सोमवार, 24 नवम्बर, 2014 | 08:12 | IST
  RSS |    Site Image Loading Image Loading
फिल्म रिव्यू: राजधानी एक्सप्रेस
First Published:04-01-13 07:19 PMLast Updated:05-01-13 12:00 PM
Image Loading

कलाकार: लिएंडर पेस, प्रियांशु चटर्जी, सुंधाशु पांडे, पूजा बोस, जिम्मी शेरगिल, गुलशन ग्रोवर, मुकेश ऋषि
निर्देशक: अशोक कोहली
इस फिल्म का एक सीन.. राजधानी एक्सप्रेस (दिल्ली-मुंबई) का  एसी फस्र्ट क्लास कोच। केबिन में तीन पुरुष यात्री और उनके बीच एक दिलकश युवती। पुरुषों में एक फैशन डिजाइनर है, दूसरा लेखक और तीसरा एक गुंडा। थोड़ी देर में पता चलता है कि युवती एक आईटम गर्ल है और पार्ट टाइम कालगर्ल भी। वो ये काम मजबूरी में करती है और उन तीनों में से एक पुरुष को अपने ग्राहक के रूप में पटा भी लेती है। देखते ही देखते केबिन में व्हीस्की का दौर शुरू हो जाता है। सब अपनी-अपनी बोतलें निकाल लेते हैं। युवती को उन गैर मर्दों संग शराब पीने में कोई हिचक नहीं है। पीने में क्या उसे तो उनके सामने कपड़े बदलने में दिक्कत नहीं है।

इन बातों को पढ़कर अब किसका दिल न करेगा कि वह कम से कम एक बार राजधानी के फस्र्ट क्लास एसी यान में सफर करे? ये फिल्म टेनिस स्टार लिएंडर पेस को बतौर हीरो लांच करने के लिए बनाई गयी है। अभिनय में हाथ आजमाने में कोई बुराई नहीं है। खिलाड़ियों के खेमे से बहुतेरे ऐसे पहले कर चुके हैं। लेकिन लिएंडर को स्क्रीन पर देख बार-बार यही ख्याल आता है कि भइय्या, ऐसा विचार किस बुरी घड़ी में आया था। एक खराब फिल्म में अच्छे भले कलाकार भी बुरे भले नजर आने लगते हैं, यकीन नहीं होता तो राजधानी एक्सप्रेस जरूर देखें। जिम्मी शेरगिल का ही उदाहरण लीजिए। वो इस फिल्म क्या कर रहे हैं, समझ से परे है। उनके साथ इंस्पेक्टर का रोल कर रही शिल्पा शुक्ला को भी देख यही लगता है। फिल्म में थोड़ा बहुत बांधे रखने का काम किया है प्रियांशु चटर्जी और गुलशन ग्रोवर ने।

दरअसल, फिल्म में कहानी नाम की कोई चीज ही नहीं है। निर्देशक अशोक कोहली लिएंडर पेस के किरदार केशव से कहलवाना तो बहुत कुछ चाहते हैं, लेकिन कुछ भी कहलवा नहीं पाते। लिएंडर के हर दूसरे सीन के साथ दिखाया जाने वाला फ्लैशबैक फिल्म को ले डूबा है। ट्रेन के डिब्बे में फिल्माए गये सीन बहुत लंबे और झल्ला देने वाले हैं। इस राजधानी एक्सप्रेस की यात्रा की टिकट मुफ्त में भी मिले तो तौबा करना ही बेहतर होगा।

 
 
|
 
 
टिप्पणियाँ