रविवार, 24 मई, 2015 | 08:37 | IST
 |  Site Image Loading Image Loading
Image Loading    व्हाट्सएप और चिट्ठी लिख मोदी को मारने की धमकी, पुलिस की नींद उड़ी दिल्ली: आप और एलजी की जंग तेज, केजरीवाल ने विधानसभा का आपात सत्र बुलाया मुद्रास्फीति पर जेटली कर रहे हैं बड़बोलापन: कांग्रेस  लू ने ली तेलंगाना और आंध्रप्रदेश में 153 लोगों की जान  यौन उत्पीड़न मामले में पचौरी को टेरी ने माना दोषी अगले एक साल में पाकिस्तान से परमाणु हथियार खरीद सकता है ISIS रामपुर में लेखपाल हड़ताल पर इस कंपनी ने चार कर्मचारियों को तोहफे में दी कार जयललिता फिर मुख्यमंत्री बनी, पन्नीरसेल्वम फिर नंबर 2 तो इस वजह से आडवाणी को बीजेपी नेताओं ने नहीं बुलाया
6 साल में बना था बिरला मंदिर
सत्य सिंधु First Published:17-12-12 11:59 AMLast Updated:17-12-12 12:05 PM
Image Loading

क्या तुम दिल्ली वाले बिरला मंदिर में गए हो? अगर हां, तो तुम्हें यह मंदिर पसंद आया ही होगा! अगर अब तक नहीं गए हो तो एक बार जरूर जाना। तुम यहां एक-दो घंटे नहीं, बल्कि कई घंटे रह सकते हो, क्योंकि यह मंदिर तो खूबसूरत है ही, यहां देखने के लिए गार्डन, पहाड़, फाउंटेन भी हैं। चलो आज इसके बारे में और जानते हैं सत्य सिंधु से

नई दिल्ली के मंदिर मार्ग पर स्थित बिरला मंदिर में जितनी बार जाओगे, उतने ही उसके करीब होते जाओगे। भगवान विष्णु और देवी लक्ष्मी के इस मंदिर में खासकर छुट्टियों के दिन श्रद्धालुओं की भीड़ लगी रहती है। तुम्हें यहां पूजा नहीं भी करनी हो तो जानकारी बढ़ने के लिए भी यहां पहुंच सकते हैं। अगर अब तक नहीं गए तो एक बार मम्मी-पापा के साथ जरूर जाना। इस मंदिर को श्री लक्ष्मीनारायण मंदिर के नाम से भी जाना जाता है। शायद तुम्हें यह भी नहीं मालूम होगा कि अब तक जितने भी बिरला मंदिर हैं, उनमें यह पहला है। तालकटोरा स्टेडियम से रामकृष्ण आश्रम मार्ग मेट्रो स्टेशन की ओर जाने वाली सड़क को मंदिर मार्ग कहते हैं। इस मार्ग पर बिरला मंदिर तो है ही, कई और भी मंदिर हैं। तालकटोरा स्टेडियम की ओर से सबसे पहले काली बाड़ी मिलेगा, जिसमें काली मंदिर है। थोड़ा और आगे बढ़ेंगे तो तुम्हें बिरला मंदिर मिलेगा, जहां काफी विदेशी पर्यटक आते हैं। इस मंदिर का निर्माण 6 वर्षों में हो पाया था।

उद्योगपति बी.डी. बिरला ने 1933 में इसका निर्माण कार्य प्रारम्भ करवाया। उडियन शैली के इस मंदिर का निर्माण सफेद संगमरमर और लाल बलुआ पत्थर से हुआ। राष्ट्रपिता महात्मा गांधी ने 1939 में इस मंदिर का उद्घाटन किया था। मंदिर का उद्घाटन करते समय गांधीजी ने एक शर्त भी रखी थी कि किसी भी जाति के व्यक्ति को इस मंदिर में प्रवेश करने से नहीं रोका जाएगा। इस कारण हर जाति के श्रद्धालु यहां आते हैं। यह मंदिर तो लगभग आधा एकड़ में ही बना है, लेकिन इसका कैंपस 7 एकड़ में है। मंदिर का शिखर 165 फीट ऊंचा है। कुछ सीढियां चढ़ने के बाद तुम मंदिर में पहुंच सकते हो। वहां मुख्य रूप से भगवान विष्णु और लक्ष्मी की प्रतिमा है, भगवान शिव, गणेश, हनुमान, बुद्ध और देवी दुर्गा की भी प्रतिमाएं हैं। इसी मंजिल पर मंदिर के बाहर काफी खुली जगह है, जहां तुम काफी देर तक रहना पसंद करोगे। मंदिर के बिल्कुल बगल में एक धर्मशाला है, जहां पर्यटक विश्राम कर सकते हैं।

मंदिर के पीछे बहुत बड़ा बगीचा है, जिसमें तरह-तरह के फूल खिलते हैं। सर्दियों में तो इस बगीचे का नजारा और भी खूबसूरत हो जाता है। यहां मौजूद फाउंटेन और फव्वारा इस बगीचे और परिसर को और खूबसूरत बना देते हैं। तुम्हारे खेलने-कूदने के लिए बगीचे के पास ही पहाड़ी और तरह-तरह के रोमांचक खेलों की सुविधा है। पास ही खाने-पीने की दुकानें हैं, जहां तरह-तरह के व्यंजनों और चाय, कोल्ड ड्रिंक, लस्सी आदि का आनन्द उठा सकते हो।

 
 
 
 
जरूर पढ़ें
क्रिकेट स्कोरबोर्ड
Image Loadingआईपीएल 8: ‘महामुकाबले’ के लिये तैयार धोनी और रोहित
खेल, रोमांच, मनोरंजन और मालामाल करने वाले दुनिया के सबसे लोकप्रिय दनादन क्रिकेट टूर्नामेंट इंडियन प्रीमियर लीग में छठी बार फाइनल में पहुंची चेन्नई सुपरकिंग्स और पूर्व चैंपियन मुंबई इंडियन्स रविवार को ऐतिहासिक ईडन गार्डन मैदान पर पूरे दमखम के साथ आठवें संस्करण का खिताब पाने के लिये उतरेंगे।