध, मेटाबॉलिक सिंड्रोम, डायबिटीज, हृदयरोग आदि की आशंका बढ़ जाती है। शुगर हमारे शरीर में किस तरह से काम करती है, इसे समझना जरूरी है। हमारा शरीर कार्बोहाइड्रेट को अवशोषित करने से पहले इसे साधारण शुगर में तब्दील करता है। वैसे शुगर कार्बोहाइड्रेट होता है, जो कार्बन, हाइड्रोजन और ऑक्सीजन का मिश्रण है। शुगर कई प्रकार के होते हैं जैसे सिंपल शुगर, स्टार्च, डायट्री फाइबर। शुगर और स्टार्च में कैलोरी की मात्रा समान होती है जो चार कैलोरी प्रति ग्राम होती है।

सिंगल शुगर या मोनोसेकराइड्स
ये कार्बोहाइड्रेट के सबसे सरल प्रकार हैं। जैसे- ग्लुकोज, फ्रुक्टोज, गैलेक्टोज। ग्लुकोज हमारे रक्त व शरीर के द्रवों में पाया जाता है, जो हमें शक्ति प्रदान करता है। फ्रुक्टोज फलों व सब्जियों में पाया जाता है और गैलेक्टोज दूध में पाया जाने वाला मीठापन है।

डबल शुगर या डाइसेकराइड्स
ये मोनोसेकराइड्स के दो समान या भिन्न प्रकार के अणुओं को मिलाने से बनते हैं। जैसे, सुक्रोज (गन्ना व चीनी में), लैक्टोज (दूध व दुग्ध उत्पाद में) और माल्टोज (अनाज में)। सामान्य तौर पर प्राकृतिक रूप से फलों, सब्जियों और डेयरी उत्पादों में मीठापन पाया जाता है। चूंकि इन सबमें बिल्कुल साधारण मात्रा में मीठा होता है और काफी मात्रा में जरूरी पोषक तत्व होते हैं, इसलिए ऐसे शुगर सेहत के लिए लाभकारी होते हैं। समस्या तब आती है जब खाद्य पदार्थों को मीठा करने के लिए, फूड प्रोसेसिंग के दौरान और मीठे व्यंजनों के रूप में हम अतिरिक्त चीनी की मात्रा लेते हैं। इन दिनों कॉर्न सिरप के रूप में हाई फ्रुक्टोज की उच्च मात्रा वाली अतिरिक्त शुगर का चलन बढ़ा है, जो विशुद्ध ग्लुकोज से उत्पन्न होती है। यह एन्जाइम के साथ प्रतिक्रिया कर ग्लुकोज को फ्रुक्टोज में तब्दील करती है। इससे खाने में ग्लुकोज और फ्रुक्टोज के मिश्रण के रूप में अतिरिक्त शुगर पहुंचती है। दूध, दही एवं डेयरी उत्पाद के रूप में मीठा हमारे लिए अच्छा होता है।

शुगर और उससे जुड़ी बीमारियां
हाल ही में प्रकाशित विश्व स्वास्थ्य संगठन की रिपोर्ट से यह पता चला है कि ज्यादा मीठा खाने से कई तरह की बीमारियां होने का खतरा रहता है जिनमें मोटापा से लेकर डायबिटीज तक की समस्या शामिल हैं।

मोटापा
मोटापा अपने आप में कई रोगों का जनक है। इससे कई बीमारियां आपको अपने चंगुल में लेने के लिए आपके आसपास मंडराने लगती हैं जिनमें हृदय रोग, हाइपरटेंशन, ऑर्थराइटिस, प्रोस्टेट कैंसर आदि प्रमुख हैं। मोटापा यानी ओबेसिटी एक जटिल समस्या है, जो दिन-प्रतिदिन बढम्ती जा रही है। कई अध्ययनों में पाया गया है कि शहरी युवा इसकी चपेट में ज्यादा आ रहे हैं। इस वजह हैं जंक फूड, कोल्ड ड्रिंक, केक, पेस्ट्री आदि खाद्य पदार्थो का ज्यादा सेवन, अनियमित दिनचर्या, शारीरिक श्रम का अभाव आदि।

मधुमेह या डायबिटीज
अग्नाशय में आने वाली किसी खराबी के कारण इन्सुलिन का श्रावण सही मात्रा में नहीं हो पाता है, जिससे रक्त में ग्लुकोज का स्तर बढ़ जाता है। इसे हम मधुमेह या डायबिटीज कहते हैं। डायबिटीज दो प्रकार की होती है, टाइप-1 (आनुवांशिक) और टाइप-2 (जीवनचर्या की वजह से 40 वर्ष या उसके बाद होने वाला डायबिटीज)। टाइप-2 डायबिटीज के मामले मोटापे के साथ-साथ बढ़े हैं। 18 वर्ष से अधिक उम्र की लगभग 1,60,000 महिलाओं पर किए गए तीन बड़े अध्ययनों के नतीजे साफ तौर पर दर्शाते हैं कि वैसे लोग जो एक महीने में एक या इससे कम मीठा व्यंजन खाते हैं, उनमें टाइप-2 डायबिटीज का खतरा वैसे लोगों की तुलना में 24 प्रतिशत से 83 प्रतिशत तक कम होता है जो एक दिन में एक से तीन मीठे व्यंजन खाते हैं। यानी इसे बढमने में मीठे व्यंजनों की महत्वपूर्ण भूमिका रही है। आजकल मधुमेह की समस्या शहरों में ही नहीं, बल्कि गांवों में भी आम होती जा रही है।

कोलेस्ट्रॉल
मोटापा और डायबिटीज की तरह ही कोलेस्ट्रॉल का बढ़ता स्तर भी हृदय रोग को बुलावा देता है। इस बात के कई प्रमाण हैं कि चीनी की बहुत ज्यादा मात्रा बुरे कॉलेस्ट्रॉल को बढ़ावा देती है।

रक्तचाप या ब्लड प्रेशर
आम तौर पर भोजन से संबंधित दुष्प्रभावों में सोडियम या नमक की ज्यादा मात्रा को हाइपरटेंशन के लिए जिम्मेदार माना जाता है। वर्ष 2011 के एक अध्ययन में यह सामने आया है कि जो लोग अपने भोजन में चीनी की मात्रा कम करके केवल एक मीठा पेय तक सीमित कर पाए, उनमें रक्तचाप का खतरा अपेक्षाकृत कम पाया गया।

मेटाबॉलिक सिंड्रोम
हृदय रोग से संबंधित केवल एक कारक ही अपने आप में खतरे की घंटी है, लेकिन अगर यह कई सारे कारकों का मिश्रण साबित हो, तब तो स्थिति और भी खतरनाक हो सकती है और हृदयाघात होने की आशंका भी बढ़ जाती है। 40 वर्ष से अधिक उम्र के पुरुष व महिलाओं पर किए गए अध्ययन में यह सामने आया है कि उन लोगों में मेटाबॉलिक सिंड्रोम का खतरा 44 प्रतिशत अधिक रहता है, जो एक दिन में एक से ज्यादा सॉफ्ट ड्रिंक लेते हैं। वहीं, अपने आप को एक सॉफ्ट ड्रिंक से कम तक ही सीमित रखने वालों में यह खतरा कम पाया जाता है।

हृदयाघात या हार्ट अटैक
यह साफ तौर पर प्रमाणित हो चुका है कि चीनी की आवश्यकता से बहुत ज्यादा मात्रा का सेवन हृदय रोग को बुलावा देती है। हृदय रोग विशेषज्ञों का मानना है कि एक व्यक्ति जो 2,200 कैलोरी एक दिन में लेता है, उसे एक दिन में 36 ग्राम (लगभग 9 टी स्पून) से ज्यादा अतिरिक्त चीनी का इस्तेमाल अपने भोजन में नहीं करना चाहिए। यानी हमारे कुल कैलोरी की मात्रा में अतिरिक्त चीनी की मात्रा केवल 7 प्रतिशत तक ही होनी चाहिए। ऐसे में अपनी सेहत के लिए आपको मीठे से बचना होगा, अन्यथा आप कई बीमारियों की चपेट में आ सकते हैं।

अतिरिक्त चीनी के खतरों से ऐसे बचें
चीनी मिले कोल्ड ड्रिंक, शर्बत, जूस आदि के बजाय फलों के प्राकृतिक जूस, केवल पानी व नारियल पानी से अपनी प्यास बुझाएं।
शुद्घ पानी हर लिहाज से हमारी सेहत के लिए फायदेमंद है। इसलिए खूब पानी पिएं।

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