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सेकेंड हैंड कार खरीदने से पहले!
पंकज घिल्डियाल
First Published:04-01-13 12:25 PM
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आज मार्केट में कारों के इतने मॉडल आ गए हैं कि लोगों को साल दो साल में ही अपनी गाड़ी पुरानी लगती है। यही वजह है कि सेकेंड हैंड कार कम कीमत में बाजार में उपलब्ध होने लगी हैं। सेकेंड हैंड कार जहां जेब पर भारी नहीं पड़ती, वहीं कभी-कभी छोटी सी चूक भी काफी महंगी पड़ सकती है। सेकेंड हैंड कार खरीदते वक्त किन बातों का रखें ख्याल बता रहे हैं पंकज घिल्डियाल

कार सेगमेंट
सेकेंड हैंड कार खरीदारी से पहले कुछ कंपनियों की सूची बना सकते हैं। जिस कंपनी की साख व गुणवत्ता पर शक हो, उसे सूची से निकाल देना ही बेहतर है। सेकेंड हैंड कार बाजार में सिडान, हैचबैक, एसयूवी, एमयूवी सभी मौजूद होती हैं। तो सबसे पहले आप यह तय करें कि आप किस बॉडी टाइप की कार खरीदना चाहते हैं? कार के मॉडल को चुनने के बाद आपको अपने जेब पर गौर करना दूसरा चरण है। बाजार में जो भी मॉडल आप खरीदना चाहतें हैं, वे कई रेंज में उपलब्ध होते हैं।

रिसर्च
कार के मॉडल को चुनने के बाद अपने बजट को तय कर मॉडल को तय करने के बाद उस पर रिसर्च जरूर करें। तय किये गये मॉडल के बारे में ज्यादा से ज्यादा जानकारियां इकट्ठा करें। उस कार के बारे में मैग्जीन, वेबसाइट के साथ-साथ जिनके पास वे कारें हैं, उनसे मिलकर कार के बारे में जानकारियां हासिल करें। इसके अलावा यदि समय हो तो कार के रिव्यू आदि को पढ़ें। कोशिश करें कि जब आप अपने मॉडल को तय करें तो एक और कार का विकल्प साथ लेकर चलें।

मेंटेनेंस का ख्याल
ऐसी कंपनियों की कार जिसके स्पेयर पार्ट्स आसानी से नहीं मिलते हों, नहीं खरीदनी चाहिए। यह भी देख लेना चाहिए कि जिस कंपनी की कार आप ले रहे हैं, उसके सर्विस सेंटर ज्यादातर जगहों पर हैं या नहीं। 

कार दुर्घटनाग्रस्त तो नहीं
सेकंड हैंड कार खरीदने से पहले जरूरी है कि इसकी जांच—पड़ताल किसी मैकेनिक या एक्सपर्ट से करा ली जाए। यह जांच—पड़ताल दिन के उजाले में ही करनी चाहिए, ताकि जंग जैसी छोटी—मोटी चीज भी नजरों से बच नहीं सके। कार की बॉडी, पेंटिंग आदि बारीकी से देख लें। इंजन देखने के लिए दिन में भी फ्लैशलाइट का इस्तेमाल करें। इस बात की भी तसल्ली कर लें कि सभी दरवाजे, डिग्गी, हुड आदि आसानी से खुल और बंद हो रहे हैं। लाइट भी अच्छी तरह चेक कर लेना चाहिए, क्योंकि अगर लाइट के शीशे टूटे हों या रिफ्लेक्टर डैमेज हो तो आपको इसे बदलवाने में अच्छी—खासी रकम खर्च करनी पड़ सकती है। कार की बॉडी लाइन, फ्लोरिंग, जंग, ऑयल लीकेज, टायर की हालत, डोर बॉर्डर और डिग्गी बॉर्डर वगैरह की भी जांच कर लेनी चाहिए। सस्पेंशन की हालत, व्हील अलाइनमेंट और इंजन की आवाज भी चेक कर लेनी चाहिए।

सर्विस हिस्ट्री
टायर और रिम भी चेक कर लें। रिम अगर डैमेज है तो इसका मतलब गाड़ी सही ढंग से नहीं चलाई गई है। कार के अंदर भी जांच—पड़ताल करने की जरूरत है। यूजर मैनुअल देखकर यह भी पता कर लें कि कार की सर्विसिंग और मेंटेनेंस कब—कब हुई है और यह भी कि कभी कोई बड़ी खराबी तो नहीं रही है। सर्विस हिस्ट्री से यह भी पता चल जाएगा कि इंजन ऑयल सही समय पर बदलवाया जा रहा है या नहीं। कार की हुड खोलकर यह भी चेक कर लें कि किसी तरह का लीकेज तो नहीं है। 

आर सी की जांच
बोनट केनीचे गाड़ी की मैन्युफैक्चर डेट लिखी होती है, इसे भी देख लें। साथ ही रजिस्ट्रेशन कम टैक्स सर्टिफिकेट (आरसीटीसी) पर लिखी मैन्युफैक्चर डेट से इसका मिलान भी कर लें।

टेस्ट ड्राइव
गाड़ी चलाकर पिकअप, गियर शिफ्टिंग, एक्सिलेरेटर आदि से जुड़ी समस्याओं का पता लगाया जा सकता है। पुरानी कार खरीदते वक्त इस बात पर जरूर ध्यान दें कि आप जो कार खरीदने जा रहे हैं, वह कितनी किलोमीटर चल चुकी है। इससे कार की हालत का बहुत कुछ अंदाज लग जाता है। अक्सर कार मालिक कार को बेचने से पहले मैकेनिक की मदद से स्पीडोमीटर की रीडिंग कम करा देते हैं, जिससे ऐसा लगता है कि कार तो कम ही चली है। इसलिए सेकेंड हैंड कार खरीदने से पहले उसकी जांच—पड़ताल करना जरूरी है।

चुनें सही डीलर
सबसे पहले कार के दो—तीन डीलरों के स्टोर्स पर एक बार जरूर जायें और उनसे कार के मॉडल, कीमत, और उनके द्वारा की जाने वाली कागजी कार्रवाइयों के बारे में पूरी जानकारी हासिल करें। इसके अलावा आस—पास के लोगों से उस डीलर के पूर्व के डीलरों के बारे में अवश्य जानकारी हासिल करें। कार डीलर्स के अलावा कुछ लोग अपने वाहनों को खुद ही बेचना चाहते हैं। इसके लिए वो न्यूज पेपर, वर्गीकरण वेबसाइट आदि का भी सहारा लेतें है। सीधे कार मालिक से कार खरीदने पर एक फायदा आपको यह होता है कि डीलर का कमीशन बच जाता है।

रजिस्ट्रेशन राज्य
सेकेंड हैंड कार के डॉक्यूमेंट अतिमहत्वपूर्ण होते हैं। इसलिए पेमेंट करने से पहले तमाम दस्तावेज अपने पास ले लें। यह सुनिश्चित कर लें कि आप जो कार खरीद रहे हैं उसके पहले खरीदार ने आरटीओ टैक्स, जो हर नई कार खरीदने वाले को देना होता है और यह एक ही बार देना होता है, चुका दिया है। रजिस्ट्रेशन से संबंधित कागजात की भी जांच कर लें। यह देख लें कि रजिस्ट्रेशन पेपर में उसी राज्य का नाम दर्ज है या नहीं, जिस राज्य में आपको कार चलानी है। अगर नहीं, तो रजिस्ट्रेशन उस राज्य में ट्रांसफर कराना होगा। यह एक लंबी प्रक्रिया है और इसमें पैसे भी खर्च होते हैं। इसलिए इस बारे में पूरी तरह निश्चिंत होकर ही सेकेंड हैंड कार खरीदें।

इंश्योरेंस
कार का इंश्योरेंस जरूरी है। आप यह देख लें कि जो कार आपको बेची जा रही है, उसका इंश्योरेंस कराया गया है या नहीं और प्रीमियम सही समय पर भरा गया है या नहीं। इंश्योरेंस पेपर आपके नाम से ट्रांसफर हो जाए, यह भी सुनिश्चित करा लें। यह भी देख लें कि कार बेचने की तारीख तक उस कार के मालिक की ओर से रोड टैक्स चुका दिया गया है या नहीं। आप कार की ओरिजिनल इनवॉयस की भी मांग करें।

नो ऑब्जेक्शन सर्टिफिकेट
आप जिस व्यक्ति से कार खरीद रहे हैं, उसने अगर बैंक से लोन लेकर कार खरीदी थी, तो आप उससे ‘नो ऑब्जेक्शन सर्टिफिकेट’ की मांग करें। इस सर्टिफिकेट की ओरिजनल कॉपी देख लें और एक फोटो कॉपी अपने पास रख लें। यह सर्टिफिकेट इस बात का सबूत है कि कार खरीदने के लिए दी गई सारी रकम फाइनेंस कंपनी को वापस कर दी गई है। आपको फॉर्म 35 की एक कॉपी (जिस पर फाइनेंस कंपनी के सक्षम अफसरों के दस्तखत हों) भी जरूर रखनी चाहिए।

कारों की ऑनलाइन खरीद
बिक्री से जुड़ी एक वेबसाइट ने अपनी रिपोर्ट में यह दावा करते हए कहा है कि हैचबैक श्रेणी की पुरानी कार तीन लाख रुपये तक खरीदी जा सकती है। अगर सेडान श्रेणी की बात करें तो यह आंकड़ा कार के निर्माण वर्ष के आधार पर चार से नौ लाख रुपये तक पहुंच जाता है।

नयी कारों की तरह पुरानी कारों के बाजार में भी मारुति, हुंडई और होंडा की कारें ग्राहकों की पसंद बनी हुई हैं। हैचबैक श्रेणी में मारुति की स्विफ्ट और आल्टो तथा हुंडई की सेंट्रो ग्राहकों के बीच अधिक लोकप्रिय हैं।
उधर सेडान वर्ग में हुंडई की एक्सेंट और वर्ना तथा होंडा की सिटी की अधिक मांग है। खास बात ये है कि सेकेंड हैंड कार मार्केट में भी ऑर्गेनाइज्ड सेक्टर का दबदबा है। इसकी नंबर वन कंपनी महिंद्रा फर्स्ट च्वॉइस ने भी पिछले साल करीब 34000 पुरानी कार बेची थीं। इस साल कंपनी को 46000 से ज्यादा पुरानी कारें बिकने की उम्मीद है। फिलहाल कंपनी के देश भर में 200 आउटलेट हैं। और 2015 तक कंपनी पुरानी कारों के आउटलेट की संख्या 500 तक करना चाहती है।

 
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