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धरती की तरफ तेजी से बढ़ रहा है चीन का एक पुराना स्पेस स्टेशन

धरती की तरफ तेजी से बढ़ रहा है चीन का एक पुराना स्पेस स्टेशन

चीन का पहला अंतरिक्ष स्टेशन ‘तियांगोंग-1’ धरती पर गिर सकता है। कुछ अंतरिक्ष विज्ञानियों ने दावा किया है कि चीन ने ‘तियांगोंग-1’ से नियंत्रण खो दिया है। साल के अंत तक इसके कुछ हिस्से के धरती पर गिरने का डर है। हालांकि अभी चीन ने इस बारे में सार्वजनिक घोषणा नहीं की है। कुछ वैज्ञानिकों का कहना है कि चीन अंतिम समय तक ‘तियांगोंग-1’ की कमान दोबारा हासिल करने की कोशिश करेगा। यही वजह है कि उसने फिलहाल इस मामले में चुप्पी साधे रखे है। 

कहां हैं तियांगोंग-1 स्टेशन
तियांगोंग-1 स्टेशन पृथ्वी की निचली कक्षा में मौजूद था। यह धरती से 350 किलोमीटर की ऊंचाई पर चक्कर लगा रहा था। हालांकि अनुभवी सेटेलाइट ट्रैकर और अंतरिक्ष विज्ञानी थॉमस डोरमेन ने दावा किया है कि चीनी अंतरिक्ष एजेंसी ने ‘तियांगोंग-1’ से निंयत्रण खो दिया है। उसे पता नहीं है कि यह स्पेस स्टेशन धरती की कक्षा में कहां है। इससे पहले चीनी समाचार एजेंसी शिंहुआ ने मार्च में बताया था कि ‘तियांगोंग-1’  ने डाटा जुटाना बंद कर दिया है। डोरमेन के मुताबिक चीन अंतिम समय तक इस स्पेस स्टेशन पर दोबारा काबू पाने का प्रयास करेगा। यही वजह है कि उसने स्टेशन का नियंत्रण खोने की बात सार्वजनिक नहीं की है। 

धरती की तरफ बढ़ेगा तो क्या खतरे होंगे
कुछ अंतरिक्ष विज्ञानियों की मानें तो चीनी स्पेस एजेंसी से संपर्क टूटने के बाद ‘तियांगोंग-1’ पृथ्वी की कक्षा में परिक्रमा तो करता रहेगा, लेकिन इसकी ऊंचाई धीरे-धीरे कम होती जाएगी। कुछ महीने बाद यह गुरुत्वाकर्षण के प्रभाव में आकर धरती की तरफ गिरने लगेगा। अमूमन जब कोई वस्तु धरती के वायुमंडल में प्रवेश करती है तो वह जलने लगती है। इससे पहले भी कई सेटेलाइट धरती की ओर गिरे हैं, लेकिन इनमें से अधिकतर वायुमंडल में ही जलकर नष्ट हो गए। हालांकि कुछ बड़े आकार की वस्तु वायुमंडल में पूरी तरह से नहीं जल पातीं। इनके कुछ टुकड़े धरती पर गिर जाते हैं। अगर चीन का ‘तियांगोंग-1’ धरती की तरफ गिरेगा तो दो बातें हो सकती हैं। या तो यह पूरी तरह से जलकर नष्ट हो जाएगा या फिर इसके जलते हुए टुकड़े धरती पर गिरेंगे। अगर इसके जलते हुए टुकड़े धरती पर गिरे तो जानमाल का भारी नुकसान हो सकता है।

कितना बड़ा है तियांगोंग-1
चीन के ‘तियांगोंग-1’ अंतरिक्ष स्टेशन का वजन लगभग 8.5 टन है। आकार में यह 34 फीट लंबा और लगभग 11 फीट चौड़ा है। इतना विशाल स्टेशन अगर धरती की तरफ गिरता है तो बड़ा खतरा हो सकता है। चीन ने 2012 में ‘तियांगोंग-1’ पर पहली बार तीन अंतरिक्ष यात्रियों से लैस यान रवाना किया था।

स्पेस वॉक का अभ्यास
‘तियांगोंग-1’ का इस्तेमाल अंतरिक्ष से जुड़े शोध कार्यों को अंजाम देने के लिए किया जाता रहा है। कई बार स्पेस स्टेशन में आई खराबी को दूर करने के लिए यात्री उससे बाहर निकलकर खुले स्पेस में चहलकदमी भी करते हैं। हालांकि इसके खतरे भी कम नहीं हैं। 2013 में एक वैज्ञानिक परीक्षण के लिए अंतरराष्ट्रीय अंतरिक्ष स्टेशन (आईएसएस) से बाहर निकले इतालवी अंतरिक्ष यात्री लुका परमितानो बाल-बाल बचे थे। दरअसल, उनके स्पेस सूट के वेंटिलेशन सिस्टम में रिसाव होने लगा था। चीन अपने भावी अंतरिक्ष स्टेशन के विकास के लिए  ‘तियांगोंग-1’ के जरिए स्पेस वॉक और डॉकिंग का अभ्यास कर रहा था। 

इसलिए जरूरी हैं अंतरिक्ष स्टेशन
पृथ्वी की कक्षा में यूं तो कई उपग्रह मौजूद हैं, पर आईएसएस इनमें सबसे अहम है। दरअसल, अंतरिक्ष में यह एकमात्र स्थान है, जहां इंसान के रहने लायक वातावरण है। नवंबर 2000 से अभी तक कभी भी ऐसा नहीं हुआ, जब आईएसएस पर कोई वैज्ञानिक न रहा हो। फिलहाल 15 देशों के 200 से अधिक वैज्ञानिक इसका दौरा कर चुके हैं। आईएसएस से वैज्ञानिक अल्फा मेग्नेटिक स्पेक्ट्रोमीटर को बिजली और बैंडविड्थ की आपूर्ति भी करते हैं, जो डार्क मैटर  से जुड़े आंकड़े जुटाने में कारगर है। आईएसएस के जरिए अंतरिक्ष में इंसान पर होने वाले असर के बारे में भी अध्ययन किया जाता है, ताकि अंतरिक्ष  में और मानव मिशन भेजे जा सकें।
 

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  • Web Title: chinas tiangong-1 space station might just be falling back to earth