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डिजाइन की चमक से रोशन भविष्य
संजीव कुमार सिंह
First Published:07-08-12 04:09 PM
यदि आप रचनात्मक हैं और डिजाइनिंग की अच्छी समझ है तो ज्वेलरी डिजाइनिंग आपके लिए एक बेहतर करियर साबित हो सकता है। इसमें करियर की संभावनाओं के बारे में बता रहे हैं संजीव कुमार सिंह
आज महिलाओं के साथ-साथ पुरुष भी आभूषण पहनना पसंद करने लगे हैं। इससे बाजार में तेजी आ गई है। इस तेजी की एक खास वजह यह भी रही है कि सरकार की नीतियां एफडीआई (फॉरेन डाइरेक्ट इनवेस्टमेंट) के प्रति सकारात्मक रही है तथा यहां पर इस उद्योग से जुड़े प्रतिभावान लोग मौजूद हैं। एक खासियत यह भी है कि यहां पर मजदूरी का खर्च भी काफी कम है, जिसके चलते विदेशों से अधिक काम भारत आता है। यहां के लोग भी आभूषण तथा अन्य रत्न धारण करने को शुभ मानते हैं। रत्नों के प्रति मोह तो भारत में 5000 साल पुराना है।
क्या है आभूषण डिजाइनिंग
देश में डिजाइनिंग की कई विधाएं मौजूद हैं। उनकी तरह ज्वेलरी डिजाइनिंग भी एक कला है, जिसमें छात्रों को डिजाइनिंग की बारीकियों के साथ-साथ उत्पादन का काम सिखाया जाता है। विगत कुछ वर्षों से इसमें व्यापक बदलाव आये हैं। आज डिजाइनर के सामने जो सबसे बड़ी चुनौती है, वह है नई सामग्री की खोज करना तथा उसे प्रयोग में लाना। वह ज्वेलरी डिजाइनर ही होता है, जो ज्वेलरी के पैटर्न एवं स्टाइल की योजना बनाता है। कई बार उसे उपभोक्ता की मांग को ध्यान में रखते हुए समय सीमा के भीतर डिजाइन तैयार करना होता है। हालांकि यह काम इतना आसान भी नहीं है, क्योंकि ज्यादातर डिजाइन पेटेंट होते हैं तथा कॉपीराइट की तलवार भी ज्वेलरी डिजाइनरों के सिर पर लटकती रहती है। इन सब बाधाओं से जूझते हुए जब कोई कृति लोगों द्वारा पसंद की जाती है तो डिजाइनरों को उनके परिश्रम का फल प्राप्त होता है। विदेशी बाजार में भी भारतीय डिजाइनिंग को पहले से अधिक स्वीकार किया जाने लगा है। आंकड़ों की नजर में उद्योग
आंकड़ों की मानें तो वर्तमान समय में भारत का रत्न एवं आभूषण उद्योग सालाना 15-20 फीसदी की दर से विकास कर रहा है तथा इस समय देश में यह कारोबार 13 अरब रुपये के करीब पहुंच चुका है। यदि यही रफ्तार रही तो 2020 तक यह कारोबार 25-30 अरब रुपये तक पहुंच जाएगा। आज भारत हीरे-जवाहरात एवं अन्य रत्नों का 45 फीसदी स्वयं निर्यात कर रहा है तथा विश्व में सोने के निजी जमाकर्ताओं में सबसे बड़ा देश है। देश की कुल विदेशी मुद्रा की आय का लगभग 20 फीसदी कमाने वाले इस उद्योग में 13 लाख लोग कार्यरत हैं तथा विश्व में भारत हीरा कटाई तथा पॉलिश करने का सबसे बड़ा केंद्र है। संख्या की दृष्टि से विश्व के कुल हीरों में से 90 फीसदी भारत में तराशे जाते हैं। संबंधित कोर्स एवं दाखिला
ज्वेलरी डिजाइनिंग के ज्यादातर पाठ्यक्रम डिप्लोमा एवं सर्टिफिकेट के जरिए कराए जाते हैं। कुछ ऐसे भी संस्थान हैं, जो तीन वर्षीय अथवा चार वर्षीय स्नातक डिग्री प्रदान करते हैं। कोर्स के दौरान नेचर स्टडी, फ्री हैंड ड्राइंग, एलिमेंट्स ऑफ डिजाइन, सरफेस डिजाइन, इंट्रोडक्शन टू जेमोलॉजी, मेटल एंड बिहेवियर, हिस्ट्री ऑफ इंडियन ज्वेलरी, डिजाइन प्रोसेस, क्रिएटिव ज्वेलरी, इलस्ट्रेशन एंड रेंडरिंग, जेम आइडेंटिफिकेशन टूल्स आदि का विधिवत अध्ययन कराया जाता है। इस आधार पर इस क्षेत्र को स्नातक, डिप्लोमा एवं सर्टिफिकेट कोर्सो में बांटा जा सकता है। इसके अधिकांश पाठ्यक्रमों में दाखिला साक्षात्कार अथवा मेरिट के आधार पर मिलता है।
देश में डिजाइनिंग की कई विधाएं मौजूद हैं। उनकी तरह ज्वेलरी डिजाइनिंग भी एक कला है, जिसमें छात्रों को डिजाइनिंग की बारीकियों के साथ-साथ उत्पादन का काम सिखाया जाता है। विगत कुछ वर्षों से इसमें व्यापक बदलाव आये हैं। आज डिजाइनर के सामने जो सबसे बड़ी चुनौती है, वह है नई सामग्री की खोज करना तथा उसे प्रयोग में लाना। वह ज्वेलरी डिजाइनर ही होता है, जो ज्वेलरी के पैटर्न एवं स्टाइल की योजना बनाता है। कई बार उसे उपभोक्ता की मांग को ध्यान में रखते हुए समय सीमा के भीतर डिजाइन तैयार करना होता है। हालांकि यह काम इतना आसान भी नहीं है, क्योंकि ज्यादातर डिजाइन पेटेंट होते हैं तथा कॉपीराइट की तलवार भी ज्वेलरी डिजाइनरों के सिर पर लटकती रहती है। इन सब बाधाओं से जूझते हुए जब कोई कृति लोगों द्वारा पसंद की जाती है तो डिजाइनरों को उनके परिश्रम का फल प्राप्त होता है। विदेशी बाजार में भी भारतीय डिजाइनिंग को पहले से अधिक स्वीकार किया जाने लगा है। आंकड़ों की नजर में उद्योग
आंकड़ों की मानें तो वर्तमान समय में भारत का रत्न एवं आभूषण उद्योग सालाना 15-20 फीसदी की दर से विकास कर रहा है तथा इस समय देश में यह कारोबार 13 अरब रुपये के करीब पहुंच चुका है। यदि यही रफ्तार रही तो 2020 तक यह कारोबार 25-30 अरब रुपये तक पहुंच जाएगा। आज भारत हीरे-जवाहरात एवं अन्य रत्नों का 45 फीसदी स्वयं निर्यात कर रहा है तथा विश्व में सोने के निजी जमाकर्ताओं में सबसे बड़ा देश है। देश की कुल विदेशी मुद्रा की आय का लगभग 20 फीसदी कमाने वाले इस उद्योग में 13 लाख लोग कार्यरत हैं तथा विश्व में भारत हीरा कटाई तथा पॉलिश करने का सबसे बड़ा केंद्र है। संख्या की दृष्टि से विश्व के कुल हीरों में से 90 फीसदी भारत में तराशे जाते हैं। संबंधित कोर्स एवं दाखिला
ज्वेलरी डिजाइनिंग के ज्यादातर पाठ्यक्रम डिप्लोमा एवं सर्टिफिकेट के जरिए कराए जाते हैं। कुछ ऐसे भी संस्थान हैं, जो तीन वर्षीय अथवा चार वर्षीय स्नातक डिग्री प्रदान करते हैं। कोर्स के दौरान नेचर स्टडी, फ्री हैंड ड्राइंग, एलिमेंट्स ऑफ डिजाइन, सरफेस डिजाइन, इंट्रोडक्शन टू जेमोलॉजी, मेटल एंड बिहेवियर, हिस्ट्री ऑफ इंडियन ज्वेलरी, डिजाइन प्रोसेस, क्रिएटिव ज्वेलरी, इलस्ट्रेशन एंड रेंडरिंग, जेम आइडेंटिफिकेशन टूल्स आदि का विधिवत अध्ययन कराया जाता है। इस आधार पर इस क्षेत्र को स्नातक, डिप्लोमा एवं सर्टिफिकेट कोर्सो में बांटा जा सकता है। इसके अधिकांश पाठ्यक्रमों में दाखिला साक्षात्कार अथवा मेरिट के आधार पर मिलता है।
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