रविवार, 30 अगस्त, 2015 | 02:29 | IST
 |  Site Image Loading Image Loading
भूलने की है आदत, हो सकता है अल्जाइमर
नई दिल्ली, एजेंसी First Published:04-01-2013 03:05:01 PMLast Updated:04-01-2013 03:21:52 PM
Image Loading

छोटी-छोटी बातों को भूलना आम तौर पर बहुत ही सामान्य बात होती है और कई बार इसका कारण व्यस्तता या लापरवाही होता है। लेकिन भूलने का संबंध अल्जाइमर से भी होता है, इसलिए इसे टालना उचित नहीं होगा।

विम्हंस हॉस्पिटल में वरिष्ठ मनोचिकित्सक डॉ संजय पटनायक ने कहा कि अगर अपनों का नाम, फोन डायल करने का तरीका भूल जाएं या अपने घर के अंदर एक कमरे से दूसरे कमरे में जाने का रास्ता आपको याद न रहे, तो इसे मामूली तौर पर न लें। यह बीमारी याददाश्त में कमी नहीं, बल्कि अल्जाइमर हो सकती है, जिसके लिए किसी मनोचिकित्सक से संपर्क करना जरूरी है।

अल्जाइमर के लक्षणों के बारे में बॉम्बे अस्पताल की पूर्व मनोचिकित्सक डॉ अनु हांडा ने बताया कि इसके मरीज दिनचर्या से जुड़ी बातों को ही भूल जाते हैं। उन्हें अचानक याद नहीं आता कि उन्होंने नाश्ता किया या नहीं, उन्होंने स्नान किया या नहीं, किसी का नंबर फोन पर डायल करना है, तो कैसे करें, अपने घर की दूसरी मंजिल पर कैसे जाएं और अपने बच्चों या अपने साथी का नाम क्या है।

डॉ टंडन के मुताबिक अल्जाइमर क्यों होता है, इसका वास्तविक कारण अब तक पता नहीं चल पाया है, लेकिन अनुसंधान जारी है और शायद जल्द ही कुछ पता चल जाए। दूरदराज के पिछड़े इलाकों में इस बीमारी के बारे में जानकारी नहीं होने के कारण लोग भूलने की समस्या को गंभीरता से नहीं लेते। जबकि, यह बीमारी है।

विश्व स्वास्थ्य संगठन के एक आकलन के मुताबिक दुनिया भर में लगभग एक करोड़ 80 लाख लोग अल्जाइमर से पीड़ित हैं। डॉ टंडन बताते हैं कि इस बीमारी के मरीज पर लगातार ध्यान देना पड़ता है। वह शुरू में छोटी छोटी बातें भूलते हैं, लेकिन बाद में उन्हें खुद से जुड़े जरूरी काम भी याद नहीं रहते। दवाइयों से ऐसे मरीजों के इलाज में मदद मिलती है, लेकिन इसे पूरी तरह ठीक करना अब तक तो संभव नहीं हुआ है।

डॉ अनु के मुताबिक, कभी मरीज को बाद में यह सोच कर खुद पर हंसी आ सकती है कि वह फोन का नंबर डायल करना कैसे भूल गया। लेकिन ऐसे लक्षण सामने आने पर मरीज को फौरन मनोचिकित्सक के पास जाना चाहिए।

क्या याददाश्त कम होना और अल्जाइमर एक ही सिक्के के दो पहलू हैं, इसके जवाब में डॉ टंडन ने कहा कि याददाश्त कम होने से कहीं ज्यादा खतरनाक है अल्जाइमर। सोचिए कि इसके किसी मरीज को अगर रास्ते में अचानक महसूस हो कि घर कहां है, पता नहीं, तब उस पर क्या बीतेगी। अल्जाइमर में दिमाग के तंतुओं का आपस में संपर्क कम हो जाता है। बहुत से लोग अल्जाइमर को भी याददाश्त कम होना मान लेते हैं, पर यह समस्या बिल्कुल अलग है।

संजय लीला भंसाली की ब्लैक फिल्म में अमिताभ बच्चान ने एक ऐसे शिक्षक की भूमिका निभाई थी, जिसे बाद में अल्जाइमर हो जाता है और वह सबको भूल जाता है।

 
 
 
 
जरूर पढ़ें
क्रिकेट
Image Loadingगावस्कर ने पुजारा की तारीफों के पुल बांधे
अपनी अच्छी तकनीक और शांत चित के कारण चेतेश्वर पुजारा क्रीज पर अपने पांव जमाने में माहिर हैं और पूर्व कप्तान सुनील गावस्कर ने भी इस युवा बल्लेबाज की आज जमकर तारीफ की जिन्होंने अपने नाबाद शतक से भारत को संकट से उबारा।
 
क्रिकेट स्कोरबोर्ड
 
Image Loading

जब संता के घर आए डाकू...
आधी रात को संता के घर डाकू आए।
संता को जगाकर पूछा: यह बताओ कि सोना कहां है?
संता (गुस्से से): इतना बड़ा घर है कहीं भी सो जाओ। इतनी छोटी बात के लिए मुझे क्यों जगाया!