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पीहू-पीहू करके बोले पपीहा
मुनीष कुमार
First Published:05-06-12 11:56 AM
पपीहा एक ऐसा पक्षी है, जिसकी आवाज बहुत सुरीली और बारीक होती है। कुछ लोगों का तो यह भी मानना है कि यह कोयल से भी सुरीला और मीठा गाता है। यह हरे-भरे क्षेत्र या घने जंगलों में पाया जाता है, लेकिन तुम इसे आसानी से नहीं देख पाते, क्योंकि बहुत कम ऐसा होता है कि यह नीचे जमीन पर उतरता है। यह अपना सारा समय पेड़ पर ही गुजारता है।
पपीहा देखने में कबूतर जैसा लगता है। इसकी आंखें पीले रंग की होती हैं और शरीर का ऊपरी हिस्सा हल्के भूरे रंग का होता है। इसकी चोंच और इसके पैर पीले रंग के होते हैं, जिसमें थोड़ा हरा रंग लिए हल्के-हल्के धब्बे होते हैं। इसकी लम्बाई 15 से 19 इंच तक की हो सकती है। नर और मादा में बहुत कम अंतर होता है। देखने में दोनों एक जैसे ही होते हैं। खाने में इसे कीड़े-मकोड़े ज्यादा पसंद हैं। यह बसंत और बारिश के दिनों में आम के पेड़ पर बैठकर पीहू-पीहू की आवाज निकालता है। ये पूरे देश में पाया जाता है। अलग-अलग जगहों पर अलग-अलग तरह के पपीहे देखे जाते हैं। ऐसा माना जाता है कि इस पक्षी की खास बात यह है कि ये केवल बारिश का ही पानी पीता है। सर्दी इसे बिल्कुल पसंद नहीं है और इन दिनों में ये दक्षिण की ओर चला जाता है, जहां सर्दी कम पड़ती है। इसके अंडों का रंग भी कोयल के अंडों की तरह नीला होता है। ये अप्रैल से जून के महीने के बीच अंडे देते हैं। पपीहे की एक जाति ऐसी है, जो आम पपीहों से कुछ अलग है। इसे चातक कहते हैं। कद में ये बाकी पपीहों की ही तरह होते हैं। बस इनके सिर पर बुलबुल की तरह एक कलगी सी होती है।
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