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सावधानी से पहनें गर्म कपड़े
मृदुला भारद्वाज
First Published:12-12-12 12:26 PM
सर्दियों के खूबसूरत और सुहाने दिन-रात सभी को अच्छे लगते हैं। सर्दियों का इंतजार हम 7-8 महीने तक करते हैं। जब सर्दियों के महीने आते हैं तो मन खिल उठता है। अच्छा खाना-पीना, खूब घूमना-फिरना, सब बहुत अच्छा लगता है। तरह-तरह के गर्म कपड़े पहनने का मौसम भी यही होता है। लेकिन ये गर्म कपड़े कई बार हमारी त्वचा के दुश्मन बन जाते हैं। इस मौसम में कपड़े पहनने में क्या सावधानी बरतें, बता रही हैं मृदुला भारद्वाज
सर्दियों का मौसम अपने पूरे शबाब है। इस रूमानी मौसम का लुत्फ लेने के साथ-साथ इस मौसम के दुष्प्रभावों से बचे रहने के लिए सावधानी बरतनी भी जरूरी है। सर्दियों में आपकी त्वचा पर नकारात्मक प्रभाव भी पड़ते हैं। इनसे बचने और त्वचा को रोगों से बचाए रखने के लिए डॉक्टर की सलाह लें। आमतौर पर सर्दियों में त्वचा रूखी व बेजान हो जाती है। त्वचा में खुजली होने लगती है और त्वचा फटकर उसकी परत उखड़ने लगती है। यह सब मौसम में ठंड और खुश्की बढ़ने के कारण होता है। थोड़ी-सी सावधानी और देखभाल से सर्दियों में त्वचा की तमाम परेशानियों से निजात पाई जा सकती है।
त्वचा का ड्राई होना
ठंड और तापमान के गिरने के कारण हवा में खुश्की बढ़ने लगती है और नमी कम हो जाती है, जिस कारण त्वचा भी शुष्क होने लगती है। ड्राई होने पर त्वचा फटने लगती है। त्वचा में ये खुश्की आमतौर पर शरीर के खुले स्थानों जैसे गाल, हाथ, पैर आदि में ज्यादा दिखाई देती है। शरीर के ढके हिस्सों में खुश्की होने पर और ऊनी वस्त्रों के कारण त्वचा पर रगड़ लगती है, जिससे रेशेज भी हो सकते हैं। इसलिए सर्दियों में भी इनर वियर्स सूती ही पहनें। त्वचा का रूखापन व खुजली
सर्दियों में त्वचा में खुजली का सबसे बड़ा कारण गर्म इनर वियर्स होते हैं। ठंड से बचने के लिए लोग सर्दियों में सूती की बजाय वूलन इनर वियर्स पहनते हैं जो एलर्जी कर देते हैं, जिस कारण खुजली होती है। ज्यादा गर्म पानी से नहाने के कारण भी त्वचा रूखी हो जाती है, जिससे खुजली होने लगती है। सर्दियों में होने वाली इस खुजली को विन्टर ईच कहते हैं। त्वचा को रूखेपन से बचाने के लिए ग्लिसरीन युक्त साबुन, अच्छे बॉडी लोशन और तेल का इस्तेमाल करें। रेनॉल्ड्स फिनामिना
सर्दियों में रेनाल्ड्स फिनामिना नामक त्वचा रोग भी हो सकता है। इसमें नसों में खून पर्याप्त मात्रा में नहीं पहुंच पाता, जिस कारण त्वचा नीली पड़ जाती है। समय पर इसका इलाज न करवाने पर अंगुलियां छोटी और पतली हो जाती हैं। सन एलर्जी
सनबर्न सिर्फ गर्मियों की समस्या नहीं है। ठंड के मौसम में भी बहुत तेज और अधिक देर तक धूप में बैठने से त्वचा जल जाती है और चेहरे व शरीर पर लाल-काले दाग-धब्बे हो जाते हैं। इसे सन एलर्जी कहते हैं। इससे बचने के लिए बहुत तेज धूप में या देर तक धूप में न बैठें। शरीर के खुले भागों को पतले कपड़े से ढक कर रखें और सर्दियों में भी सनस्क्रीन का इस्तेमाल जरूर करें। संक्रामक एलर्जी है स्केबिज
सर्दियों के मौसम में एड़ी व पांव फटने जैसी बीमारियों के साथ-साथ स्केबिज नामक रोग भी हो सकता है। सर्दियों में हमारी त्वचा बहुत कड़ी और रूखी हो जाती है, जिस कारण बहुत खुजली होती है। कई बार ये खुजली इतनी अधिक बढ़ जाती है कि व्यक्ति खुजाते-खुजाते परेशान हो जाता है। इसे स्केबिज कहते हैं। यह एक संक्रामक एलर्जी है। कोल्ड आर्टिकेरिया
सर्दियों के मौसम में हम हीटर का आमतौर पर इस्तेमाल करते हैं। लेकिन अचानक ठंड से गर्म और गर्म से ठंड में जाने पर शरीर के तापमान में परिवर्तन होता है, जिस कारण त्वचा पर पित्ती उभर आती है। इसे कोल्ड आर्टिकेरिया कहते हैं। फंगल इंफेक्शन
सर्दियों में बहुत से लोग फंगल इंफेक्शन का शिकार भी हो जाते हैं। त्वचा के बहुत अधिक शुष्क होने और दाद के कारण त्वचा पर लाल-लाल चकते बन जाते हैं। ये भी एक तरह की एलर्जी है। सूजन की समस्या
सर्दियों में त्वचा पर फैट जमा होने के कारण त्वचा लाल हो जाती है और उसमें खुजली होने लगती है। बहुत अधिक खुजाने से कई बार घाव भी हो जाते हैं। इसे पेनीकुलाइटिस कहते हैं। इस मौसम में हाथ-पैरों की अंगुलियों में सूजन आना भी आम बात है। अंगुलियों में सूजन आने को चिल ब्लेंस कहते हैं। आमतौर पर चिल ब्लेंस का शिकार सबसे ज्यादा महिलाएं होती है। एडोपिक एक्जिमा
सर्दियां उन लोगों के लिए और भी खतरनाक और कष्टदायी हो जाती हैं, जिन्हें पहले से ही कोई त्वचा रोग होता है। एडोपिक एक्जिमा जैसे त्वचा रोग भी सर्दियों में ही फैलते हैं। बच्चों का रखें विशेष खयाल
रॉकलैंड हॉस्पिटल की सीनियर कंसल्टेंट (पीड्रिटिशियन) डॉं वंदना केंट बताती हैं कि सर्दियां बच्चों के लिए बड़े से अधिक कठिन होती है। बच्चों की त्वचा बहुत ही नाजुक और कोमल होती है, इसलिए उनकी त्वचा को का विशेष खयाल रखने की जरूरत होती है। सर्दियों में बच्चों की कोमल त्वचा भी ड्राई हो जाती है और उस पर सीधे वूलन कपड़े पहनाने से रेशेज हो सकते हैं। सर्दियों का मौसम वातावरण में बदलाव लेकर आता है, जिस कारण कई तरह की एलर्जी जन्म ले लेती है। सर्दियों में खुश्की की वजह से बच्चों की त्वचा में ईचिंग, स्क्रेचिंग, दाने निकल आना, खुजली होना, रेशेज होना जैसी परेशानियां हो जाती हैं। इस मौसम में आमतौर पर बच्चे कम पानी पीते हैं, जिस कारण त्वचा में पानी की कमी हो जाती है। इससे त्वचा नमी खो देती है और उसमें रूखापन बढ़ जाता है। कई तरह के बैक्टीरियल संक्रमण भी सर्दियों में बच्चों को अपना शिकार बनाते हैं।
ठंड और तापमान के गिरने के कारण हवा में खुश्की बढ़ने लगती है और नमी कम हो जाती है, जिस कारण त्वचा भी शुष्क होने लगती है। ड्राई होने पर त्वचा फटने लगती है। त्वचा में ये खुश्की आमतौर पर शरीर के खुले स्थानों जैसे गाल, हाथ, पैर आदि में ज्यादा दिखाई देती है। शरीर के ढके हिस्सों में खुश्की होने पर और ऊनी वस्त्रों के कारण त्वचा पर रगड़ लगती है, जिससे रेशेज भी हो सकते हैं। इसलिए सर्दियों में भी इनर वियर्स सूती ही पहनें। त्वचा का रूखापन व खुजली
सर्दियों में त्वचा में खुजली का सबसे बड़ा कारण गर्म इनर वियर्स होते हैं। ठंड से बचने के लिए लोग सर्दियों में सूती की बजाय वूलन इनर वियर्स पहनते हैं जो एलर्जी कर देते हैं, जिस कारण खुजली होती है। ज्यादा गर्म पानी से नहाने के कारण भी त्वचा रूखी हो जाती है, जिससे खुजली होने लगती है। सर्दियों में होने वाली इस खुजली को विन्टर ईच कहते हैं। त्वचा को रूखेपन से बचाने के लिए ग्लिसरीन युक्त साबुन, अच्छे बॉडी लोशन और तेल का इस्तेमाल करें। रेनॉल्ड्स फिनामिना
सर्दियों में रेनाल्ड्स फिनामिना नामक त्वचा रोग भी हो सकता है। इसमें नसों में खून पर्याप्त मात्रा में नहीं पहुंच पाता, जिस कारण त्वचा नीली पड़ जाती है। समय पर इसका इलाज न करवाने पर अंगुलियां छोटी और पतली हो जाती हैं। सन एलर्जी
सनबर्न सिर्फ गर्मियों की समस्या नहीं है। ठंड के मौसम में भी बहुत तेज और अधिक देर तक धूप में बैठने से त्वचा जल जाती है और चेहरे व शरीर पर लाल-काले दाग-धब्बे हो जाते हैं। इसे सन एलर्जी कहते हैं। इससे बचने के लिए बहुत तेज धूप में या देर तक धूप में न बैठें। शरीर के खुले भागों को पतले कपड़े से ढक कर रखें और सर्दियों में भी सनस्क्रीन का इस्तेमाल जरूर करें। संक्रामक एलर्जी है स्केबिज
सर्दियों के मौसम में एड़ी व पांव फटने जैसी बीमारियों के साथ-साथ स्केबिज नामक रोग भी हो सकता है। सर्दियों में हमारी त्वचा बहुत कड़ी और रूखी हो जाती है, जिस कारण बहुत खुजली होती है। कई बार ये खुजली इतनी अधिक बढ़ जाती है कि व्यक्ति खुजाते-खुजाते परेशान हो जाता है। इसे स्केबिज कहते हैं। यह एक संक्रामक एलर्जी है। कोल्ड आर्टिकेरिया
सर्दियों के मौसम में हम हीटर का आमतौर पर इस्तेमाल करते हैं। लेकिन अचानक ठंड से गर्म और गर्म से ठंड में जाने पर शरीर के तापमान में परिवर्तन होता है, जिस कारण त्वचा पर पित्ती उभर आती है। इसे कोल्ड आर्टिकेरिया कहते हैं। फंगल इंफेक्शन
सर्दियों में बहुत से लोग फंगल इंफेक्शन का शिकार भी हो जाते हैं। त्वचा के बहुत अधिक शुष्क होने और दाद के कारण त्वचा पर लाल-लाल चकते बन जाते हैं। ये भी एक तरह की एलर्जी है। सूजन की समस्या
सर्दियों में त्वचा पर फैट जमा होने के कारण त्वचा लाल हो जाती है और उसमें खुजली होने लगती है। बहुत अधिक खुजाने से कई बार घाव भी हो जाते हैं। इसे पेनीकुलाइटिस कहते हैं। इस मौसम में हाथ-पैरों की अंगुलियों में सूजन आना भी आम बात है। अंगुलियों में सूजन आने को चिल ब्लेंस कहते हैं। आमतौर पर चिल ब्लेंस का शिकार सबसे ज्यादा महिलाएं होती है। एडोपिक एक्जिमा
सर्दियां उन लोगों के लिए और भी खतरनाक और कष्टदायी हो जाती हैं, जिन्हें पहले से ही कोई त्वचा रोग होता है। एडोपिक एक्जिमा जैसे त्वचा रोग भी सर्दियों में ही फैलते हैं। बच्चों का रखें विशेष खयाल
रॉकलैंड हॉस्पिटल की सीनियर कंसल्टेंट (पीड्रिटिशियन) डॉं वंदना केंट बताती हैं कि सर्दियां बच्चों के लिए बड़े से अधिक कठिन होती है। बच्चों की त्वचा बहुत ही नाजुक और कोमल होती है, इसलिए उनकी त्वचा को का विशेष खयाल रखने की जरूरत होती है। सर्दियों में बच्चों की कोमल त्वचा भी ड्राई हो जाती है और उस पर सीधे वूलन कपड़े पहनाने से रेशेज हो सकते हैं। सर्दियों का मौसम वातावरण में बदलाव लेकर आता है, जिस कारण कई तरह की एलर्जी जन्म ले लेती है। सर्दियों में खुश्की की वजह से बच्चों की त्वचा में ईचिंग, स्क्रेचिंग, दाने निकल आना, खुजली होना, रेशेज होना जैसी परेशानियां हो जाती हैं। इस मौसम में आमतौर पर बच्चे कम पानी पीते हैं, जिस कारण त्वचा में पानी की कमी हो जाती है। इससे त्वचा नमी खो देती है और उसमें रूखापन बढ़ जाता है। कई तरह के बैक्टीरियल संक्रमण भी सर्दियों में बच्चों को अपना शिकार बनाते हैं।
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