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संभलिए.. कहीं जहर न बन जाए निवाला
आरती मिश्रा First Published:11-04-12 12:36 PM
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साल का यह समय ऐसा है, जब तमाम लोग आपको यह सलाह देंगे कि गर्मी शुरू होने के इस मौसम आप क्या खाएं, क्या पीएं। लेकिन यही समय आपको बीमार करने के लिए भी काफी है। खासकर फूड पॉयजनिंग। लापरवाही आपको अस्पताल में भर्ती तक करवा सकती है। क्या है फूड पॉयजनिंग और कैसे बच सकते हैं इससे, बता रही हैं आरती मिश्रा

तीन दिन पहले दिल्ली से सटे ग्रेटर नोएडा के जेवर में 150 से अधिक लोग फूड पॉयजनिंग की चपेट आ गए। उन्हें अस्पताल में भर्ती कराया गया है। पीड़ितों में बच्चे, महिलाएं और बुजुर्ग भी शामिल हैं। सभी ने पास के एक गांव चिरौली में ‘तेरहवीं’ के अवसर पर एक परिवार द्वारा आयोजित, सामूहिक भोजन किया था। जिसके बाद सभी को उल्टी, सर दर्द और पेट दर्द की समस्या हुई। इस तरह की खबरें आपको इस बात को लेकर सतर्क करने के लिए काफी हैं कि कटे-सड़े फलों, कीड़े वाली सब्जियों, खुले में रखे भोजन, ढाबे-सड़कों के खाने और साफ-सफाई का ध्यान न रखना कितना महंगा साबित हो सकता है।

गर्मियों के मौसम में आप मौसमी फलों, कोल्डड्रिंक्स, जूस, शेक्स और बाहर के चटपटे भोजन में ऐसे उलझ जाते हैं कि यह नहीं समझते कि किस तरह का खाना खा रहे हैं। उसे किन हाथों ने, किस तरह के पानी में और कब बनाया है। हमारा मतलब है साफ-सफाई, साफ पानी और ताजापन उसमें है या नहीं। बस यही आपको बीमार करने के लिए काफी होता है। रिजल्ट होता है पेट दर्द, ऐंठन, उल्टियां यानी संक्रमण। यह संक्रमण ही फूड पॉयजनिंग की नींव है, जो जानलेवा भी हो सकती है।

छुट्टियों के सीजन में बाहर का खाना सबसे ज्यादा होता है। स्टेशन पर उतरकर कहीं कुछ खा लिया तो होटल में देर रात चेक इन करने के बाद खाना ऑर्डर कर दिया। होटलों में रात में जो खाना बच जाता है, अक्सर  उसे अगले दिन काम में लाया जाता है। उस खाने में कभी-कभी दोबारा तड़का लगाकर फ्रेश कर देते हैं। ऐसा ही हाल घर के कुक भी करते हैं। बची सब्जियों को मिलाकर एक पकवान बनाने में वे पीछे नहीं रहते। ऑफिस या स्कूल की कैंटीन का खाना, शादी-बर्थडे पार्टी जैसे समारोहों की दावतें, घर में अशुद्ध पानी की सप्लाई, साफ-सफाई के प्रति कोताही, यह सब आपको फूड पॉयजनिंग की जद में ले जा सकते हैं। ऊपर से गर्म मौसम की मार और खतरनाक साबित होती है। आपको इस बात के प्रति बेहद सावधान हो जाना चाहिए कि जो भी खाया जाए उसे सफाई से बनाया गया हो। चाहे वह आईसक्रीम हो, ठंडक का एहसास देने वाला शेक या फिर जूस हों। इन्हें लेते हुए कंपनी का लोगो और एक्सपायरी डेट चैक करना न भूलें।

फूड पॉयजनिंग में सड़े फलों का भी कम योगदान नहीं है। काटकर लंबे समय तक रखे गए फल और सड़े फल का एक हिस्सा खाने से भी आप पेट में संक्रमण के शिकार बन सकते हैं। फूलगोभी, बैंगन, बंदगोभी, मटर जैसी इस सीजन की सब्जियों में पाए जाने वाले कीड़े बीमार कर देते हैं। इस मर्ज की शुरुआत होती है डि-हाइड्रेशन से। सबसे पहले शरीर से पानी कम होने लगता है। त्वचा काफी ज्यादा रूखी और खिंचावयुक्त होने लगती है। डॉक्टर आपके खून, स्टूल, उल्टी की जांच करते हैं और पेट को दुरुस्त करने में लग जाते हैं।

भगवान महावीर अस्पताल, पीतमपुरा के वरिष्ठ डॉक्टर महेश गर्ग बताते हैं, ‘हर साल, इसी समय फूड पॉयजनिंग के केस आने शुरू हो जाते हैं। जो गर्मियां बढ़ने के साथ-साथ बढ़ते हैं। इसका मुख्य कारण है बिना साफ-सफाई के भोजन पकाना, हाथों को धोने पर ध्यान न देना आदि। ऐसी परिस्थितियों में बैक्टीरिया काफी तेजी से पनपते हैं। इसके अलावा फूड पॉयजनिंग मशरूम में उपस्थित टॉक्सिंस, कच्चे भोजन, लंबे समय तक खुले में रखे हुए भोजन से भी हो सकता है। कई केसों में फूड पॉयजनिंग ज्यादा खतरनाक नहीं होता। अस्पताल आने वाले लोगों में से ज्यादातर तो केवल डायरिया, पेट दर्द, उल्टी की शिकायत वाले होते हैं। लेकिन बच्चों में यह समस्या जटिल रूप धारण कर सकती है। इसका कारण है डि-हाइड्रेशन। इस बीमारी के लक्षण खराब भोजन करने के 36 से 48 घंटे बाद नजर आने लगते हैं। इनमें स्टूल के साथ खून आना और बुखार, गंभीर बीमारी की आहट देते लक्षण होते हैं।’

कितनी तरह की फूड पॉयजनिंग
यह मुख्य रूप से दो तरह की होती है- बैक्टीरियल और नॉन बैक्टीरियल। जैसा कि नाम से ही पता चलता है बैक्टीरियल वह होती है जो ऐसे भोजन से होती है जिसमें जीवित बैक्टीरिया या अन्य टॉक्सिंस हो। वहीं नॉन बैक्टीरियल वह होती है जो कुछ केमिकल से होता है।

कब होती है फूड पॉयजनिंग
फूड पॉयजनिंग ऐसे भोजन या पानी से हो सकती जो खास तरह के बैक्टीरिया, वायरस या टॉक्टिंस युक्त होते हैं। सबसे अधिक मीट, चिकन, अंडे, दूध से इन्फेशन होता है। इनके अलावा और भी कई कारण हो सकते हैं।

डेयरी उत्पादों या ऐसे भोजन से, जो फ्रिज से काफी देर पहले निकालकर रख दिए जाएं।
ठीक तरह से हाथ न धोकर भोजन पकाने पर।
फलों और सब्जियों का प्रयोग करने से पहले उन्हें न धोने पर।
बाजार के खराब जूस या फलों से।
चिकन और मछली को लाने के बाद तुरंत फ्रिज में रख देने और बाद में इस्तेमाल करने से।

सावधानी भली..
ऐसी जगह पर भोजन करें जो साफ-सुथरी हो। अगर बाहर भोजन कर रहे हैं तो पूछ लें कि वह पानी कहां से आया है जो आपको सर्व किया जा रहा है। मिनरल वॉटर लें।
खाने से पहले हाथ अवश्य धो लें। बच्चों को यह आदत डालें। उनका ध्यान ज्यादा रखने की आवश्यकता है।
गर्म और ताजा पकाया गया खाना सर्वोत्तम होता है, बजाय कि ठंडा या काफी देर से बने खाने के।
खाने से पहले फलों और सब्जियों को भली प्रकार से धो लें। अगर आपने घर में कुक रखा है तो इस बात को निश्चित कर लें कि वह खाना पकाने से पहले हाथों को साफ करे।
पानी को उबालकर पीएं।
अगर आप डायरिया या उल्टी जैसी फीलिंग महसूस कर रहे हैं तो आपको तुरंत खूब सारा पानी पीएं।
वर्ल्ड हेल्थ आर्गेनाइजेशन यानि डब्ल्यूएचओ की सलाह है इलेक्ट्राल पाउडर, जो हर दवा की दुकान पर मिल जाता है, यह डायरिया में रामबाण की तरह है। यह आसानी से पच भी जाता है और शरीर को आवश्यक तत्वों की पूर्ति करता है। जब भी आप यात्रा करें साथ में इलेक्ट्राल के पैकेट जरूर रख लें।

ये हो तो जाएं डॉक्टर के पास
बुखार
स्टूल में खून या पस आना
सुस्ती, ज्यादा नींद आना
पेट दर्द या ऐंठन
डि-हाइड्रेशन
101 से अधिक बुखार।
काला स्टूल

तो मिलेगा आराम
पेट को आराम दें—कुछ देर के लिए कुछ न खाएं।
पानी पीते रहें- नियमित अंतराल पर पानी पीते रहें। इलेक्ट्राल डालकर पीएं। चाहें तो बर्फ के टुकड़े मुहं में डालकर रखें।
जल्दी पचने वाले भोजन करें- आप चावल, केला आदि ही लें, जो जल्दी पचने वाला हो। नमकीन दलिया भी कारगर है।
आराम करें- डि-हाइड्रेशन और कमजोरी से राहत के लिए खूब आराम करें।
परहेज रखें- चाय, कॉफी, शराब, सिगरेट, डेयरी उत्पादों से परहेज बनाए रखें।

ऐसा किसी पर न बीते
9 अप्रैल 2012
ग्रेटर नोएडा के जेवर में 150 लोग तेरहवीं का भोज खाने के बाद बीमार।

3 अप्रैल 2012
जयपुर में 150 लोग फूड पॉयजनिंग से अस्पताल में भर्ती। डेयरी उत्पाद में मिलावट के कारण हुए बीमार।

11 मार्च 2012
वाराणसी में दो बच्चों की फूड पॉयजनिंग से मौत व 30 अस्पताल में भर्ती। बाहरी भोजन करने से आई आफत।

21 फरवरी 2012
छत्तीसगढ़ में फूड पॉयजनिंग की वजह से 70 लोग अस्पताल में भर्ती।

17 फरवरी 2012
100 लोग दिल्ली में पीड़ित। सभी को राव तुला राम अस्पताल में भर्ती कराया गया। सभी एक शादी में भोजन के बाद बीमार।

6 दिसंबर 2011
गुजरात के गांव वेकारिया, विरमगम तालुका के सभी 300 लोग फूड पॉयजनिंग के कारण अस्पताल में। समारोह में किया था सामूहिक भोजन।

7 नवंबर 2011
पश्चिमी दिल्ली में मिड-डे मील में पाई गई छिपकली। 44 बच्चे अस्पताल में भर्ती।

 
 
 
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