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समेट लो सारी बूंदें..
मृदुला भारद्वाज
First Published:18-06-12 11:21 AM
बारिश के मौसम का इंतजार हर किसी को होता है। तुम्हें भी होगा ही। रिमझिम फुहारों में भीगना, पानी में छप-छप करना और नाव तैराने में कितना मजा आता है न। जल्दी ही खूब सारी बारिश वाला मौसम आने वाला है। तो चलो मृदुला भारद्वाज से जानते हैं बारिश के बारे में कई नई बातें
बारिश के मौसम की बात ही अलग होती है, क्योंकि इस मौसम में हर वस्तु खिल उठती है। हमारे देश में इस मौसम को खुशी का मौसम माना जाता है। समुद्र, झील, तालाब और नदियों का पानी, सूरज की गर्मी से भाप बनकर ऊपर उठता है। इस वाष्प से बादल बनते हैं। ये बादल जब ठंडी हवा से टकराते हैं तो इनमें रहने वाले वाष्प के कण पानी की बूंद बन जाते हैं। बूंदों वाले बादल भारी होकर धरती के पास आ जाते हैं। बूंदें धरती की आकर्षण शक्ति से खिंचकर बारिश के रूप में बरस जाती हैं।
रेन हार्वेस्टिंग
बारिश के पानी को एक खास जगह इकट्ठा करने को वर्षा जल संचयन यानी रेन हार्वेस्टिंग कहा जाता है। इस पानी का इस्तेमाल कई जगह होता है। तुम भी अपने घर की छत या बरामदे में गिर रहे बारिश के पानी को इकट्ठा कर सकते हो, फिर उसे इस्तेमाल में ला सकते हो। वैसे भी वर्षा का जल साफ और शुद्ध होता है और इसीलिए इसे शुद्ध जल का सबसे अच्छा स्रोत माना जाता है। वर्षा के जल को पुराने समय से एकत्रित किया जाता रहा है। हमारे पूर्वज फसलों की सिंचाई के लिए बारिश के पानी को इकट्ठा किया करते थे। अगर तुम भी ऐसा करना चाहते हो तो छत पर कोई टंकी या बड़ा बर्तन रखकर इस जल को इकट्ठा करो। रेन हार्वेस्टिंग दो तरह की होती है- पहली, जिसमें घर की छत पर ही बारिश के पानी को घर के इस्तेमाल के लिए इकट्ठा किया जाता है और दूसरी, जिसमें फसल की सिंचाई के लिए खेत या आसपास के स्थान पर पानी रोका जाता है। कहां होती है सबसे ज्यादा बारिश
मेघालय में स्थित चेरापूंजी और मासिनराम में सबसे ज्यादा बारिश होती है। चेरापूंजी में 1012 से.मी़ और मासिनराम में 1221 से.मी़ बारिश होती है। बारिश में यहां ऊंचाई से गिरते पानी के फव्वारे, कुहासे जैसे बादलों को इतने करीब से देखने का मजा ही अलग होता है।
बारिश के पानी को एक खास जगह इकट्ठा करने को वर्षा जल संचयन यानी रेन हार्वेस्टिंग कहा जाता है। इस पानी का इस्तेमाल कई जगह होता है। तुम भी अपने घर की छत या बरामदे में गिर रहे बारिश के पानी को इकट्ठा कर सकते हो, फिर उसे इस्तेमाल में ला सकते हो। वैसे भी वर्षा का जल साफ और शुद्ध होता है और इसीलिए इसे शुद्ध जल का सबसे अच्छा स्रोत माना जाता है। वर्षा के जल को पुराने समय से एकत्रित किया जाता रहा है। हमारे पूर्वज फसलों की सिंचाई के लिए बारिश के पानी को इकट्ठा किया करते थे। अगर तुम भी ऐसा करना चाहते हो तो छत पर कोई टंकी या बड़ा बर्तन रखकर इस जल को इकट्ठा करो। रेन हार्वेस्टिंग दो तरह की होती है- पहली, जिसमें घर की छत पर ही बारिश के पानी को घर के इस्तेमाल के लिए इकट्ठा किया जाता है और दूसरी, जिसमें फसल की सिंचाई के लिए खेत या आसपास के स्थान पर पानी रोका जाता है। कहां होती है सबसे ज्यादा बारिश
मेघालय में स्थित चेरापूंजी और मासिनराम में सबसे ज्यादा बारिश होती है। चेरापूंजी में 1012 से.मी़ और मासिनराम में 1221 से.मी़ बारिश होती है। बारिश में यहां ऊंचाई से गिरते पानी के फव्वारे, कुहासे जैसे बादलों को इतने करीब से देखने का मजा ही अलग होता है।
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