शनिवार, 25 अक्टूबर, 2014 | 04:39 | IST
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आला रे खिलाड़ी कुमार
शान्तिस्वरूप त्रिपाठी First Published:08-12-12 04:07 PM
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साल 2012 में अभिनेता अक्षय कुमार की बल्ले-बल्ले रही है। जोकर को छोड़ दें तो उनकी दो फिल्मों हाउसफुल 2 और राउडी राठौड़ ने 100 करोड़ से ज्यादा की कमाई है। उनकी होम प्रोडक्शन फिल्म ओ माई गॉड ने भी करीब 90 करोड़ का व्यवसाय किया है। अब उनकी फिल्म खिलाड़ी 786 रिलीज हुई है। अक्षय को यकीन है कि यह फिल्म भी 100 करोड़ क्लब का हिस्सा बनेगी।

लंबे समय के बाद अब एक बार फिर आप ‘खिलाड़ी’ बनकर आ रहे हैं। आपको नहीं लगता कि इस बार आपसे लोगों की अपेक्षाएं कुछ ज्यादा होंगी?
मैं हमेशा अपने दर्शकों और प्रशंसकों की पसंद का सम्मान करता रहा हूं। मुझसे अपेक्षाएं करने का अर्थ यह है कि उन्हें मुझ पर यकीन है। भरोसा है। लेकिन उनकी ये अपेक्षाएं मुझ पर दबाव नहीं बनातीं। मैं फिल्म ‘खिलाड़ी 786’ के साथ अपने खिलाड़ी ब्रांड पर वापस आ रहा हूं। इसलिए यह फिल्म मेरे लिए खास है। पर इसका यह अर्थ ना लगाएं कि मैं एक्शन में वापसी कर रहा हूं। लोग ‘राउडी राठौडम्’ में मेरा एक्शन देख चुके हैं।

जोकर’ की असफलता के बाद ‘ओह माई गॉड’ की सफलता ने तो आपको ‘खिलाड़ी 786’ को लेकर चिंता कम कर दी होगी?
हम कलाकारों के सिर पर फिल्म के रिलीज के समय दबाव होता है। फिल्म चल जाती है, तो थोड़ी सी खुशी मनाकर हम आगे बढ़ जाते हैं। पर हवा में नहीं उडते। जमीन पर ही रहते हैं। फिल्म नहीं चलती है, तो थोड़ी सी मायूसी होती है। पर फिर हम आगे बढ़ जाते हैं। हम हमेशा अगले काम को अच्छे ढंग से करने की सोचते हैं। हममें से किसी भी कलाकार को नहीं पता कि अगले शुक्रवार को क्या होगा।

पर फिल्म की रिलीज का समय नजदीक आते ही आपके ऊपर कहीं न कहीं कोई दबाव जरूर बनता होगा?
बिलकुल नहीं! मैं तनाव में काम करता ही नहीं। किसी भी फिल्म की रिलीज का समय मुझे डराता नहीं है। मुझे शुक्रवार का डर नहीं लगता। मैं निश्चिंत होकर सोता हूं। मेरी रातों की नींद हराम नहीं होती।

इस साल आपकी दो फिल्में सौ करोड़ क्लब में शामिल हुई हैं। अब इस तीसरी फिल्म को लेकर भी चिंता हो रही होगी?
मैं जिम के अंदर अपनी कसरत को सही ढंग से करने के लिए चिंता करता हूं। किसी भी फिल्म को लेकर मैं चिंता नहीं करता। मैं यहां लोगों को मनोरंजन देने के लिए आया हूं। मेरी कोशिश होती है कि मैं लोगों को उनके पैसे की सही कीमत उन्हें मनोरंजन देकर अदा कर सकूं।

‘खिलाड़ी 786’ की योजना कैसे बनी?
फिल्म की पटकथा हिमेश रेशमिया ने लिखी है। एक यात्रा के दौरान हैदराबाद जाते समय हिमेश ने मुझे इस फिल्म की कहानी सुनाई थी। मैंने उससे कहा कि मुझे यह फिल्म करनी है और साथ में करनी है।

इस फिल्म में 786 का क्या मतलब है?
मैं इस फिल्म में 72 सिंह का किरदार निभा रहा हूं, जिसके पिता का नाम 70 सिंह, चाचा का नाम 71 सिंह और चचेरे भाई का नाम 74 सिंह है। हमारे यहां इसी तरह से नाम रखे जाते हैं। यह पंजाबी युवक है और पंजाब सीमा पर रहता है। 72 सिंह के हाथ की लकीरों में 786 लिखा हुआ है। 786 का मतलब होता है बिसमिल्लाह, यानी कि किसी काम या चीज की शुरुआत करना। बिसमिल्लाह सिर्फ मुसलमानों के लिए नहीं बल्कि सभी के लिए बहुत बड़ी बात है। कई बिल्लों पर 786 लिखा होता है और यहां तो 72 सिंह की हाथ की लकीरों में लिखा हुआ है। अब जिसके हाथ में 786 लिखा हुआ हो, उस पर अल्लाह की रहमत होनी ही होनी है। उसका कोई बाल भी बांका नहीं कर सकता।

आपने अपनी पिछली फिल्म ‘ओह माई गॉड’ में अंधविश्वास के खिलाफ बात की थी। अब आप इस फिल्म में धर्म और अंधश्रृद्धा को फैलाने का काम कर रहे हैं?
देखिए, धर्म को लेकर लोगों की मांग बहुत होती है। मैंने अपनी किसी भी फिल्म में यहां तक कि ‘ओह माई गॉड’ में भी यह नहीं कहा कि भगवान नहीं है। ‘ओह माई गॉड’ में भी हास्य के साथ व्यंग्य था। यह गंभीर नहीं मसाला फिल्म थी। ‘खिलाड़ी 786’ में मैं धर्म की बात नहीं कर रहा हूं। मैं तो अल्लाह की रहमत की बात कर रहा हूं।

ईश्वर को लेकर आपके विचारों में यह बदलाव कब आया?
पांच साल पहले।

तो क्या इसी कारण आप खिलाड़ी का सीक्वल बनाते रहते हैं?
खिलाड़ी नाम मुझे मीडिया ने बीस साल पहले दिया था। मेरे प्रशंसक चाहते हैं कि खिलाड़ी का सीक्वल बनता रहे, इसलिए कई फिल्में बन गयी।

पूरे 12 साल बाद आप ‘खिलाड़ी’ सिरीज लेकर आए हैं। इतना लंबा गैप क्यों हुआ?
शादी के बाद मैंने एक्शन फिल्में करना बंद कर दिया था। परदे पर कॉमेडी और रोमांस करने लगा था। फिर बेटे के लिए भी कुछ अलग तरह की फिल्में करता रहा। अब शादी को काफी वक्त हो गया है। इसके अलावा अब बेटा भी 11 साल का हो गया है। तो फिर से एक्शन फिल्में करनी शुरू कर दी हैं।

वापसी की तो फिर से कुछ सीखना पडम या अब क्या बदलाव देख रहे हैं?
मैं एक्शन से दूर गया नहीं था। यहीं था। फिल्मों में एक्शन नहीं कर रहा था, लेकिन कैमरे के पीछे नियमित रूप से कसरत करने के अलावा एक्शन दृश्यों की भी प्रैक्टिस किया करता था। विज्ञापन फिल्मों में भी एक्शन कर रहा था। एक्शन मेरा कम्फर्ट जोन है। मुझे किसी प्रकार के एक्शन की ट्रेनिंग लेने की जरूरत नहीं पड़ी। मुझे कभी भी एक्शन करते समय डर नहीं लगता।

अब तो आपको एक्शन करने से डर नहीं लगता होगा?
डर तो हमेशा लगता है, लेकिन यह डर भी दो तरह का होता है। एक अच्छा डर और दूसरा खराब डर। अच्छा डर हमें केयरफुल बनाता है जबकि खराब डर हमें बुजदिल बना देता है। 

अब तक आपने जितने एक्शन सीन किए, उनमें से सबसे खतरनाक कौन सा सीन था?
फिल्म ‘खिलाड़ी 420’ में मैं उड़ते हवाई जहाज की छत पर बैठकर 3000 फीट  की ऊंचाई से नीचे कूदा था। वह काफी कठिन एक्शन था।

आपका पसंदीदा एक्शन हीरो?
जैकी चैन।

जैकी चैन ने एक्शन से संन्यास ले लिया है। क्या कहेंगे?
मैं तो जैकी चैन से बहुत प्रभावित हूं। उन्होंने एक्शन को बहुत कुछ दिया है। एक्शन में वह लीजेंड हैं और हमेशा लीजेंड रहेंगे।

क्या वजह हैं कि जींस के ‘अनबटन’ के मामले को छोड़ दें, तो आप कभी भी विवादों में नही फंसे?
मुझे तो ‘अनबटन’ वाले मामले में भी कुछ गलत नहीं लगा था। पर लोगों ने विवाद खड़ा कर दिया था। मैं अब तक अपने करियर में विवादों से बच गया, इसके लिए ईश्वर का शुक्रगुजार हूं।

आपने फिरोज खान, मनोज कुमार जैसे कलाकारों के साथ भी काम किया है। अब सिनेमा 100 साल का हो गया है। क्या कहेंगे?
मनोज कुमार और फिरोज खान की पीढ़ी ने इंडस्ट्री में बहुत कठिन समय देखा था। हम उन्हीं के रास्ते पर चल रहे हैं। देखिए, जो इंसान इंडस्ट्री खड़ी करता है, उसे ही सबसे कठिन दौर से गुजरना पड़ता है। हमें यह इंडस्ट्री बसी बसायी मिली थी।

इंडस्ट्री की कैम्पबाजी के बारे में क्या कहेंगे?
मैं किसी कैम्प का हिस्सा नहीं हूं।

आपकी आने वाली फिल्में कौन-कौन सी हैं?
मैं एक खास फिल्म कर रहा हूं, जिसका नाम है ‘स्पेशल 26’। इसके अलावा ‘वंस अपॉन ए टाइम इन मुंबई अगेन’ और ‘नाम है बॉस’ कर रहा हूं।
 
 
 
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