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भूलने की है आदत, हो सकता है अल्जाइमर
नई दिल्ली, एजेंसी
First Published:04-01-13 03:05 PM
Last Updated:04-01-13 03:21 PM
छोटी-छोटी बातों को भूलना आम तौर पर बहुत ही सामान्य बात होती है और कई बार इसका कारण व्यस्तता या लापरवाही होता है। लेकिन भूलने का संबंध अल्जाइमर से भी होता है, इसलिए इसे टालना उचित नहीं होगा।
विम्हंस हॉस्पिटल में वरिष्ठ मनोचिकित्सक डॉ संजय पटनायक ने कहा कि अगर अपनों का नाम, फोन डायल करने का तरीका भूल जाएं या अपने घर के अंदर एक कमरे से दूसरे कमरे में जाने का रास्ता आपको याद न रहे, तो इसे मामूली तौर पर न लें। यह बीमारी याददाश्त में कमी नहीं, बल्कि अल्जाइमर हो सकती है, जिसके लिए किसी मनोचिकित्सक से संपर्क करना जरूरी है।
अल्जाइमर के लक्षणों के बारे में बॉम्बे अस्पताल की पूर्व मनोचिकित्सक डॉ अनु हांडा ने बताया कि इसके मरीज दिनचर्या से जुड़ी बातों को ही भूल जाते हैं। उन्हें अचानक याद नहीं आता कि उन्होंने नाश्ता किया या नहीं, उन्होंने स्नान किया या नहीं, किसी का नंबर फोन पर डायल करना है, तो कैसे करें, अपने घर की दूसरी मंजिल पर कैसे जाएं और अपने बच्चों या अपने साथी का नाम क्या है।
डॉ टंडन के मुताबिक अल्जाइमर क्यों होता है, इसका वास्तविक कारण अब तक पता नहीं चल पाया है, लेकिन अनुसंधान जारी है और शायद जल्द ही कुछ पता चल जाए। दूरदराज के पिछड़े इलाकों में इस बीमारी के बारे में जानकारी नहीं होने के कारण लोग भूलने की समस्या को गंभीरता से नहीं लेते। जबकि, यह बीमारी है।
विश्व स्वास्थ्य संगठन के एक आकलन के मुताबिक दुनिया भर में लगभग एक करोड़ 80 लाख लोग अल्जाइमर से पीड़ित हैं। डॉ टंडन बताते हैं कि इस बीमारी के मरीज पर लगातार ध्यान देना पड़ता है। वह शुरू में छोटी छोटी बातें भूलते हैं, लेकिन बाद में उन्हें खुद से जुड़े जरूरी काम भी याद नहीं रहते। दवाइयों से ऐसे मरीजों के इलाज में मदद मिलती है, लेकिन इसे पूरी तरह ठीक करना अब तक तो संभव नहीं हुआ है।
डॉ अनु के मुताबिक, कभी मरीज को बाद में यह सोच कर खुद पर हंसी आ सकती है कि वह फोन का नंबर डायल करना कैसे भूल गया। लेकिन ऐसे लक्षण सामने आने पर मरीज को फौरन मनोचिकित्सक के पास जाना चाहिए।
क्या याददाश्त कम होना और अल्जाइमर एक ही सिक्के के दो पहलू हैं, इसके जवाब में डॉ टंडन ने कहा कि याददाश्त कम होने से कहीं ज्यादा खतरनाक है अल्जाइमर। सोचिए कि इसके किसी मरीज को अगर रास्ते में अचानक महसूस हो कि घर कहां है, पता नहीं, तब उस पर क्या बीतेगी। अल्जाइमर में दिमाग के तंतुओं का आपस में संपर्क कम हो जाता है। बहुत से लोग अल्जाइमर को भी याददाश्त कम होना मान लेते हैं, पर यह समस्या बिल्कुल अलग है।
संजय लीला भंसाली की ब्लैक फिल्म में अमिताभ बच्चान ने एक ऐसे शिक्षक की भूमिका निभाई थी, जिसे बाद में अल्जाइमर हो जाता है और वह सबको भूल जाता है।
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टिप्पणियाँ
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AAM JNTA KI CHINTA KISI KO NHI-: Aaj kisi V desh ya state me bikash ka sbse bda maapdhand bijli,paani,sadak,siksha or health development hai aur in sbi chijo me hmara jharkhand 95% piche chuki yha K hr neta, mantri,officers sirf apni chair ki bare me sochte V kaisa V important work ho us work ko krne me salo lg jate AUR iska sbse big kaarn education koi V illiterate person apne desh me neta, mantri bn skta hai to aise log Time or development ka meaning kaise Isliye goverment ko ye rule bnana chahea ki koi V illiterate person ko aise chair nhi diye Aise post K liye ek aawsyk educational qualification or age limit hona In svi baato pr aam jnta ko V sochna hoga or aml krna iske baad he hm apne aap me, apne state me,apne desh me changing la skte
By Rahul kr. singh (9th-January-2013 06:51:PM)
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