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छात्रावासियों को दो साल से नहीं मिली लाखों रुपये की काशन मनी

देश को दर्जन भर से अधिक आईएएस, पीसीएस व अफसर दे चुके संत कबीर छात्रावास में आजकल कुत्तों व पशुओं का बसेरा रहता है। बाथरूमों में रात में हमेशा अंधेरा रहता है, क्यों कि यहां बल्व फ्यूज होने के बाद बदले ही नहीं जाते। पाइप लाइन जगह-जगह टूटी है, लिहाजा थर्ड फ्लोर के सभी बाथरूमों में वाटर सप्लाई नहीं पहुंचती है। हालत यह है कि इस छात्रावास में रह रहे करीब डेढ़ सौ छात्रों की लाखों रुपये की काशन मनी दो साल से डीडीयू के खाते में डंप है।

फर्श पर जगह-जगह पानी बहता है, जिससे अक्सर फिसल कर छात्र घायल हो जाते हैं। बाथरूमों में बीते एक साल में दर्जन भर से अधिक छात्र रात के अंधेरे में चोट खा चुके हैं मगर इंजीनियरिंग सेक्शन को फ्यूज बल्व बदलने की फुर्सत तक नहीं है। वार्डेन साल केवल 15 अगस्त व 26 जनवरी को ही आते हैं और छात्रों की समस्या सुनने में बिल्कुल दिलचस्पी नहीं लेते। कमरा नंबर 62 और 63 में तो दीवार पूरी तरह से सीलन से भर गई है और इसी दीवार पर जगह-जगह वायरिंग के नंगे तार लटक रहे हैं। दीवार पर बाहर से झाड़ झंखाड़ उग आए हैं और खिड़ियों की जाली तोड़ने पर अमादा हैं। आधे से अधिक बाथरूम चोक हो चुके हैं और इसकी शिकायत का डीडीयू प्रशासन पर कोई असर नहीं है।

इस छात्रावास में करीब 150 छाद्ध रहते हैं। प्रति छात्र हर वर्ष काशन मनी के रूप में एक हजार रुपये जमा कराया जाता है। साल बीतने के बाद यह रकम वापस करनी होती है। वार्डेन इस आवेदन पर हस्ताक्षर कर अग्रसारित करते हैं। छात्रावासियों ने बताया कि यहां के वार्डेन फार्म पर हस्ताक्षर ही नहीं करते। दो साल से उनकी काशन मनी फंसी है। इससे पहले भी कई छात्रों को काशन मनी नहीं लौटाई गई। वह चक्कर लगाकर थक गए और अब इस बारे में पूछना भी छोड़ चुके हैं।

बनते ही खराब हो गई टोटियां

छात्रों के हंगामे के बाद हॉस्टल में दो दिन पहले रिपेयरिंग का काम शुरू हुआ। करीब दर्जन भर टोटियां बदली गईं। पाइप लाइन ठीक कराने की बात फिर से हवा हवाई साबित हो रही है। बदली गई टोटियां अगले ही खराब हो गईं। फिर से इनसे पानी टपकना शुरू हो गया है। फिर से जलजमाव हो रहा है।

जबसे श्री संजय बैजल जी वार्डेंन बने हैं, हमारी समस्या सुनने वाला कोई नहीं है। मजबूर होकर हम लोग धरना प्रदर्शन करते तब जाकर हमारी बात सुनी जाती है मगर काम नहीं होता। हम लोग टूटे बाथरूम का इस्तेमाल करते हैं। कई छात्र गंदे पानी से बीमार हो चुके हैं मगर छात्रावास का दशा अब तक नहीं सुधरी।

पिंटू शर्मा, एमए प्रथम वर्ष

यह ऐसा हॉस्टल है, जहां एक साथ पशु, कुत्ते व मच्छर रहते हैं। इन्हीं के बीच हम लोग भी रहते हैं। पशु परिसर गंदा कर चले जाते हैं और रात हम छात्र वह गंदगी झेलते हैं। बाथरूमों में रात में जाने लायक ही नहीं है। अंधेरे में जाना खतरे से खाली नहीं है। वाटर सप्लाई की पाइप जगह-जगह टूट गई है। पानी कभी आता है तो कुछ ही देर में समाप्त हो जाता है।

नीतेश दूबे, एमएससी भाग दो

बाथरूमों के दरवाजे टूटे हैं। कोई आधा टूटा है तो पूरा उंखड़ कर झूल रहा है। इसी में काम चलाने की मजबूरी है। पानी की सप्लाई पर रोना आता है। वार्डेन एक तो शिकायत सुनने के लिए उपलब्ध नहीं होते हैं और उनससे कहने का कोई असर भी नहीं होता है। वह साल में केवल दो बार ही हॉस्टल आते हैं।

कर्मवीर सिंह, एमए भाग एक

दो दिन पहले छात्रावासियों ने रात में रोड जाम किया तो अगले दिन प्रॉक्टर इंजीनियर को लेकर पहुंचे थे। उन्होंने समस्याएं सुनीं और ठेकेदार ने आदमी लगा दिए। टोटियां बदले जाने का काम शुरू हुआ। कहा गया कि पाइपलाइन भी जल्द ही बदली जाएगी मगर अगले ही दिन सभी टोटियां खराब हो गईं। पाइप लाइन बदलने वालों का भी पता नहीं है।

अखिलेश, एमए भाग एक

पीजी के इस हॉस्टल की फीस एक साल की 4100 व दूसरे साल की 3100 रुपये जमा कराई जाती है। मगर इस अनुपात में एक भी सुविधा नहीं मिलती। रकम का आधा भी यदि डीडीयू प्रशासन छात्रावासियों की सुविधा पर खर्च करता को छात्र सुखी रहते। मच्छरों का प्रकोप साल भर से हम लोग झेल रहे हैं। आस पास की गंदगी इनका प्रकोप कम ही नहीं होने देती।

याशवंत सिंह डिंपल, एमए भाग एक

हॉस्टल में एक भी कूड़ेदान नहीं है। कहने के बाद भी इसकी व्यवस्था नहीं हुई। मजबूरी में कूड़ा बाहर फेंकना पड़ता है। जहां देश के पीएम और यूपी के सीएम स्वच्छता अभियान चला रहे हैं, वहीं डीडीयू अपने कैंपस में गंदगी फैलाने के लिए छात्रों को मजबूर कर रहा है। काश यहां भी कभी स्वच्छता सर्वेक्षण की टीम आती।

शिवम उपाध्याय, एमए भाग एक

हम लोगों ने सुना है कि इस छात्रावास में रहने वाले कई लोग सिविल सेवा में चयनित हुए हैं। हम लोग यही सोच कर यहां रहने आए थे कि पढाई का शानदार माहौल होगा, मगर आने के बाद भ्रम टूट गया। यहां तो अपनी समस्याओं को लेकर संघर्ष करने में ही हम लोगों का पूरा एक साल बीत गया। परीक्षा के समय तक समस्याएं जस की तस हैं।

मनोहर, एमए भाग एक

संत कबीर छात्रावास में दो आरओ लगा है मगर एक ही पानी देता है। वह भी हर तीसरे दिन खराब हो जाता है। बाहर से पानी खरीद कर मंगाना पड़ता है ताकि प्यास लगने पर परेशानी न हो। कमरों में तो बिजली ठीक है मगर गैलरी व परिसर में अंधेरा रहता है। साल में एक ही बार बल्व लगाए जाते हैं, फ्यूज होने पर उन्हें बदला नहीं जाता। अब परीक्षा के समय में हम लोग तैयारी करें या अधिकारियों को घेरें।

सच्चितानंद यादव, एमए भाग एक

हर साल प्रति छात्र एक हजार रुपये काशन मनी जमा कराता है डीडीयू

बाथरूमों में अंधेरा, कैंपस में रहता है गाय, कुत्तों व मच्छरों का बसेरा

थर्ड फ्लोर के चारों बाथरूमों में नहीं आता पानी, चोक हो गए हैं टायलेट

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  • Web Title:Gorakhpur: Cash money for millions of rupees not found for two years from hostels