रविवार, 31 अगस्त, 2014 | 15:44 | IST
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अपने दिल का भी रखें ध्यान
चयनिका निगम
First Published:13-12-12 11:15 AM
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आपके दिल की धड़कनें पूरे परिवार की लाइफलाइन होती हैं। विशेषज्ञ मानते हैं कि पहले के मुकाबले अब महिलाओं में दिल की बीमारी के मामले बढ़े हैं। कम उम्र महिलाएं भी इसकी चपेट में आ रही हैं। जरूरी है पूरे परिवार के साथ-साथ आप अपने दिल का भी ख्याल रखें। उसे मजबूत बनाएं। चयनिका निगम का आलेख

औरतों में दिल की बीमारी अब उम्र की मोहताज नहीं रही। मीनोपॉज से इसको जोड़ा जाना भी कई बार गलत साबित हो रहा है। ऐसा मानते हैं अपोलो हॉस्पिटल के डॉं एस.के. गुप्ता। वह कहते हैं, ‘पहले माना जाता था कि पुरुषों को 50 साल व महिलाओं को दिल की बीमारी 60 साल से पहले नहीं हो सकती। इसको मीनोपॉज से भी जोड़ा जाता था। जबकि अब युवा महिलाएं भी इसकी चपेट में हैं। इसलिए जरूरी है कि महिलाएं पूरे परिवार के साथ अपने दिल का भी ध्यान रखें।

पांच गुना हो गए मरीज
पिछले एक दशक में महिलाओं में दिल की बीमारियों के मामले पांच गुना तक बढ़े हैं। गणेश शंकर विद्यार्थी मेमोरियल मेडिकल कॉलेज, कानपुर की हृदय रोग विशेषज्ञ डॉ. आरती लालचंदानी बताती हैं- महिलाओं की जिंदगी पहले से ही काफी व्यस्त थी। अब उसमें भागदौड़, नौकरी, फास्टफूड आदि ने मिलकर व्यस्तता को तनाव में तब्दील किया है। ऐसे में यदि महिलाएं नियमित व्यायाम नहीं कर रही हैं तो कम उम्र में ही बीमारियां दस्तक देना शुरू कर देती हैं।

शुरुआती लक्षण होते हैं सामान्य
नींद न आना, थकान, सीने का दर्द हाथ की ओर जाना, पैरों में दर्द व सीने में जलन। ये कुछ ऐसे लक्षण हैं जिन्हें आमतौर पर आप बड़ी बात नहीं समझती हैं। डॉ. लालचंदानी मानती हैं कि महिलाओं में दिल की बीमारी के शुरुआती लक्षण यही होते हैं। इनके दिखते ही डॉक्टरी सलाह जरूर लें।

गैरजिम्मेदारी है ज्यादा मृत्यु दर की वजह
अपनी सेहत को लेकर गैर जिम्मेदारी और घर के पुरुष व बच्चों की बीमारी को लेकर अलर्ट रहना, यही है हम महिलाओं की मानसिकता। डॉ. गुप्ता कहते हैं, अचानक सीने में हल्का सा दर्द उठने को महिलाएं अक्सर सामान्य मान लेती हैं। पुरुषों की तुलना में महिलाओं में लक्षण अधिक सूक्ष्म होते हैं, क्योंकि इनमें मुख्य धमनियों की जगह छोटी धमनियों में रुकावट पायी जाती है। यही वजह है कि महिलाएं तब परीक्षण के लिए पहुंचती हैं, जब उनके दिल को काफी नुकसान हो चुका होता है। 

करें हफ्ते में 150 मिनट की वॉक
30 से 45 मिनट हर दिन टहलें। संजय गांधी पोस्ट ग्रेजुएट इंस्टीट्यूट ऑफ मेडिकल साइंसेज, लखनऊ की डायटीशियन निरुपमा सिंह बताती हैं, पैदल चलना, व्यायाम करना, साइकिल चलाना और तैराकी आदि क्रियाएं हृदय के लिए खासतौर पर फायदेमंद हैं।  

योग करेगा कमाल
हदयगति, योग मुद्रा और भुजंग आसन। इन तीन आसनों से दिल मजबूत किया जा सकता है। पर हदयरोगी हैं तो शुरुआत किसी प्रशिक्षक की सलाह से ही करें। अर्बन योग स्टूडियो के योग गुरु सुनील सिंह कहते हैं, ‘इन आसनों के साथ लहसुन की एक कली व आंवला पाउडर सुबह पानी के साथ लें तो सफलता पाना आसान हो जाएगा। बेहतर होगा कि सही ढंग से श्वास लेने व छोड़ने की प्रक्रिया सीखी जाए। गहरे श्वास लिए जाए। सांस लेते समय पेट बाहर की ओर आना चाहिए,वहीं छोड़ते समय अंदर की ओर।

योगमुद्रा: रक्त संचार दिल की ओर लाने वाले इस आसन में पद्मासन में बैठ कर हाथ पीछे ले जाते हैं और माथे को जमीन तक ले जाते हैं। मोटापे पर भी यह आसन असर करता है। समय:3 से 5 बार ।

भुजंगासन: यह आसन हृदय रोगी, हार्निया व अल्सर रोगी भी कर सकते हैं। इसमें पेट के बल लेट कर हाथों का सहारा लेते हुए नाभि के भाग को ऊपर उठाकर पीछे की ओर ले जाना होता है। पैर मिले होते हैं। समय: 3 से 5 बार।

दो सेब रखेंगे दिल का ख्याल
यूएस की फ्लोरिडा स्टेट यूनिवर्सिटी में हुए शोध में पता चला है कि दिन में दो सेब का सेवन महिलाओं के दिल को मजबूत करता है। शोधकर्ताओं ने पाया है कि मीनोपॉज के बाद महिलाओं के शरीर में एस्ट्रोजन हारमोन के स्तर में बदलाव होता है, जिससे छोटी रक्त वाहिकाएं अधिक प्रभावित होती हैं। मीनोपॉज जल्दी हुआ है तो चिकित्सक से संपर्क अवश्य करें।

ज्यादा सर्दी-गर्मी से बचें
अगर सर्दी ज्यादा है तो दिल की परेशानियां बढ़ जाती हैं, पर गर्मी ज्यादा है तो भी दिल की परेशानियों होने की आशंका बढ़ जाती है। डॉ. गुप्ता उदाहरण देते हैं, अगर उत्तर भारत में सर्दी में दिल के मरीज ज्यादा होते हैं, तो दक्षिण भारत में यह स्थिति गर्मियों में होती है। अत: मौसम में बदलाव के समय सतर्क रहने की खास जरूरत होती है।

क्या खाएं क्या नहीं
दिल की बीमारी से बचके रहना है तो इसके लिए कोलेस्टॉल और वसा जैसे तत्वों को दूर रखना होगा। कानपुर स्थित परफेक्ट प्वाइंट की न्यूट्रीशनिस्ट और फिटनेस कंसल्टेंट डॉं शिप्रा माथुर बताती हैं- रेड मीट, मक्खन आदि में कोलेस्टॉल बहुत होता है। इनसे बचने के साथ कुछ और बातों का रखें ख्याल-

कोलेस्टॉल के साथ ब्लड प्रेशर और डायबिटीज बढ़ने वाले तत्वों से दूर रहें। हृदय रोगों की आशंका होने पर नमक, चीनी और मैदे का सेवन कम करें।
सोयाबीन, छोले, टिक्की आदि खाएं तो वनस्पति घी और मक्खन से दूर रहें।
ऑलिव ऑयल और अलसी का सेवन करें।

फैट, फाइबर, कार्बोहाइड्रेट की मात्रा हो सही
डॉ. निरुपमा भोजन में सभी तत्वों के सही प्रतिशत को अपनाने पर जोर देती हैं-

छिल्के वाली दालें, चोकर वाला आटा, सलाद आदि से मिलने वाला फाइबर 20 से 25%।
नमक 3 से 6 ग्राम।
फैट कैलौरी का 25 से 30%।
दूध में चुनाव करते समय ध्यान रखें कि गाय के दूध में 3 तो भैंस के दूध में 6% फैट होता है। टोंड दूध का इस्तेमाल करें।
फुल क्रीम मिल्क से मिलने वाला सेचुरेटेड फैट 7% से भी कम लें।

 
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