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गंगा में प्रदूषण फैलाने वालीं फैक्ट्रियां तत्काल बंद करें : हाईकोर्ट

गंगा में प्रदूषण फैलाने वालीं फैक्ट्रियां तत्काल बंद करें : हाईकोर्ट

हरिद्वार में गंगा तट पर बढ़ते प्रदूषण और अनियमितताओं को लेकर दायर जनहित याचिका में हाईकोर्ट की खंडपीठ ने शुक्रवार को बड़ा फैसला सुनाया। हाईकोर्ट ने राज्य सरकार को गंगा तट पर प्रदूषण फैलाने वाली सभी फैक्ट्रियों को तत्काल प्रभाव से बंद करने के आदेश दिए हैं। इसके साथ ही गंगा नदी से जुड़े मामलों को देखने के लिए तीन महीने में अंतर राज्य समिति बनाने के भी निर्देश दिए हैं।

गंगा में बढ़ते प्रदूषण के चलते हरिद्वार निवासी अधिवक्ता ललित मिगलानी ने हाईकोर्ट में जनहित याचिका दायर की थी। याचिका में उन्होंने कहा है कि गंगा नदी के किनारे जितनी भी फैक्ट्रियां लगी हैं, उनके द्वारा गंगा नदी को प्रदूषित किया जा रहा है। साथ ही गन्दे पानी को भी गंगा नदी में ही छोड़ा जा रहा है। इससे गंगा नदी प्रदूषित हो रही, जिसे रोका जाना अति आवश्यक है। शुक्रवार को हाईकोर्ट में न्यायधीश राजीव शर्मा व न्यायधीश आलोक सिंह की खंडपीठ ने मामले में सुनवाई की।

खंडपीठ ने राज्य सरकार को आदेश दिया कि प्रदेश में संचालित ऐसी फैक्ट्रियों को तत्काल प्रभाव से बंद किया जाए तो गंगा तट पर प्रदूषण फैला रही हैं। हाईकोर्ट ने कहा कि 2014 और 2015 में इन सभी फैक्ट्रियों को नोटिस जारी किए गए थे, लेकिन इनके द्वारा कोई भी जवाब नहीं दिया गया। हाईकोर्ट ने उत्तराखंड सरकार को निर्देश दिए कि जिन राज्यों में गंगा बहती है, उन राज्य को मिलाकर तीन महीने के भीतर अंतर राज्य समिति बनाई जाए। यह समिति गंगा नदी से जुड़े सभी मामलों को देखेगी।

राष्ट्रपति के समक्ष पेश करें ऑडिट रिपोर्ट

हाईकोर्ट ने मामले में सुनवाई करते हुए कैग को आदेश दिए की गंगा की सफाई और नवीनीकरण कार्यों के लिए जो भी धन केंद्र सरकार, राज्य सरकार और अन्य संस्थाओं से मिला है, उसका छह महीने के भीतर ऑडिट करके अपनी रिपोर्ट भारत के राष्ट्रपति के समक्ष पेश करें।

धार्मिक स्थलों से भिखारियों को हटाएं

जनहित याचिका पर सुनवाई करते हुए खंडपीठ ने राज्य सरकार को आदेश दिए हैं कि वह प्रदेश के सभी धार्मिक स्थलों से भिखारियों को भी हटाए।   

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  • Web Title:Nainital High Court, PIL, order