शुक्रवार, 31 अक्टूबर, 2014 | 21:13 | IST
  RSS |    Site Image Loading Image Loading
ब्रेकिंग
विद्या प्रकाश ठाकुर ने भी राज्यमंत्री पद की शपथ लीदिलीप कांबले ने ली राज्यमंत्री पद की शपथविष्णु सावरा ने ली मंत्री पद की शपथपंकजा गोपीनाथ मुंडे ने ली मंत्री पद की शपथचंद्रकांत पाटिल ने ली मंत्री पद की शपथप्रकाश मंसूभाई मेहता ने ली मंत्री पद की शपथविनोद तावड़े ने मंत्री पद की शपथ लीसुधीर मुनघंटीवार ने मंत्री पद की शपथ लीएकनाथ खड़से ने मंत्री पद की शपथ लीदेवेंद्र फडणवीस ने महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री पद की शपथ ली
आओ घर को ही बना लेथियेटर?
पंकज घिल्डियाल First Published:01-12-12 02:49 PM
Image Loading

डीटीएच सेवा के आने के बाद पिक्चर क्वालिटी में अद्भुत बदलाव देखा गया। हाई क्वालिटी रिसेप्शन और हाई डेफिनेशन का साथ किसी थियेटर से कम नहीं है। आज हर घर में लोगों की चाहत रहती है कि टीवी का स्क्रीन साइज और पिक्चर क्वालिटी ऐसी हो जो उन्हें थियेटर यानी कि सिनेमाघर का अहसास करा सके।

आज धीरे-धीरे घरों से 24 इंच कलर टेलीविजन गायब होने लगा है। उसकी जगह पहले प्लाज्मा फिर एलसीडी और अब एलईडी टीवी लेने लगा है। डीटीएच सेवा के आने के बाद पिक्चर क्वालिटी में अद्भुत बदलाव देखा गया। इसका सबसे बड़ा फायदा इन नए जमाने के टीवी को मिला। हाई क्वालिटी रिसेप्शन और हाई डेफिनेशन का साथ किसी थियेटर से कम नहीं है। इन टीवी ने जहां उनको साइज में कई ऑप्शन दिए, वहीं ऐसे मजेदार विकल्पों को भी सामने परोसा, जिससे ग्राहक इन्हें खुद से दूर न रख सका। आइये जानते हैं कि आज टीवी के लिए तीन विकल्पों में किसमें है कितना दम :

प्लाज्मा टीवी...गुजरे कल का शहंशाह
शुरुआत में एलसीडी के सामने प्लाज्मा की परफॉरमेंस काफी बेहतर थी। आज सिर्फ प्लाज्मा की चाह वालों को इन्हें ढूंढ़ने में मशक्कत भी करनी पड़ती है। कुछ समय पहले टीवी लेना है तो नजर प्लाज्मा में जाकर रुकती थी। इसकी बिक्री बढ़ने में इसका नाम ही काफी था। दरअसल प्लाज्मा टीवी छोटे-छोटे फ्लोरसेंट बिंदु मिलकर बनाते हैं। यहीं से इसके तीन विशेष रंगों की रोशनी निकलती है। मिलकर यही रंग पूरी तस्वीर को बनाते हैं। इसकी सबसे बड़ी समस्या बर्नआउट की रहती है। यानी बहुत अधिक देर तक अगर कोई चित्र स्थिर है, तो इन बिंदुओं के जल जाने का खतरा बना रहता है। और आपका मनपसंद टीवी किसी काम का नहीं रहता है।

कल भी नंबर दो था, आज भी नंबर दो..
एलसीडी टीवी प्लाज्मा से आज काफी बेहतर है। एक समय था, जब एलसीडी के सामने प्लाज्मा एक पायदान ऊपर था। इन दो विकल्प में प्लाज्मा ही खरीदा जाता था। लेकिन एलसीडी को लेकर हुई नित नई रिसर्च ने फिर से उसे दमदार बना दिया। और प्लाज्मा खरीदारों को अपनी क्वालिटी के बूते एक बार सोचने पर मजबूर कर दिया। वर्तमान में प्लाज्मा टीवी के खरीदार न के बराबर हो गए हैं।

एलसीडी में मौजूद फ्लोरसेंट लैंप के सामने बिंदु से छनकर सिर्फ वह विशेष रंग ही बाहर आता है। हर बिंदु के आगे एलसीडी की वह खिड़की होती है, जिसके खुलने व बंद होने पर पर जरूरी रंग की रोशनी ही निकलती है। और सभी मिलजुलकर एक सुंदर तस्वीर बना देते हैं। एलसीडी के जलने का खतरा नहीं होता, यही वजह है कि लोगों की पंसद बन रहा है।

एलईडी टीवी के साथ लें मज़ा एचडी का
आज की नवीनतम टेक्नोलॉजी में एलईडी टीवी की मांग दिनों दिन बढ़ रही है। एलईडी टीवी व एलसीडी में बेसिक अंतर यही होता है, जहां एलसीडी टीवी में रोशनी फ्लोरसेंट लैंप से आती है, वहीं इसके स्थान पर एलईडी का प्रयोग किया जाता है। एलईडी टीवी एलसीडी के मुकाबले कम मोटे हैं। बिजली की खपत भी कम है, मगर एलसीडी के मुकाबले काफी महंगे हैं।

3डी...जो कल तक सपना था, आज अपना है
थियेटर में तो 3डी का मजा आपने लिया होगा। लेकिन यही आपके घर को सजाने के लिए तैयार हैं। टीवी टेक्नोलॉजी में यह एक नए अध्याय जैसा है। इसमें दिखने वाली तस्वीर ऐसी दिखाई देती हैं, जैसे मानों वह घटना ठीक हमारे सामने घट रही है। हां, इसके लिए आपको एक विशेष चश्मे का भी इस्तेमाल करना होता है। इन्हें बाजार में आए हुए ज्यादा समय नहीं हुआ है। इसीलिए ये अभी आम ग्राहकों की पहुंच से दूर हैं। दरअसल ऐसे टीवी के लिए उस फॉर्मेट में प्रसारित होने वाले कार्यक्रमों का भी अभाव है।

 
 
|
 
 
टिप्पणियाँ