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सितारे की परम्परा से फला-फूला है बॉलीवुड : ज़ोया
मुम्बई, एजेंसी First Published:04-12-12 02:08 PM
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फिल्म निर्देशक ज़ोया अख्तर का मानना है कि बॉलीवुड में सितारों की परम्परा ने उसे विश्व सिनेमा में पहचान दिलाई है।

ज़ोया ने कहा कि सितारों की परम्परा काफी महत्वपूर्ण है। अगर आप विश्व भर के सिनेमा को देखें, बॉलीवुड, हॉलीवुड और चीन इन तीनों में सितारों की परम्परा है। अन्य सिनेमा उद्योग जैसे यूरोप और अन्य देशों में सितारे नहीं है और उनका उद्योग जगत मरणासन्न स्थिति में है।

रितिक रोशन, अभय देओल और फरहान अख्तर की फिल्म का निर्देशन कर चुकीं ज़ोया ने कहा कि भारत हॉलीवुड के सामने टिका हुआ है क्योंकि हमारे पास अपनी भाषा है, अपनी शैली है, और हमारे दर्शक शाहरुख खान को देखना पसंद करेंगे न कि टॉम क्रूज को।

40 वर्षीय ज़ोया ने कहा कि हमारी सितारों की परम्परा ने सिनेमा उद्योग को बढ़ाया है। इसलिए मेरे दिल में इसके लिए काफी इज्जत है और मैं इसे समझती हूं।

यह पूछने पर कि उनके मुताबिक फिल्म स्टार कौन है, इसके जवाब में उन्होंने कहा कि वे सितारे कहलाते हैं क्योंकि फिल्म कौन सी है यह फर्क नहीं पड़ता, इसे अच्छी शुरुआत मिलती है। ...इसलिए आप उनके साथ बहुत सारी फिल्में नहीं बना सकते क्योंकि वे प्रयोग नहीं करना चाहते। वे सुरक्षा चाहते हैं और यही समस्या है।

ज़ोया का कहना है कि इस मामले में अभिनेता आमिर खान बिल्कुल अलग हैं जिसके साथ उन्होंने फिल्म ‘तलाश’ के लिए काम किया है। जोया ने रीमा कागती निदेर्शित इस फिल्म का सह-लेखन किया है।

कवि और गीतकार जावेद अख्तर और पटकथा लेखक हनी ईरानी की बेटी जोया ने ‘लक बाय चांस’, और ‘जिंदगी न मिलेगी दोबारा’ का निर्देशन करने के साथ-साथ इसकी कहानी भी लिखी है।
 
 
 
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