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व्यस्त सड़कों के पास रहने से ऑटिज्म का खतरा
लंदन, एजेंसी First Published:27-11-12 03:55 PM
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वैज्ञानिकों ने चेतावनी दी है कि व्यस्त सड़कों के पास रहने से बचपन में स्वलीनता (ऑटिज्म) का दोहरा खतरा हो सकता है। एक नए अध्ययन में यह पता चला है कि गर्भधारण के दौरान अथवा जन्म के एक साल तक शिशु के वायु प्रदूषण के संपर्क में रहने से उसमें इस बीमारी के होने की आशंका बढ़ जाती है।
   
वैसे बच्चों जो उच्च यातायात प्रदूषण स्तर वाले क्षेत्र के घरों में रहते हैं उनमें प्रदूषण के संपर्क में कम रहने वाले घरों के बच्चों की तुलना में इस बीमारी के होने की तीन गुना ज्यादा आशंका रहती है।
   
विशेषज्ञों ने इस निष्कर्ष को बहुत महत्वपूर्ण बताया है लेकिन उन्होंने इस बात पर भी जोर दिया कि यातायात प्रदूषण से दिमाग पर प्रभाव पड़ने की बात साबित नहीं होती।
   
ऑटिज्म या ऑटिज्म स्पेक्ट्रम डिसऑर्डर (एएसडी),  जिसमें एस्पर्जर्स सिंड्रोम भी शामिल है, विकास से संबंधित एक बीमारी है जिसका किसी के जीवन पर सामाजिक संवाद और संवाद स्थापित करने में जीवन पर्यन्त प्रभाव रहता है।
   
कैलिफोर्निया के वैज्ञानिक यातायात प्रदूषण और ऑटिज्म के बीच संबंधों की संभावना की तलाश कर रहे हैं। उनका कहना है कि वे इस दिशा में आगे बढ़ रहे हैं।
   
उन्होंने इसके लिए ऑटिज्म के शिकार 279 बच्चों और 245 स्वस्थ बच्चों की उम्र और उनके पारिवारिक परिवेश की तुलना कर अध्ययन किया। यातायात प्रदूषण वाले क्षेत्र के घरों में रहने वाले बच्चों में ऑटिज्म होने की आशंका तीन गुना अधिक हो जाती है।
   
यूनीवर्सिटी ऑफ सादर्न कैलिफोर्निया के केक स्कूल ऑफ मेडिसिन की प्रमुख वैज्ञानिक डॉ़ हीथर वोक ने कहा कि इस काम का विस्तृत प्रभाव पड़ेगा। हम लंबे समय से जानते थे कि वायु प्रदूषण हमारे फेफड़ों और विशेष कर बच्चों के लिए खतरनाक है। अब हम वायु प्रदूषण के दिमाग पर असर को लेकर अध्ययन कर रहे हैं।
   
हालांकि ब्रिटिश विशेषज्ञ इस निष्कर्ष को लेकर सावधानी बरत रहे थे, उनका कहना है कि वे यह साबित नहीं कर सकते कि वायु प्रदूषण के कारण ऑटिज्म होता है। ये निष्कर्ष आर्काईव्स ऑफ जेनरल साइकाइट्री नाम की पत्रिका में प्रकाशित हुआ था।

 
 
 
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