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फिल्म रिव्यू: दबंग 2
विशाल ठाकुर First Published:21-12-2012 08:09:00 PMLast Updated:22-12-2012 10:48:23 AM
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मन कर रहा है कि कोई भी और बात करने से पहले इस फिल्म की कहानी फटाक से बता दूं। क्योंकि न जाने ऐसा क्यों लग रहा है कि सलमान मियां के फैन ‘दबंग 2’ की कहानी को लेकर उत्सुक होंगे। तो चुलबुल पांडे (सलमान खान) लालगंज से अब कानपुर आ गये हैं। साथ में रज्जो (सोनाक्षी सिन्हा) तो आई ही हैं, पिता प्रजापति पांडे (विनोद खन्ना) और भाई मक्खी पांडे (अरबाज खान) भी है। पर मक्खी की पत्नी निर्मला (माही गिल) साथ नहीं आयी है। नए शहर में आते ही चुलबुल अपने पुराने अंदाज में गुंडों की ताबड़तोड़ धुलाई करता है और उनसे मिले माल को आधा दान और आधा अपनी जेब के अंदर कर लेता है।

उधर, थाने में भी चुलबुल को अपने जैसे ही साथी मिले हैं। वो उसे पांडे जी पांडे जी कहकर सारा दिल लल्लो चप्पो में लगे रहते हैं। चुलबुल की जिंदगी ठीक-ठाक चल ही रही होती है कि एक दिन उसका सामना शहर के एक नेता बच्चा भईय्या (प्रकाश राज) से होता है। पहली ही नजर में बच्चा भईय्या भांप जाता है कि चुलबुल उसके रास्ते का कांटा बनने वाला है। बच्चा भईय्या के भाई गेंदा (दीपक डोबरियाल) और चुन्नी (निकेतन धीर) को उसे ठिकाने की लगाने की जिम्मेदारी दी जाती है।

इसी उठापटक में एक दिन चुलबुल के हाथों गेंदा की मौत हो जाती है। अब बच्चा को चुलबुल को मार अपने भाई की मौत का बदला लेना है, बस! अब ये कहानी सुनकर निराश मत होइयेगा। और ये भी मत कहियेगा कि ऐसी कहानियों से तो बॉलीवुड का इतिहास भरा पड़ा है। तो फिर इस फिल्म में नया क्या है? फिल्म के ट्रेलर को तो देख आधे से ज्यादा दर्शक पहले ही फुसफुसा चुके हैं कि  ‘दबंग 2’ में ‘दबंग’ का दोहराव नजर आ रहा है।

बात बिलकुल सच्ची है बॉस। फिल्म में नए के नाम पर केवल चुलबुल का शहर बदला है। उसका पहनावा, चलना-फिरना, स्टाइल आदि सब वही है। शादी के बाद रज्जो अब रसोई में ही दिखती है। बाहर निकलकर एक-दो गाने भी गा लेती है। पिताजी भी घर में रहते हैं और बेटा उनके संग मसखरी सी करता रहता है। मक्खी अब भी बेकार है। मतलब निठल्ला है, घर पर रहता है और बाजार के काम कर लेता है। हां, इस बार विलेन के रूप में मिला बच्चा भइय्या संवाद अच्छे बोल लेता है।

जब-जब चुलबुल से उसका सामना होता है तो सीटी मारने वाले दर्शकों की लॉटरी निकल जाती है। अब रही बात एक्शन की, तो अब सलमान कैसा एक्शन करते हैं, ये नए सिरे से बताने की जरूरत नहीं है। इस फिल्म के कई एक्शन सीन ऐसे हैं, जिन्हें देख आप कन्फ्यूज हो जाएंगे कि वह ‘दबंग ’ के हैं या फिर ‘दबंग 2’ के। समानता इस हद तक हावी है कि अगर फिल्म गीतों की आवाज बंद करके पाश्र्व में ‘दबंग ’ के गीत बजा दिये जाएं तो अंतर निकालना मुश्किल होगा।

इन गीतों पर कॉरियोग्राफी का भी यही हाल है। डांसिंग स्टेप्स, भी वही पुराने हैं। फिर भी ‘दबंग 2’ के प्रति उत्सुकता थमने का नाम नहीं लेती। इसकी एक बड़ी वजह है सलमान खान का जादू। या कहिये जादू से बड़ी चीज। उन्होंने पिछले तीन-चार साल से लोगों को अपने मोहपाश में ऐसा बांधा है कि उनकी फिल्मों में बहुत कुछ न होते हुए भी दर्शक उनके दीवाने हैं। ‘दबंग ’ से शुरू हुआ ये मोह आज भी कायम है।

लेकिन लगता है कि ‘दबंग 2’ देखने के बाद लोगों का यह भ्रम टूटेगा। क्योंकि फिल्म इंडस्ट्री में पुराने को लोग कितने दिन पचाते हैं, ये सब जानते हैं। एक निर्देशक के रूप में अरबाज खान ने लगता है जरा भी होमवर्क नहीं किया। उन्हें लगा कि फिल्म केवल सलमान के नाम पर अपना ‘खेल’ खेल जाएगी। खेल भी सकती है। आखिर सलमान बड़े खिलाड़ी है। फिल्म की कहानी दिलीप शुक्ला ने लिखी है। ऐसा लगता है कि उन्होंने इसे लिखने में एक दिन से ज्यादा नहीं लिया होगा।

बेशक फिल्म में कई संवाद अच्छे हैं। ऐसी मसालेदार डायलागबाजी टिकट खिड़की के लिए अच्छी साबित हो सकती है। लेकिन एक बात का अचरज होता है कि हाथ में कलम होने के बावजूद और साथ में सलमान जैसा सितारा होते हुए दिलीप शुक्ला ने चुलबुल के किरदार में वैरायटी क्यों नहीं दी। उसे लालगंज से कानपुर लाकर उसी फ्रेम में कैद क्यों कर दिया। फिल्म में सलमान और विनोद खन्ना के बीच कुछ सीन अच्छे हैं।

शुरू से अंत तक कॉमेडी के कुछ पंच भी अच्छे हैं। मोटे तौर पर सलमान जब-जब स्क्रीन पर होते हैं तो दिल सा लगा रहता है। लेकिन बार-बार ‘दबंग’ की याद आती है। मुन्नी बदनाम हुई.. जैसे गीत का अभाव भी दिखता है। फिर लगता है कि अभिनव कश्यप होते तो शायद ‘दबंग’ के सीक्वल का ये हश्र तो न होता। ‘दबंग ’ केवल सलमान के फैन्स के लिए समर्पित दिखती है।

कलाकार: सलमान खान, सोनाक्षी सिन्हा, विनोद खन्ना, अरबाज खान, प्रकाश राज, दीपक डोबरियाल, मनोज पाहवा, माही गिल
निर्देशक: अरबाज खान
निर्माता: अरबाज खान, मलाइका अरोड़ा
संगीत: साजिद-वाजिद
लेखक: दिलीप शुक्ला
गीत: समीर, जलीस शेरवानी, अशरफ अली, इरफान कमल

लोगों ने कहा
फिल्म से जो उम्मीद थी, वैसी नहीं निकली। दबंग से यह फिल्म 19 ही साबित हुई।
सुरेंद्र, व्यापारी
वन टाइम मूवी है। करीना का आइटम सॉन्ग अच्छा लगा। प्रकाशराज की एक्टिंग अच्छी है।
गणेश, वर्किंग
मस्त मूवी लगी। सोनाक्षी का अभिनय अच्छा है। एक्शन सीन भी अच्छे हैं।
हनुमान शर्मा, मैनेजर

 

 
 
 
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