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जवानों से बदसुलूकी का जवाब देने की जरूरत

जवानों से बदसुलूकी का जवाब देने की जरूरत

सीमा पर तैनात सैनिक अपने देश का गौरव होते हैं। सैनिकों की वीरता ही देश का गौरव बढ़ाती है। कश्मीर घाटी में केंद्रीय रिजर्व पुलिस बल के जवानों के साथ बदसुलूकी व भारत विरोधी नारों के साथ पिटाई पर चल रही राजनीति ने देश को शर्मसार किया है। जवानों ने पिटाई के बावजूद जवाब नहीं दिया, उसके कुछ कारण हो सकते हैं, मगर जवानों की इस सहनशीलता को वीरता नहीं, कायरता के तौर पर देखा जा रहा है। जब सीमा पर तैनात जवानों का अपमान हो रहा है, तो कौन मां अपने बेटे को सेना में भेजने के लिए तैयार होगी? इस अपमानजनक घटना ने देश को झकझोर दिया है। कश्मीर घाटी में केंद्रीय रिजर्व सुरक्षा बल के जवानों के साथ कुछ लोगों द्वारा बदसुलूकी, मारपीट और गाली-गलौज के वीडियो सामने आने के बाद देश की जनता विचलित है, गुस्से में है। यह गुस्सा इन वीडियो के बाद हो रही राजनीति को लेकर भी बढ़ा है। फिल्म और खेल जगत के सितारों ने भी जवानों को पीटने की घटना की तीखी आलोचना की है। 

जवानों की पिटाई के ये वीडियो सोशल मीडिया पर छाए हुए हैं। इसमें दिखाया गया है कि श्रीनगर लोकसभा सीट के उप-चुनाव के बाद लौट रहे सीआरपीएफ के जवानों को हिंसक भीड़ पीट रही है। सुरक्षाकर्मी हथियार होते हुए भी पिटाई सहन कर रहे हैं। किसी ने जवान को बचाने की कोशिश भी नहीं की। दूसरे वीडियो में कुछ लड़के सीआरपीएफ जवान को लातों से मार रहे हैं। इस जवान ने भी हथियार नहीं उठाया। एक अन्य वीडियो में चुनाव ड्यूटी से लौट रहे जवानों के साथ नारे लगाते लड़के चल रहे हैं। लड़के बार-बार जवानों को उकसाने के लिए नारे लगा रहे हैं। इन वीडियो की सच्चाई भी सामने आ गई है। ये सभी वीडियो सही पाए गए हैं। हमें जवानों के धैर्य और संयम की प्रशंसा करनी चाहिए। वे उस समय चुनाव के बाद ईवीएम लेकर लौट रहे थे। उन्होंने अपनी सुरक्षा से बढ़कर ईवीएम की सुरक्षा को तरजीह दी और उन्हें सुरक्षित तय स्थान तक पहुंचाया।

वीडियो के सामने आने के बाद दोषियों के खिलाफ कार्रवाई शुरू तो हुई है, मगर जम्मू-कश्मीर के पूर्व मुख्यमंत्री फारूक अब्दुल्ला और उनके साहबजादे उमर अब्दुल्ला दूसरी कहानी गढ़ने में लगे हैं। उमर अब्दुल्ला ने कुछ  तस्वीरें व वीडियो ट्वीट किए हैं, जिनके जरिये यह बताने की कोशिश हो रही है कि जीप के बोनट पर एक कश्मीरी युवक को बांधकर सेना व सुरक्षा बल के ऊपर पत्थर फेंकने वालों को चेतावनी दी गई। अभी इस वीडियो की सच्चाई सामने नहीं आई है, पर उमर अब्दुल्ला को यह वीडियो जारी करते देख बहुत अफसोस हुआ, क्योंकि उन्होंने अफसरों व जवानों की कठिनाई का जिक्र नहीं किया। फारूक अब्दुल्ला ने तो यह भी कहा है कि जम्मू-कश्मीर सरकार पत्थरबाजों को पैसे देती है, ताकि घाटी में अमन-चैन कायम न हो। इसकी जांच भी जरूरी है। जम्मू-कश्मीर की मुख्यमंत्री महबूबा मुफ्ती ने इन आरोपों को बकवास करार दिया है, फिर भी हो सकता है कि उमर अब्दुल्ला व उनके मुख्यमंत्री रहते हुए पाकिस्तान की शह पर पत्थर मारने वालों को पैसे सरकार के खाते से दिए गए हो। जिस कश्मीर की दुर्गति का रोना फारूक और उमर रो रहे हैं, उसके लिए जिम्मेदार कौन है? पिता-पुत्र, दोनों जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री रहे, केंद्र सरकार में मंत्री रहे। फारूक अब्दुल्ला व उनकी पार्टी के हालिया बयानों ने भी हालात को खराब करने में प्रमुख भूमिका निभाई है। 

जवानों के साथ हिंसक घटनाओं के बाद जगह-जगह लोग नाराजगी जता रहे हैं। क्रिकेटर गौतम गंभीर के बयान से पूरे देश की पीड़ा सामने आई है। उनका कहना है कि हमारे आर्मी जवान को मारे गए हर थप्पड़ के बदले 100 जेहादियों को मार देना चाहिए। जिसको भी आजादी चाहिए, वह देश छोड़कर चला जाए। गंभीर के साथ लंबे वक्त तक ओपनिंग पार्टनर रहे वीरेंदर सहवाग ने कहा है कि अब इसे स्वीकार नहीं किया जा सकता। जवानों के साथ बदसुलूकी की घटनाओं के बाद आरोपियों की गिरफ्तारी हुई है। जम्मू-कश्मीर पुलिस सख्त रवैया अपना रही है। पर मानव अधिकारों की दुहाई देने वाले लोग इस मसले पर चुप क्यों हैं? कथित मानवाधिकार कार्यकर्ता लंबे समय से सेना और सुरक्षा बलों पर कश्मीरियों के मानवाधिकारों के हनन का आरोप लगाते रहे हैं। 
  (ये लेखक के अपने विचार हैं)

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