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अनोखी फिल्मों का रंगीला रणबीर
असीम सी
First Published:21-07-12 12:45 PM
रणबीर कपूर किसी बंधे-बंधाए फॉर्मूले में विश्वास नहीं करते। फिलहाल बतौर एक्टर अपने आपको बेहतर करना ही उनका एकमात्र लक्ष्य है। और इस लक्ष्य की प्राप्ति के लिए उन्होंने अपने परिवार के तीन दिग्गज राज कपूर, शम्मी कपूर और शशि कपूर को अपनी प्रेरणा बनाया है। रणबीर ने फिल्म सांवरिया की विफलता को लगभग नजरअंदाज करते हुए अपनी फिल्मों के चयन पर विशेष ध्यान देना शुरू कर दिया।
रणबीर कपूर ने जब फिल्म इंडस्ट्री में कदम रखा था तो उस समय एक तरह से उनके लिए स्टारडम का मैदान खुला हुआ था। चूंकि फिल्म उद्योग में जो चोटी के सितारे थे, वे एक उम्र पार कर चुके थे, इसलिए युवा नायकों के प्रस्ताव उन्हें मिलने लगे। तब इस दौर में उनके मुख्य प्रतिद्वंद्वी थे शाहिद कपूर, इमरान खान जैसे हीरो। मगर दो साल में ही सारा गणित बदल गया। आज आलम यह है कि तीन खान, अक्षय, अजय और हृतिक के बाद सुपर स्टार के तौर पर उनका ही नाम लिया जा रहा है। ऊट-पटांग फिल्मों से शाहिद कपूर जहां काफी पीछे खिसकते जा रहे हैं, वहीं विभिन्न किरदारों को लेकर अभिनेता इमरान खान का दायरा अभी तक काफी सिमटा हुआ सा लगता है। अब तक रिलीज उनकी आठ फिल्मों में से सिर्फ राजनीति, रॉकस्टार और अजब प्रेम की गजब कहानी ही बड़ी सफल थीं। वरना सांवरिया, बचना ए हसीनों, वेक अप सिड, राकेट सिंह: सेल्समैन ऑफ दि ईयर, अनजाना-अनजानी जैसी उनकी ज्यादातर फिल्मों ने उन्हें टिकट खिड़की पर कुछ खास संबल नहीं दिया है। पर इनमें से ज्यादातर फिल्मों में ही उनकी अभिनय प्रतिभा में लगातार निखार आ रहा है। और आज इसी वजह से उन्हें अगला सुपरस्टार कहा जा रहा है। इन दिनों फिल्मों में उनके काम करने की शैली इसे और पुख्ता कर रही है। अनुराग बसु और अनुराग कश्यप सहित हर उम्दा निर्देशक की उन्हीं पर नजर है। वह बड़े आराम से अपनी फिल्मों का चयन कर रहे हैं। कुछ माह पहले अपने एक साक्षात्कार में रणबीर कपूर ने कहा था कि उन्होंने 25 अच्छे निर्देशकों की एक सूची बना रखी है, जिनके साथ काम करके वह बहुत कुछ सीखना चाहते हैं, ताकि भविष्य में वह जब निर्देशन के मैदान में उतरें तो यह अनुभव उनके काम आये। उनकी इस संजीदगी और कार्यशैली पर कई निर्देशक मुग्ध हैं।
वैसे एक ताजा बातचीत के दौरान रणबीर कपूर स्टारडम की किसी भी बात को सिरे से खारिज करते हैं। उनका दो टूक जवाब होता है कि फिलहाल बतौर अभिनेता अपने आपको साबित करना ही उनका एकमात्र लक्ष्य है। और इस लक्ष्य की प्राप्ति के लिए उन्होंने अपने परिवार के तीन दिग्गज राज कपूर, शम्मी कपूर और शशि कपूर को अपनी प्रेरणा बनाया है। कभी एक टॉक शो में उनके चाचा राजीव कपूर से यह पूछने पर कि कपूर परिवार का सबसे अच्छा नर्तक कौन है, राजीव ने ऋषि का नाम लिया था। तब ऋषि कपूर ने उनकी गलती सुधारी थी- तुम शम्मी अंकल को कैसे भूल गये। उनके रहते मैं कैसे अच्छा नर्तक हो गया। देखा जाये तो रणबीर ने इस मामले में उन्हें ही फॉलो किया है। केबीसी की एक कड़ी में शम्मी कपूर के एक हिट गाने चांद सा रौशन चेहरा.. पर उनका झूमना शम्मी जी के पुराने अंदाज की याद दिला देता है। रणबीर के अभिनय में भी कई बार यह मजाकिया अंदाज साफ देखने को मिलता है। इसी के साथ ही राज कपूर की गंभीर अदाकरी और शशि कपूर की छवि को उन्होंने बहुत अच्छी तरह से आत्मसात किया है। शायद इसी वजह से अपनी हीरोइनों के बीच वह खासे लोकप्रिय बने हुए हैं। वरना ब्रेक-अप के बाद भी दीपिका उनके साथ हरगिज काम नहीं करती। अपने इसी शालीन व्यवहार की वजह से हर निर्देशक उनके साथ दोबारा काम करना चाहता है। प्रियंका के साथ तारीखों की दिक्कत के चलते जब बर्फी की शूटिंग में कुछ अड़चन आने लगी, तो उन्होंने प्रियंका से निजी तौर पर बातचीत कर सारा शूटिंग कार्यक्रम ठीक करवा लिया। उनके अभिनय के आत्मविश्वास को बढ़ाने में उनकी एड फिल्मों ने भी बड़ा अहम योगदान निभाया है। वह चाहे पेय पदार्थ का विज्ञापन हो या मोबाइल का, इनमें वह पूरी तरह से अलग खड़े दिखाई पड़ते है। पेय पदार्थ के विज्ञापन में जहां उनकी मजाकिया छवि है, तो मोबाइल के एक ताजा विज्ञापन में होटल मालिक के किरदार में उनके अभिनय की जमीन तैयार होती है।
कभी दीपिका तो कभी कैटरीना के साथ उनके ब्रेकअप की खबरें खूब सुर्खियां बनती हैं। वैसे उन जैसे सुंदर और सेलिब्रेटी युवक के जीवन में भला प्रेम का अभाव कैसे हो सकता है। दीपिका से ब्रेक-अप होते ही कैटरीना से उनकी दोस्ती मशहूर होने लगती है। और वह दोस्ती टूटने के तत्काल बाद ही रणबीर का एक नया किस्सा शुरू हो जाता है। ऐसे में साफ है कि अभिनय के अलग रास्ते पर दौड़ते हुए रणबीर लगातार अपनी कैसेनोवा छवि को भी सार्थक कर रहे हैं। उनकी प्रेमिकाओं की सूची जिस तरह से लंबी हो रही है, उसे देखकर ताज्जुब होना लाजिमी है। यह कहानी काफी हद तक सोनम कपूर से शुरू होती है। इन दोनों की शुरुआती फिल्म है सांवरिया। लेकिन बात और आगे बढ़ती इससे पहले ही इसमें दीपिका पादुकोण आ गयीं। बस, रणबीर सोनम को भूलकर दीपिका को लेकर व्यस्त हो गये। ऐसे में सोनम ने दीपिका से ही नहीं रणबीर से भी बातचीत बंद कर दी थी। पर कुछ दिनों तक यह रिश्ता चलने के बाद इस रिश्ते पर भी पूर्ण विराम लग गया। जाहिर है पहले की तरह यह रिश्ता भी उनके करियर को प्रभावित नहीं करेगा।
क्या कहते हैं निर्देशक
प्रकाश झा
वह उन चंद एक्टरों में से एक है, जो निरंतर कुछ सीखते हैं। राजनीति में उसके साथ मेरे काम करने का अनुभव बहुत अच्छा रहा। कोई उसके उपयुक्त रोल हुआ, तो जरूर उसे याद करूंगा। संजय लीला भंसाली
वह देर-सबेर निर्देशक जरूर बनेगा। वह ब्लैक, सांवरिया में बतौर सहायक मेरे साथ काम कर चुका है। फिलहाल उसकी खासियत यह है कि वह अपनी निर्देशकीय समझ को अपनी एक्टिंग में बहुत अच्छी तरह से इस्तेमाल कर रहा है। अनुराग बसु
अभी बर्फी के बारे में ज्यादा कुछ कहना ठीक नहीं होगा। मगर जिस समर्पण भाव से उसने यह फिल्म पूरी की है, उसका नतीजा अच्छा ही आयेगा। अभी तो रणबीर का खेल शुरू हुआ है। आगे-आगे देखिए होता है क्या? अयान मुखर्जी
वेक-अप सिड की शूटिंग के दौरान ही मैंने ये जवानी है दीवानी की पटकथा रणबीर को सुनायी थी। उसे पटकथा पसंद आयी तो मैंने उसे अंतिम रूप देना शुरू कर दिया। वह एकदम सही वक्त में यह फिल्म कर रहा है। निश्चित तौर पर इस दौरान उसके अभिनय में काफी परिपक्वता आयी है। वह मेरा बहुत अच्छा दोस्त है, इसलिए मैं उसकी ज्यादा तरीफ नहीं करूंगा। इम्तियाज अली
रॉकस्टार के बाद मैं उसके साथ एक और फिल्म करना चाहता हूं। उसे ध्यान में रख कर कहानी लिखना अब एक बड़ी चुनौती है, क्योंकि बहुत जल्द वह एक उम्दा अभिनेता के तौर पर सामने आया है। उसे किसी कमजोर रोल में जाया नहीं किया सकता।
वह उन चंद एक्टरों में से एक है, जो निरंतर कुछ सीखते हैं। राजनीति में उसके साथ मेरे काम करने का अनुभव बहुत अच्छा रहा। कोई उसके उपयुक्त रोल हुआ, तो जरूर उसे याद करूंगा। संजय लीला भंसाली
वह देर-सबेर निर्देशक जरूर बनेगा। वह ब्लैक, सांवरिया में बतौर सहायक मेरे साथ काम कर चुका है। फिलहाल उसकी खासियत यह है कि वह अपनी निर्देशकीय समझ को अपनी एक्टिंग में बहुत अच्छी तरह से इस्तेमाल कर रहा है। अनुराग बसु
अभी बर्फी के बारे में ज्यादा कुछ कहना ठीक नहीं होगा। मगर जिस समर्पण भाव से उसने यह फिल्म पूरी की है, उसका नतीजा अच्छा ही आयेगा। अभी तो रणबीर का खेल शुरू हुआ है। आगे-आगे देखिए होता है क्या? अयान मुखर्जी
वेक-अप सिड की शूटिंग के दौरान ही मैंने ये जवानी है दीवानी की पटकथा रणबीर को सुनायी थी। उसे पटकथा पसंद आयी तो मैंने उसे अंतिम रूप देना शुरू कर दिया। वह एकदम सही वक्त में यह फिल्म कर रहा है। निश्चित तौर पर इस दौरान उसके अभिनय में काफी परिपक्वता आयी है। वह मेरा बहुत अच्छा दोस्त है, इसलिए मैं उसकी ज्यादा तरीफ नहीं करूंगा। इम्तियाज अली
रॉकस्टार के बाद मैं उसके साथ एक और फिल्म करना चाहता हूं। उसे ध्यान में रख कर कहानी लिखना अब एक बड़ी चुनौती है, क्योंकि बहुत जल्द वह एक उम्दा अभिनेता के तौर पर सामने आया है। उसे किसी कमजोर रोल में जाया नहीं किया सकता।
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