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खिलौनों में छुपा स्मार्टनेस का राज
पायल गिरी First Published:06-12-2012 12:38:29 PMLast Updated:00-00-0000 12:00:00 AM
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बच्चों के प्रति अपना प्यार जताने के लिए आप उन्हें खूब सारे खिलौने देते हैं। आपका ऐसा करना उन्हें अच्छा भी लगता है। पर उनके लिए उपहार खरीदते समय उनकी उम्र और सेहत का ध्यान रखें। किस उम्र में उनके लिए कौन से खिलौने उपयोगी होंगे, बता रही हैं पायल गिरी

बच्चों पर दुलार और प्यार दिखाने के लिए हम उनके जन्म से लेकर दस साल की उम्र तक उन पर खिलौनों की बौछार कर देते हैं। लेकिन खिलौने सिर्फ खेल या मनोरंजन के लिए नहीं होते। खिलौने बच्चों को बहुत कुछ सिखाते भी हैं, इसलिए इनके चुनाव में खास सावधानी बरतने की आवश्यकता होती है। यहां कुछ बातें बतायी जा रही हैं, जो खिलौने खरीदते समय आपकी दुविधा दूर करने में मदद करेंगी।

खरीदारी में रखें उम्र का ख्याल
खिलौना हमेशा बच्चे की उम्र के हिसाब से ही खरीदें। बच्चा बाद में खेल लेगा, यह सोच कर खिलौनों को जमा ना करें। जोश और खुशी में लोग ऐसे खिलौने खरीद लेते हैं, जिनकी उस वक्त जरूरत नहीं होती। बच्चा जैसे-जैसे बड़ा होता है, उसकी जरूरतें बदलती हैं। बाजार में कुछ गेम्स ऐसे हैं, जो बच्चों को उनकी उम्र के मुताबिक नई चीजें सिखाने में मदद करते हैं। दो साल के बच्चे को यदि वॉकर दिया जाए तो शायद वह उसके लिए उपयोगी साबित नहीं होगा।  

एक साल तक के बच्चों के लिए: हाथ में पकड़ने वाले खिलौने, म्यूजिक वाला मोबाइल खिलौना, सॉफ्ट टॉयज (जैसे भालू, बिल्ली, कुत्ता आदि)। बच्चों को आईना देखना पसंद होता है, इसलिए ऐसा आईना भी खरीद सकते हैं, जो जल्दी टूटे नहीं। इसके अलावा बच्चा बहुत छोटा है तो उसके पालने में लगाने के लिए विंड चाइम्स खरीद सकते हैं।

2 से 3 साल के बच्चों के लिए: बड़ी-बड़ी तस्वीरों और अक्षरों वाली किताबें, गेंद, बच्चियों के लिए किचन की सामग्री वाले खिलौने, लकड़ी और प्लास्टिक के बने हुए खांचे, जिन्हें जोड़ कर कोई आकार दिया जा सके, चलने वाले खिलौने, इलेक्ट्रॉनिक साइकिल आदि खिलौने खरीदे जा सकते हैं।

4 से 5 साल के बच्चों के लिए: पहेलियों वाले खिलौने, किताबें, चित्र बनाने वाली कॉपियां, रंग, विभिन्न आकार और अक्षर बनाने के लिए क्ले, घर बनाने वाले ब्लॉक्स, बैट बॉल इस उम्र के लिए उपयोगी हैं। बढ़ती उम्र में बच्चों को इलेक्ट्रॉनिक खिलौने पसंद आते हैं, इसलिए उन्हें ऐसे खिलौने दिए जा सकते हैं। बच्चों को रफटफ बनाना चाहते हैं तो बाजार से सीढ़ी खरीद सकते हैं। बच्चे इस पर लटक कर चढ़ना सीखते हैं।

6 से 8 साल के बच्चों के लिए: इस उम्र में आते-आते बच्चों को आउट डोर गेम्स से जोड़ना शुरू कर देना चाहिए। बच्चों को बैट बॉल, बैडमिंटन, फुटबॉल, साइकलिंग आदि सिखाया जाना चाहिए। कैरम और चेस भी ठीक रहेगा। दिमाग तेज करने के लिए कुछ वीडियो गेम भी दे सकते हैं और दूरबीन, इलेक्ट्रॉनिक कार, कहानियों की किताबें आदि भी।

9 साल से बड़े बच्चों के लिए: खेल-कूद की चीजें जैसे- रस्सी कूदने वाला खिलौना, बैट बॉल, बास्केट बॉल, बैडमिंटन, टेनिस, वीडियो गेम, बोर्ड गेम, सजने-संवरने की किट, कृत्रिम गहने (जैसे हाथों के लिए ब्रेसलेट आदि),  फोटो फ्रेम आदि।

इनका भी रखें ख्याल
खिलौना खरीदने के लिए पहले से बजट तय कर लें।
बच्चों को रंग-बिरंगी चीजें अच्छी लगती हैं, इसलिए ऐसे खिलौनों की खरीदारी पर जोर दें, जिनमें खूब सारे रंग हों। इससे बच्चे रंग पहचानना सीखते हैं।
बच्चों के लिए बाकी सदस्यों के साथ मिल कर खेलने वाले खिलौने खरीदें। इससे वे समूह में रहना सीखते हैं, जैसे लूडो, कैरम, बैडमिंटन, क्रिकेट आदि।
कोई ऐसा खिलौना न खरीदें, जो बच्चे को अंतर्मुखी बना दे। कई बार बच्चे अपने गुड्डे और गुडियों के साथ इतने रम जाते हैं कि उन्हें वे खिलौने भाई-बहनों की तरह लगने लगते हैं।
बॉक्स, क्ले और पजल्स जैसे खिलौनों से बच्चों का दिमाग खुलता है और मानसिक क्षमता मजबूत होती है।
खिलौने की गुणवत्ता का भी ध्यान रखें। इस बात की पुष्टि पहले करें कि खिलौना किस मैटीरियल से बना है।
खिलौना नुकीला या धारदार ना हो।

 
 
 
 
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