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कानपुर के मुस्लिम समाज ने चीन के बने झंडों को बोला बाय-बाय

कानपुर के मुस्लिम समाज ने चीन के बने झंडों को बोला बाय-बाय

दिवाली में चीनी उत्पादों के बहिष्कार की मुहिम का असर इस बार मुस्लिम समाज के पाकीजा पर्व बारारबी उल अव्वल पर भी देखने को मिलेगी। शुक्रवार को बारारबी उल अव्वल की पहली तारीख है। इस बार समाज के लोग चीन के बने हरे झंडों की जगह भारत में बने झंडों का प्रयोग करेंगे। शहर में मुंबई और गुजरात में बनाए गए झंडों की काफी खेप आ भी चुकी है। आपके अखबार हिन्दुस्तान ने दिवाली पर शहर में चीनी उत्पादों के खिलाफ अभियान चलाया था। इस अभियान को समाज के सभी वर्गों ने सराहा भी था।

बारारबी उल अव्वल पर हरे और सफेद झंडे तैयार किए जाते हैं। झंडे बड़े और छोटे हर प्रकार के बनाए जाते हैं। इन्हें वाहनों और घरों की छतों पर लगाया जाता है। इसके अतिरिक्त अन्य सामग्री जैसे बैज, शर्ट फ्लैग, रिबन भी बनाए जाते हैं। अभी तक इन सभी समानों की आपूर्ति में चीन काफी आगे था, लेकिन इस बार नहीं होगा। चीन का सामान काफी सस्ता बताया जाता था, लेकिन भारतीय बाजारों में बने सामानों के दामों में काफी फर्क नहीं है इसलिए मुसलिम समाज के लोग इसे हाथों-हाथ ले रहे हैं। इस का काफी असर चीन के बाजार पर पड़ रहा है।

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  • Web Title:Kanpur Muslim community boycott made in China flags