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मुंहासे व गंजापन की एक दवा 'जोंक'
वाराणसी, एजेंसी First Published:25-01-2011 04:53:56 PMLast Updated:25-01-2011 05:01:28 PM
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बीएचयू आयुर्वेद संकाय के चिकित्सकों ने चेहरे की खूबसूरती बिगाड़ने वाले मुहासों के इलाज के लिए जोंक का इस्तेमाल किया है और इसके शुरुआती परिणाम उत्साहजनक हैं।

जोंक से मुहासे का इलाज कर रहे चिकित्सा विभाग के एसोसिएट प्रोफेसर डॉ. ओ.पी. सिंह ने बताया कि इलाज के अंतर्गत रोगी को कुछ रक्तशोधक दवाएं देने के साथ प्रभावित स्थान पर जोंक लगाया जाता है। एक हफ्ते में एक से दो जोंक लगाए जाते हैं और एक माह के भीतर ही रोगी को काफी राहत मिल जाती है।

वस्तुत: जोंक प्रभावित स्थान से गंदा खून चूस लेता है। इससे प्रभावित स्थान की नलिकाएं खुल जाती है, रक्त का प्रवाह तेज हो जाता है। इसके अलावा जोंक की लार में सूजन कम करने वाले बायो एक्टिव सब्स्टेंस (तत्व) होते हैं जो मुंहासे ठीक करने में सहायक होते हैं।

डॉ. सिंह ने बताया कि आयुवेंद में 'मुख दूषिका' व 'युवान पीडिका' नाम से प्रचलित मुहासे प्राय: किशोरावस्था से 25 वर्ष तक के युवाओं में देखने को मिलते हैं। खान-पान में अनियमितता इस बीमारी की मुख्य वहज होती है। इसके कारण सिबेसियस ग्लैंड में संक्रमण हो जाता है, जो मुहासे में तब्दील हो जाता है। मुंहासे गालों के अलावा गर्दन, छाती व पीठ पर भी हो सकते हैं।

उन्होंने बताया कि इस विधि से 20-25 मरीजों का इलाज किया जा चुका है और इसके अच्छे परिणाम सामने आये हैं। देखा गया कि एक सप्ताह में ही 50 प्रतिशत मुंहासे समाप्त हो गए। इतनी असरकारक दवा एलोपैथिक में भी नहीं है। इस विधि से गंजापन, गठिया, फीलपांव, सोरियासिस व एक्जिमा का भी इलाज संभव है।

 
 
 
 
 
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