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योगी के सामने चुनौतियां कम नहीं

योगी के सामने चुनौतियां कम नहीं

प्रदेश के 21वें मुख्यमंत्री बने सांसद योगी आदित्यनाथ के लिए आगे की राह आसान नहीं है। बहुसंख्यक वर्ग के पसंदीदा नेता के सामने सबसे बड़ी चुनौती सबका स्वीकार्य नेता बनने और उनका भरोसा जीतने की है। कार्यशैली ऐसी रखनी होगी कि कोई वर्ग खुद को कटा हुआ या उपेक्षित न महसूस करे।

योगी बहुसंख्यक समाज के नेता हैं। अल्पसंख्यक उनसे भय महसूस करता है। उसके मन से भय निकालना और उसका भरोसा जीतना आसान नहीं। अब उन फैसलों का इंतजार रहेगा जिनसे लगे कि योगी सरकार सबका साथ और सबका विकास चाहती है।

योगी ने पिछले दो दशक में हिन्दुत्व और विकास को आधार बना कर राजनीति की है। वह जितने प्रखर हिन्दुत्व के मोर्चे पर रहते हैं, उतने ही विकास के मोर्चे पर ही। अब देखना होगा कि प्रदेश के विकास के मोर्चे पर वह क्या कुछ करते हैं।

विधानसभा चुनाव में योगी ने तुष्टीकरण, पिछड़ापन, बिजली और लचर कानून-व्यवस्था को मुद्दा बना कर वोट मांगा। प्रचंड बहुमत वाली सरकार के नेता के रूप में उनके लिए सरकारी खजाने को भरना आसान नहीं होगा। आय के स्रोत दुरुस्त करने के साथ ही उन्हें केन्द्र सरकार से भी अच्छी मदद लेनी होगी।

जैसे 2012 के चुनाव में युवाओं ने रोजगार की उम्मीद में सपा की सरकार बनवा दी थी, उसी तरह इस बार भी युवाओं ने अपने बेहतर भविष्य की सोच कर भाजपा का साथ दिया है। रोजगार के अवसर मुहैया कराकर और नियुक्तियों में पारदर्शिता बरतना किसी चुनौती से कम नहीं है।

हियुवा योगी की निजी सेना मानी जाती है। योगी के मुताबिक यह उनका सांस्कृतिक संगठन है लेकिन समाज का एक बड़ा तबका विशेषकर अल्पसंख्यक समाज इसे मुस्लिम विरोधी संगठन मानता है। अगर यह संगठन बना रहता है तो उसे काबू में रखना उनकी प्राथमिकताओं में होगा।

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  • Web Title:many challenges are in front of the yogi