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तलाकशुदा होने से अच्छा है कुंवारा कहलाओ: सोनिका
आरती सक्सेना
First Published:08-12-12 03:43 PM
फिल्म राम लखन की बीबीया का किरदार याद करते ही आपके जेहन में एक ग्लैमरस युवती का किरदार उभरता है। जी हां, ये वही ग्लैमरस सोनिका गिल हैं, जिन्होंने अभिनय की दुनिया में वापसी की है।
हाल ही में सोनी चैनल द्वारा आयोजित अनामिका धारावाहिक की प्रेस कांफ्रेंस में नजर एक जमाने में चरित्र किरदार निभाने वाली अभिनेत्री सोनिका गिल पर पड़ी तो कुछ उत्सुकता सी भर गयी। सोनिका लंबे अरसे से फिल्मी हलचल से गायब हैं। उन्हें देख एक बार को अचरज भी हुआ कि क्या यह वही सोनिका गिल हैं, जो फिल्म राम लखन में वैम्प के रूप में नजर आयी थीं। बाद में कुछ फिल्मों मे छोटे-मोटे रोल और फिर गायब। उत्सुकतावश जब उनसे उनके बारे में पूछा गया तो वह बोलीं, ‘हां, मैं वही हूं और अब मैं वापस फिल्मी दुनिया में लौट आयी हूं।’
इतने लंबे समय तक दूरी के बारे में उन्होंने कहा-‘आपने इस पंक्ति को तो बहुत बार सुना ही होगा कि किसी की बुरी नजर लगती है और जीवन तहस-नहस हो जाता है। ऐसा ही कुछ अनुभव मुङो भी हुआ। राम लखन की अपार सफलता के बाद मुझे कई बड़ी फिल्में ऑफर हुईं और मेरा सितारा चमकने को ही था कि मेरा बहुत बड़ा कार एक्सीडेंट हो गया था, जिसमें मेरी टांग लगभग कट गई थी। उसके बाद करीब ढाई साल तक मैं बिस्तर पर थी। किसी तरह ठीक हुई तो मैं चल भी नहीं पाती थी। उस दौरान मेरे गुरु गोपी किशन ने मुझे प्रेरित किया कि मैं घुंघरू बांध कर डांस करूं। उस दौरान मुझे तकलीफ तो बहुत हुई लेकिन मैं चलने लायक हो गई। कहते हैं ना कई बार मुंह से निकली बात सच हो जाती है। मैं आठ साल की उम्र से काम कर रही थी। मैं यह कहने लगी कि अब मुझे अभिनय नहीं करना है। और एक दिन वही सच हो गया। मेरा एक्सीडेंट हुआ और मैं घर बैठ गयी।’
इस एक्सीडेंट के बाद सोनिका ने फिर से फिल्मों में काम करने की कोशिश की। उन्होंने कुछ फिल्मों में काम किया और कुछ धारावाहिकों में छोटे-मोटे रोल भी किये। लेकिन कुछ बात नहीं बनी। वह कहती हैं, ‘उन दिनों धारावाहिकों में काम करने वाले लोगों को असफल कलाकार माना जाता था। लिहाजा मुझे छोटे परदे पर काम करना रास नहीं आया। फिर भी मैंने पाकीजा, जी जम्बो, चंद्रकांता जैसे कुछ सीरियल किये, लेकिन मुझे मजा नहीं आया। हमारे समय मे जो थियेटर करते थे, वह थियेटर ही करते रह जाते थे और जो कलाकार सीरियल करते थे उनका फिल्मों में स्थापित होना बहुत ही मुश्किल था।
लेकिन आज ऐसा नहीं है। लिहाजा जब मुझे छोटा परदा रास नहीं आया तो मैं विदेश चली चली गयी। वहां मैंने काफी साल सरकारी नौकरी की। वहां हम खुद ही मालिक और खुद ही नौकर होते हैं। अपनेपन का एहसास भी कम ही होता है। ये बात मुझे धीरे-धीरे परेशान करने लगी कि मेरा अभिनय का पेशा इससे कहीं ज्यादा अच्छा है। फिर करीब आठ साल मैं वापस भारत लौट आयी।’
लंबे समय विदेश में रहने और भारत लौटने के बाद भी सोनिका ने घर नहीं बसाया जबकि वह ग्लैमर की दुनिया से नाता तोड़ चुकी थीं। इस बारे में वह कहती हैं,‘यह भी मीडिया की मेहरबानी है। नेट पर मेरा नाम दक्षिण के एक निर्देशक हरीहरण के साथ जोड़ दिया गया और मेरी शादी तक की खबर उसमे छप गई, जिसे देखकर मेरी चार-पांच शादियां टूटीं। इस पर भी मैं नेट वालों की शुक्रगुजार हूं क्योंकि अच्छा हुआ उनकी वजह से मैं ऐसे कम दिमाग वाले इंसानों से शादी करने से बच गई जो नेट की खबरें देखकर शादी करने या ना करने का फैसला लेते हैं। उसके बाद मेरे डैडी ने मेरे लिये कुछ लड़के बताये। वह मुझे खुद नहीं जमे। मेरा मानना है शादी तभी करनी चहिये जब आपको सामने वाले बंदे का स्वभाव अच्छा लगे। खुबसूरती तो चार दिन की होती है। मुख्य तो स्वभाव होता है। जब आपको स्वभाव अच्छा लगे तभी शादी करनी चहिये। तलाकशुदा कहलाने से अच्छा है कुंवारे कहलाओ।’
बताया जाता है कि इस शो में सोनिका ग्लैमरस के बजाए एक सीधा साधा रोल करने जा रही हैं। तो क्या यह उनकी इमेज के विपरीत नहीं जाएगा?
इस बारे में वह खुलकर कहती हैं, ‘मेरा मानना है कि हर तरह का किरदार करना चहिये। मैंने बहुत छोटी उम्र मे चंद्रगुप्त की चंदा बाई नाटक में 70 साल की बुढिया का किरदार भी निभाया था। मैंने ग्लैमरस रोल भी किये हैं तो दूसरी तरफ मैंने चंबल की डाकू का किरदार भी निभाया है। मैंने अनुपम खेर और सतीश कौशिक के साथ कई थियेटर भी किये हैं। लिहाजा मेरे लिये किरदार की उम्र नहीं किरदार की महत्ता मायने रखती है। अनामिका में सीधी सादी औरत का किरदार निभाने के पीछे एक वजह यह भी है कि मैं गलैमरस किरदार निभा-निभा कर थक गई थी।
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