शनिवार, 25 अक्टूबर, 2014 | 06:55 | IST
  RSS |    Site Image Loading Image Loading
ऑटोनोमिक कंप्यूटिंग: अपने ही निर्देशों से चलने वाला कंप्यूटर
संजीव कुमार First Published:11-12-12 12:56 PM
Image Loading

कंप्यूटर के क्षेत्र में ऑटोनोमिक कंप्यूटिंग एक क्रांतिकारी प्रक्रिया है। यह प्रक्रिया यूजर के इनपुट की मोहताज नहीं होती, बल्कि पूर्व में निर्धारित निर्देशों के आधार पर ही अपने कार्यों को अंजाम देती है। यह प्रणाली एक तरह से मनुष्य के ऑटोनोमिक नर्वस सिस्टम की तरह ही काम करती है।

कंप्यूटर की दुनिया में लगभग हर रोज नए प्रयोग हो रहे हैं, जिसके अच्छे परिणाम सामने आ रहे हैं। कंप्यूटर के क्षेत्र में ऑटोनोमिक कंप्यूटिंग भी एक नई हलचल है, जिस पर काम जारी है और बहुत हद तक इसमें सफलता भी मिली है।

आइए आज बात करते हैं ऑटोनोमिक कंप्यूटिंग पर।

ऑटोनोमिक कंप्यूटिंग, कंप्यूटिंग का एक ऐसा मॉडल है, जो सेल्फ मैनेजिंग होता है। जैसा कि इसके नाम से ही स्पष्ट होता है, ऑटोनोमिक कंप्यूटिंग कम्प्यूटर एप्लीकेशंस और सिस्टम की कार्यप्रणाली को स्वयं मैनेज करने में सक्षम होता है। इसके लिए यूजर से इनपुट की जरूरत नहीं पड़ती। आमतौर पर कंप्यूटर सिस्टम अपना कार्य यूजर के इंस्ट्रक्शन और इनपुट के आधार पर ही करता है, लेकिन कंप्यूटिंग का यह मॉडल अपने कार्य को अंजाम देने के लिए यूजर के इनपुट का मोहताज नहीं होता। इस सिस्टम का मुख्य उद्देश्य ही एक ऐसा कम्प्यूटर सिस्टम डेवलप करना है, जो अपने आप रन हो सके, साथ ही उच्च स्तर के कार्य भी करने में सक्षम हो।

ऑटोनोमिक कंप्यूटिंग सिस्टम निर्माण में मनुष्य के ऑटोनोमिक नर्वस सिस्टम के सिद्धांत का महत्त्वपूर्ण योगदान है। यह हमारी नर्वस सिस्टम की कार्यप्रणाली पर ही बहुत हद तक आधारित है। ठीक उसी तरह जैसे हमारा नर्वस सिस्टम शरीर के कई ऑर्गन को कंट्रोल करता है। इस कंप्यूटिंग मॉडल में ह्यूमन इंटरफेयर की बहुत हद तक कोई गुंजाइश नहीं होती। इसे एक प्रकार से सेल्फ मैनेज्ड कंप्यूटर सिस्टम भी कहा जा सकता है।
ऑटोनोमिक कंप्यूटिंग के डिजाइन और डेवलपमेंट के पीछे मुख्य उद्देश्य कंप्यूटर की प्रोडक्टविटी को बढ़ाना है। साथ ही साथ इसमें ऐसी व्यवस्था भी की गई है, ताकि इसकी जटिलता भी कम से कम हो। इसकी एक प्रमुख विशेषता कंप्यूटिंग सिस्टम का ऑटोमेटेड मैनेजमेंट भी है। इस प्रणाली के पूरी तरह से विकास के बाद सिस्टम मैनेजमेंट से जुड़ी बातों के लिए ह्यूमन इंटरफेयर पर आश्रित रहने की जरूरत नहीं रह जाएगी। ई-सोर्सिंग जैसी सर्विसेज के लिए संभावनाओं के द्वार बड़े पैमाने पर खुलने की उम्मीद है।

कभी-कभी ऑटोनोमिक कंप्यूटिंग को आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई) से भी जोड़ कर देखा जाता है। तकनीकी जगत में इस बात पर बहस चल रही है कि क्या ऑटोनोमिक कंप्यूटिंग आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस को रिप्लेस कर देगी। वास्तव में ऐसा संभव नहीं है। हां, इतना जरूर है कि एआई की तकनीक ऑटोनोमिक कंप्यूटिंग के डेवलपमेंट और विस्तार को एक नई दिशा जरूर दे सकती है। इस सिस्टम में एआई के आइडियाज को भी समुचित स्थान दिया जाता है।

जहां तक इस कंप्यूटिंग मॉडल के फायदे की बात है तो एक बात तो साफ तौर पर जाहिर है कि मनुष्य पर निर्भरता कम होने से कॉस्ट में कमी आएगी। साथ ही जटिल सिस्टम और प्रॉब्लम को मेंटेन और हल करने में भी काफी हद तक सफलता मिलेगी। इससे अलग सीपीयू की प्रोसेसिंग पावर का भी पूरा फायदा लिया जा सकेगा। सिस्टम की सिक्योरिटी, स्टेबिलिटी और अवेलेबिलिटी भी बढे़गी। साथ ही ऑटोमेटिक कार्यप्रणाली के कारण सिस्टम और नेटवर्क एरर में भी काफी हद तक कमी आएगी।

ऑटोनोमिक कंप्यूटिंग सिस्टम आईटी प्रोफेशनलों को भी काफी राहत पहुंचा सकता है। सिस्टम और नेटवर्क के ऑटोमेटिक होने से सिस्टम की कंफिगरेशन, मेंटेनेंस, एरर फिक्सिंग, सिक्योरिटी, अपडेशन आदि के बारे में उन्हें खास चिंतित होने की जरूरत नहीं रह जाएगी।

ऑटोनोमिक कंप्यूटिंग के क्षेत्र में विश्व की कई जानी-मानी कंपनियां जैसे आईबीएम, एचपी, माइक्रोसॉफ्ट आदि जोर-शोर से काम कर रही हैं। यूनिवर्सिटी ऑफ टेक्सास, यूनिवर्सिटी ऑफ कैलिफोर्निया, एमआईटी जैसे प्रसिद्ध शैक्षणिक संस्थान भी इस क्षेत्र में प्रयोग कर रहे हैं। काफी हद तक सफलता भी प्राप्त हुई है। आईबीएम द्वारा सेल्फ मैनेजिंग सर्वर, सेल्फ ट्यूनिंग सॉफ्टवेयर जैसे प्रोडक्ट पर काम जारी है। आईबीएम का जेड 900 ई सर्वर, जिसे इंटेलिजेंट रिसोर्स डायरेक्टर कहा जाता है, इस दिशा में एक सफल प्रयोग है, जिसमें सेल्फ मैनेजिंग ऑपरेटिंग सिस्टम लगा है।
 
 
 
टिप्पणियाँ