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पैसा बनाने का बेहतर जरिया पोर्टफोलियो मैनेजर
प्रस्तुति: प्रमोद झा First Published:05-12-12 02:07 PM
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अगर आप बाजार के विश्लेषण में दक्ष हैं और वित्तीय बाजार में रुचि रखने के साथ-साथ दुनिया-भर की समसामयिक घटनाओं के कारण बदलते परिदृश्य पर पैनी नजर रखते हैं तो आपके लिए पोर्टफोलियो मैनेजर बेहतर विकल्प हो सकता है।

पोर्टफोलियो मैनेजर मूल रूप से अपने क्लाइंट की ओर से विविध परिसंपत्तियों की श्रेणियों जैसे-डैट इक्टि रियल एस्टेट आदि का प्रबंधन उनकी आवश्यकता के मुताबिक करता है। उसे एक समयावधि में बेंचमार्क इंडेक्स के मुकाबले बेहतर रिटर्न जेनरेट करने की आवश्यकता होती है। उसके लिए सबसे महत्वपूर्ण है क्लाइंट का विश्वास जीतना, ताकि वह उस पर भरोसा कर सके। परफॉर्म करने वाले बेंचमार्क इंडेक्स का लॉन्ग टर्म ट्रैक रिकॉर्ड यानी लंबी अवधि में अच्छा प्रदर्शन करने का रिकॉर्ड और अपने ग्राहकों के लिए पैसा बनाना एक अच्छे पोर्टफोलियो मैनेजर का हॉलमार्क होता है। 

काम का समय
पोर्टफोलियो मैनेजर के रूप में आपके लिए काम का कोई निर्धारित समय नहीं होता, क्योंकि आपको ग्लोबल एवं लोकल मैक्रोइकोनॉमिक डेटा और ट्रेंड्स की रिसर्च में ज्यादा समय देना पड़ेगा। इसके अलावा पोर्टफोलियो बनाने के लिए विभिन्न कंपनियों के आला अधिकारियों से मिल कर उनके क्रेडिट या फंडामेंटल वैल्यूज का आकलन व मूल्यांकन भी करना पड़ेगा।

कमाई
वैसे तो पोर्टफोलियो मैनेजर के लिए कमाई की कोई सीमा नहीं है, लेकिन व्यक्ति की परफॉर्मेस ज्यादा महत्व रखती है। 

कौशल
दैनिक कामकाज में लंबी अवधि तक काम करने की क्षमता जरूरी है।
लक्ष्यपरक और विश्लेषण क्षमता।
स्वतंत्र रूप से काम करने की क्षमता।
अनुशासन, उदार होना और अगर निवेश में नुकसान होता है तो अपनी पराजय स्वीकार करना।
बेहतर प्रेक्षण करने में माहिर।

इंस्टीटय़ूट
नेशनल स्टॉक एक्सचेंज ऑफ इंडिया, मुंबई www.nseindia.com
इंडियन इंस्टीटय़ूट ऑफ फॉरेन ट्रेड, नई दिल्ली www.iift.edu/new
बीएलबी इंस्टीटय़ूट ऑफ फाइनेंशियल मार्केट्स (बीआईएफएम), नई दिल्ली www.bifm.edu.in

खामियां व खूबियां
उच्च वेतन और तरक्की की बेहतर संभावना
कठिन प्रतिस्पर्धा
वित्तीय विश्लेषण में अनुभव हासिल करने में सालों लग जाते हैं
कामकाज के लंबे घंटे होते हैं
डेडलाइन पूरी करने और भारी खातों की जिम्मेदारी संभालने में तनाव लाजिमी है। 

कैसे करें मुकाम हासिल
पोर्टफोलियो मैनेजर बनने के लिए फाइनेंस या इकोनॉमिक्स में कम से कम स्नातक की डिग्री अवश्य होनी चाहिए। इसके अलावा बॉन्ड्स वैल्यूएशन, कैपिटल मार्केट और इंटरस्ट रेट्स, फाइनेंशियल स्टेटमेंट, इंटरनेशनल इकोनॉमिक्स और ट्रेड में कोई कोर्स करना काफी फायदेमंद हो सकता है।
 
 
 
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