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प्यारी-प्यारी गुड़िया रानी
मोनिका मीनल
First Published:10-09-12 11:48 AM
गुड़िया शब्द सुनते ही आंखों के सामने सुंदर और प्यारी गुड़िया की छवि आ जाती है। तुम्हारे पास भी होगी न डॉल्स.. आंखें मटकाने वाली, बटन दबाते ही हंसने वाली, नाचने वाली..। सुलाओ तो सो जाती है, उठाओ तो उठ जाती है, चलाओ तो चल जाती है। सोचो कि उनका मूड खराब है तो उदास दिखती है, सोचो खुश है तो हंस देती है। ऐसी ही है न तुम्हारी डॉल.. पर कभी सोचा कि तुम्हारे हाथों में जो चहेती गुड़िया है, ये आयी कहां से.?
इसी गुड़िया से तुम भी खेल रहे हो, तुम्हारी मां के पास भी थी हसीन गुड़िया, और तो और नानी-दादी के जमाने में भी लोकप्रिय था गुड्डे-गुड़ियों का खेल। बस रूप बदलता गया। नहीं विश्वास होता तो पूछो नानी या दादी से.। खुश हो बखान करेंगी अपनी गुड़िया की खूबसूरती।
कब आई डॉल्स
17वीं शताब्दी में यूरोप में बनने वाली लकड़ियों की गुड़िया बड़ी प्रसिद्ध थी, जिसे खूबसूरत रंगों से रंग कर फैशनेबल कपड़ों में सजा दिया जाता था। लेकिन 19वीं और 20वीं सदी में इनका महत्व घट गया। ये काफी सस्ती हो गईं। फिर आया पोर्सलेन डॉल्स का जमाना, जिसकी उत्पत्ति चीन में हुई। इसे बनाने के लिए सांचे का निर्माण किया गया, जिसमें इनके सिर को ढाला जाता था। बाद तक इन डॉल्स के सिरों को विभिन्न देशों में निर्यात किया जाता रहा। गुड़िया बनाने में फ्रांस भी आगे रहा है। इसके बाद 19वीं सदी में आकर फैशन डॉल्स का चलन बढ़ गया, जो आज भी तुम्हारे हाथों में है बार्बी डॉल के रूप में। बार्बी के नाम से ही तुम सबके चेहरे खिल जाते हैं। पर पता है इसका जन्म तुम्हारे जन्म से बरसों पहले हो चुका था। वर्ष 1959 में ही रुथ हैंडलर ने फैशन डॉल के रूप में बार्बी को लॉन्च किया। उस वक्त जो डॉल चलन में थीं, वे छोटे बच्चों को प्रदर्शित करती थीं। तब रुथ ने बड़ी लड़कियों की तरह एक डॉल बनाने की सोची और जर्मनी की डॉल लिली को देखकर उनके दिमाग में बार्बी का आइडिया आया। बार्बी नाम रुथ की बेटी बारबरा के नाम पर दिया गया था। इस तरह न्यूयॉर्क के अमेरिकन अंतर्राष्ट्रीय खिलौनों के मेले में 9 मार्च 1959 को बार्बी लॉन्च की गई।
17वीं शताब्दी में यूरोप में बनने वाली लकड़ियों की गुड़िया बड़ी प्रसिद्ध थी, जिसे खूबसूरत रंगों से रंग कर फैशनेबल कपड़ों में सजा दिया जाता था। लेकिन 19वीं और 20वीं सदी में इनका महत्व घट गया। ये काफी सस्ती हो गईं। फिर आया पोर्सलेन डॉल्स का जमाना, जिसकी उत्पत्ति चीन में हुई। इसे बनाने के लिए सांचे का निर्माण किया गया, जिसमें इनके सिर को ढाला जाता था। बाद तक इन डॉल्स के सिरों को विभिन्न देशों में निर्यात किया जाता रहा। गुड़िया बनाने में फ्रांस भी आगे रहा है। इसके बाद 19वीं सदी में आकर फैशन डॉल्स का चलन बढ़ गया, जो आज भी तुम्हारे हाथों में है बार्बी डॉल के रूप में। बार्बी के नाम से ही तुम सबके चेहरे खिल जाते हैं। पर पता है इसका जन्म तुम्हारे जन्म से बरसों पहले हो चुका था। वर्ष 1959 में ही रुथ हैंडलर ने फैशन डॉल के रूप में बार्बी को लॉन्च किया। उस वक्त जो डॉल चलन में थीं, वे छोटे बच्चों को प्रदर्शित करती थीं। तब रुथ ने बड़ी लड़कियों की तरह एक डॉल बनाने की सोची और जर्मनी की डॉल लिली को देखकर उनके दिमाग में बार्बी का आइडिया आया। बार्बी नाम रुथ की बेटी बारबरा के नाम पर दिया गया था। इस तरह न्यूयॉर्क के अमेरिकन अंतर्राष्ट्रीय खिलौनों के मेले में 9 मार्च 1959 को बार्बी लॉन्च की गई।
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