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छोटी सी कोशिश से घर-आंगन में फिर फुदकने लगीं गौरैय्या

छोटी सी कोशिश से घर-आंगन में फिर फुदकने लगीं गौरैय्या

चुन-चुन करती आई चिड़िया, दाल का दाना लाई चिड़िया.. इस गीत के बजते ही अगर जहेन में कोई तस्वीर उभरती है तो वह है घर-आंगन फुदकने वाली गौरैय्या की। अपनी गौरैय्या कुछ वर्ष पहले कहीं गुम हो गई थी लेकिन दो वर्ष की मेहनत से वह अपने घरों यानी ‘घोंसलों में लौट आई है।

सोमवार को विश्व गौरैय्या दिवस है। बात वर्ष 2014 की है। शहर में ‘स्वीट स्पैरो..कम बैक होम नाम से गौरैय्या को बचाने के अभियान की शुरुआत हुई। धीरे-धीरे यह अभियान जुनून की शक्ल में बदल गया। परिणाम स्वरूप छोटी सी कोशिश ने विलुप्त होने की कगार पर पहुंच गई गौरैय्या को जिन्दगी दे दी।

क्यों गुम हो गई थी चिरैय्या

‘स्वीट स्पैरो..कम बैक होम अभियान शुरू करने वाले सुदर्शन ‘लीडिंग लीडरशिप के निदेशक गौरव बाजपेई का कहना है कि गौरैय्या घरों में घोंसले बनाती थी। दाना भी मिल जाता था। घरों में इनके घोंसले की जगह नहीं बची। प्रदूषण भी बढ़ा। झाड़ियों की कमी हो गई जहां वे अण्डे छुपाती थीं। दीवारों में मोखले नहीं रहे, छप्पर खत्म हो गए। कुछ मानते हैं कि मोबाइल टावरों के रेडिएशन का प्रभाव भी पड़ा।

कैसे घर लौटी गौरैय्या

हर वर्ष 15 प्रतिशत की दर से गौरैय्या यानी घरेलू चिड़ियों में कमी आ रही थी। विलुप्त होने के कारण पहचान कर ऐसे घोंसले तैयार किए गए जिसमें बिल्ली, कौवों और बाजों की पहुंच न हो। इन्हें बारिश और धूप से भी सुरक्षित कर लगाया गया। दो साल के अभियान में 42500 छात्र प्रत्यक्ष या परोक्ष रूप से अभियान से जुड़े और 1499 विशेष घोसले साथ ले गए। स्कूलों में भी बड़ी संख्या में विशेष घोंसले लगाए गए। प्रदेश सरकार ने भी इस अभियान में साथ दिया। संस्था के अतिरिक्त स्व प्रेरणा से हजारों लोगों ने घोंसले लगाए। लाखों की संख्या में गौरैय्या की संख्या बढ़ गई।

इस पर भी दें ध्यान तो बने बात : अक्सर गौरैय्या के प्रजनन के लिए अनुकूल मौसम में पार्कों आदि की झाड़ियों की कटाई-छटाई की जाती है। गौरैय्या बोगन बेलिया, कनेर, नीबू, मौसम्मी, शहतूत, बेर, मालती की बेल और अन्य सभी कांटेदार झाड़ में छिपती हैं लेकिन अब इसकी कमी हो गई है। पार्कों में यह पौधे लगाए जाने चाहिए।

क्या आप भी बचा रहें हैं गौरैय्या

अगर आप भी गौरैय्या को बचाने का प्रयास कर रहे हैं। अगर हां, तो इसके लिए क्या प्रयास किए। फोटो सहित संक्षेप में इसका विवरण लिखकर 09532988 पर वॉट्सएप कर सकते हैं।

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  • Web Title:sprouting started again in the courtyard of the house with little effort