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अमर शहीदों की याद दिलाता है इंडिया गेट
सत्य सिंधु
First Published:07-08-12 11:40 AM
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दिल्ली के केन्द्र में स्थित इंडिया गेट को तो तुम जानते ही हो। पर्यटकों के बीच तो लोकप्रिय है ही, यह देश की शान और खास पहचान भी है। आओ आज जानते हैं अपने इंडिया गेट के बारे में सत्य सिंधु से

तुम इंडिया गेट तो गए ही होगे। इसे 26 जनवरी को टीवी पर भी देखा होगा, जब गणतंत्र दिवस की परेड यहां से निकलती है। शायद तुमने यहां शाम के समय आइसक्रीम और चाट का भी आनन्द उठाया होगा। आसपास बने फव्वारे और बगीचे भी तुम्हें खूब अच्छे लगे होंगे। लेकिन क्या तुम कभी इंडिया गेट के बहुत करीब गए हो? क्या तुमने उसकी दीवार को गौर से देखा है? अगर हां, तो तुम्हें इसकी दीवार पर कुछ नाम भी लिखे हुए दिखे होंगे? जब तुमने पापा से पूछा होगा कि ये नाम किनके हैं, तो पापा ने जवाब दिया होगा कि ये सैनिकों के नाम हैं। आइए, आज हम जानते हैं कि इंडिया गेट पर लिखे ये नाम किन सैनिकों के हैं और इंडिया गेट को किसने बनाया, क्यों बनवाया?

इसका निर्माण 1921 ई. में हुआ था। ब्रिटिश राज परिवार के डय़ूक ऑफ कनॉट के बारे में तो तुम पिछली बार पढ़ ही चुके हो, जिनके नाम पर कनॉट प्लेस का नाम रखा गया था। इसी डय़ूक ऑफ कनॉट ने इंडिया गेट के निर्माण की पहली ईंट रखी थी। यानी उन्होंने ही इसका शिलान्यास किया था। इसके लिए तब के प्रसिद्ध आर्किटेक्ट सर इडविन लुटियंस ने इंडिया गेट का डिजाइन तैयार किया था। इंडिया गेट को बनने में लगभग 10 साल लग गए। 1931 में यह बनकर तैयार हो गया। राष्ट्रपति भवन के सामने वाली सड़क को राजपथ कहा जाता है। इस सड़क पर 42 मीटर ऊंचा इंडिया गेट बनकर तैयार हो गया।

इसकी दीवार पर लगभग 90 हजार सैनिकों के नाम लिखे हुए हैं। तुम सोच रहे होगे कि इतने सारे सैनिक! ये सैनिक कौन थे? ये प्रथम विश्व युद्ध में अपने प्राण गंवा चुके सैनिकों के नाम हैं। इनमें काफी नाम ऐसे सैनिकों के भी हैं, जो अफगान युद्ध में शहीद हो गए थे। ये सैनिक बहुत पहले शहीद हो गए थे, लेकिन जब इंडिया गेट बना तो इसे अमर शहीदों के नाम समर्पित कर दिया गया। बाद में जब भारत और पाकिस्तान के बीच 1971 में युद्ध हुआ तो उसमें शहीद हुए लोगों को श्रद्धांजलि देने के लिए यहां अमर जवान ज्योति का निर्माण किया गया। जब तुम यहां गए होगे तो गेट के बीच एक राइफल पर सजाई गई सैनिक की टोपी भी दिखी होगी और यहां चार कोनों पर जलती हुई अमर ज्योति भी दिखी होगी। यह ज्योति हर समय जलती रहती है।

इस गेट को खूबसूरत बनाने के लिए राजस्थान के भरतपुर से लाल पत्थर मंगवाया गया था। शाम के समय जब इस गेट पर रोशनी पड़ती है तो यह गेट बहुत ही खूबसूरत लगता है। गेट के चारों ओर कई फव्वारे लगाए गए हैं और तरह-तरह के फूलों से भी इसे सजाया गया है। गेट के पास ही बोट क्लब भी बनाया गया है, जहां बच्चाे-बड़े सभी बोटिंग करते हैं। शाम में तो यहां घूमने वालों की भीड़ लगी रहती है, जैसे कोई मेला हो। अब तुम जाओ तो यहां के चिल्ड्रेन पार्क में थोड़ा समय बिताना। वहां तरह-तरह के झूले और रोमांचक खेल के साधन हैं।

 
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