Image Loading उधार पर चल रही जिन्दगी, सम्भलेगी गृहस्थी - LiveHindustan.com
सोमवार, 05 दिसम्बर, 2016 | 09:52 | IST
Mobile Offers Flipkart Mobiles Snapdeal Mobiles Amazon Mobiles Shopclues Mobiles
खोजें
ब्रेकिंग
  • पढ़ें वरिष्ठ हिंदी लेखक महेंद्र राजा जैन का ये लेख, 'उनके लिए तो नाम में ही सब कुछ...
  • पढ़ें मिंट के संपादक आर सुकुमार का ब्लॉग, 'नए मानकों की तलाश करते कारोबार'
  • चेन्नईः जयललिता की सलामती के लिए समर्थक कर रहे हैं दुआ, अपोलो अस्पताल के बाहर...
  • एक ही नजर में शिखर धवन को भा गई थीं आयशा, भज्जी बने थे लव गुरु। क्लिक करके पढ़ें...
  • भविष्यफल: धनु राशिवाले आज आत्मविश्वास से परिपूर्ण रहेंगे और परिवार का सहयोग...
  • हेल्थ टिप्स: ये हैं हेल्दी लाइफस्टाइल के 5 RULE, डाइट में शामिल करने से पेट रहेगा फिट
  • GOOD MORNING: जयललिता को दिल का दौरा पड़ा, अस्पताल के बाहर जुटे हजारों समर्थक, अन्य बड़ी...

उधार पर चल रही जिन्दगी, कैसे सम्भलेगी गृहस्थी

नोटबंदी --01 First Published:01-12-2016 10:00:00 PMLast Updated:01-12-2016 10:10:11 PM

अब तो दुकानदारों ने भी सामान देने में खड़े कर दिए हाथ

मवेशियों के चारे और भूसे की खड़ी हो गई समस्या

नौकरी पेशा,दूध, डेयरी समेत हर कोई परेशान

मकान मालिक भी दी हिदायत, किराया नकद चाहिए

फोटो..17, 19

जौनपुर। निज संवाददाता

नोटबन्दी के 23 वें दिन हर आमोखास की गृहस्थी पटरी से उतरने लगी है। दूध-ब्रेड, मक्खन, तेल.मसाला, साग-सब्जी से लेकर जरूरत के हर सामानों में नकदी की बेहद ही जरूरत है। स्कूल. कालेजों में फीस नहीं जमा हो रहे हैं। बच्चों को फीस जमा करने की चेतावनी मिलने लगी। नहीं तो 25 से 40 रुपये लेट फीस भी झेलनी पड़ेगी। इससे भी बद्तर स्थिति में मवेशियों के पशुपालकों की होती जा रही है।

पुरानी सब्जी मंडी के सब्जी विक्रेता मो. राशिद, मो. खालिक बताते हैं कि जिला अस्पताल व कुछ नौकरी पेशा लोगों को हमने उधार में दिया लेकिन अब मेरी भी जेब गवाही नहीं दे रहे हैं। कोतवाली चौराहा स्थित किराना स्टोर संचालक राकेश गुप्त, हरगेन मद्देशिया बताते हैं कि उधार देने की भी सीमा होती है। जब हमें उधार नहीं मिल रहा है तो हम कहां से खिलाएं। आखिर हमारा भी रोजगार कारोबार ठप पड़ा है। थोक दुकानों पर चार से छह-छह नौकर रखे हैं लेकिन उनका भी वेतन निकलना मुश्किल हो गया है। अनिल कुमार साहू बताते हैं कि शहरी इलाके में रहने वाला व्यक्ति साग. सब्जी से लेकर पानी भी खरीदकर पीता है।

बताते हैं कि हमारे यहां से ज्यादा तर लोग शिक्षा जगत से जुड़े हैं। गैर जिले से आए शिक्षकों को अभी तक वेतन नहीं मिला है। घर से जो लाए थे उससे काम चलाया। अब तो जेब खर्च भी वह लोग नहीं निकाल पा रहे हैं। शहर के वाजिदपुर, मियांपुर इलाके के मकान मालिकों ने कह दिया कि किराया जैसे नकद देते थे वैसे ही दीजिएगा। शहर से सटे कलीचाबाद निवासी दूग्ध विक्रेता रमेश यादव, हरगेन यादव बताते हैं कि मवेशियों के लिए भूंसा. खली और चूनी खरीदना मुश्किल हो रहा है। चोकर 17 से 20 रुपये प्रतिकिलो है। खली 25 से 30 रुपये, चूनी 25 से 50 रुपये प्रति किलो तक। पुआल भी सात रुपये आटा (गड्डी)। पांच किलो भूसा 40 रुपये में मिलता है। इन सभी सामानों के लिए फुटकर ही पैसे चाहिए। हमसे एक लीटर, आधा लीटर दूध, पाव.आधा किलो दही जो ले जा रहा है वह भी पूछता है कि चेक लेंगे क्या। इतने में वह सवाल करते हैं कि बताइये ई चेक लेकर हम कउन. कउन बैंक में चक्कर मारेंगे। चेक भजेगा कि नहीं यह भी गारंटी नहीं है। दूधिया हर दिन दूध निकलवा कर ले जा रहे हैं लेकिन 12 से 15 दिनों का उधार हो गया है। पैसे मांगते हैं तो बोले अभी खुद लोगों ने हमें नहीं दिया। बोले हैं जब पैसे हो जायेंगे तो देंगे।

जरूर पढ़ें

 
Hindi News से जुडी अन्य ख़बरों की जानकारी के लिए हमें पर ज्वाइन करें और पर फॉलो करें
Web Title: उधार पर चल रही जिन्दगी, सम्भलेगी गृहस्थी
 
 
 
अन्य खबरें
 
From around the Web
जरूर पढ़ें
Rupees
क्रिकेट स्कोरबोर्ड