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फिल्म रिव्यू : सेकेंड मैरिज डॉट कॉम
First Published:10-08-12 10:11 PM
Last Updated:11-08-12 11:12 AM
अच्छे सिनेमा की तलाश में कभी-कभी ऐसी फिल्में भी मिल जाती हैं, जिनके बारे में कोई शोर शराबा नहीं होता। अक्सर ऐसी फिल्मों को बड़े बजट की नामचीन सितारों वाली फिल्में छोटी मछली समझकर निगल जाती है। यही नहीं, अमूमन इन फिल्मों के विषय अनछुए होते हैं और देखकर लगता है कि अगर ऐसे विषय को किसी बड़े और नामी फिल्मकार ने उठाया होता तो जरूर कोई विवाद हो जाता, जिसका फायदा निर्माता को मिलता।
इस सप्ताह रिलीज हुई फिल्म सेकिंड मैरिज डॉट कॉम को देखकर भी यही लगता है। मात्र 6-7 किरदारों (चार मुख्य किरदार) के आस-पास घूमती इस फिल्म की कहानी यूं तो साधारण है, लेकिन जिस एक विषय पर केन्द्रित है उसे समाज में कभी खुशी-खुशी अपनाया नहीं गया। ये कहानी है सुनील नारंग (मोहित चौहान) और उसके बेटे अक्षय (विशाल नायक) की, जिनकी जिंदगी में आगमन होता है शोमा (चारू पाराशर) और उसकी बेटी पूनम (सयानी गुप्ता) का। बरसों पहले सुनील की पत्नी और शोमा के पति की मौत हो गयी थी। दोनों के बच्चों अब जवान हो चुके हैं और उन्हें लगता है कि अब उनके माता-पिता को एक जीवन साथी मिलना चाहिये।
अक्षय और पूनम का अपने-अपने पेरेन्ट्स के विषय में मानना है कि जीवन के इस लंबे सफर में उन्हें भी एक साथी की जरूरत है। एक मैरिज पोर्टल पर इन दो परिवारों की मुलाकात होती है। सुनील दिल्ली के रहने वाले हैं और शोमा जयपुर की। अपने-अपने मां-बाप की शादी के अक्षय और पूनम पहले आपस में मिलते हैं और फिर दिल्ली में सुनील और शोमा की एक मीटिंग करवाते हैं। देखते ही देखते बात पक्की हो जाती है और शादी भी।
सुनील से शादी के बाद पूनम भी दिल्ली आ जाती है और शोमा के साथ रहने लगती है। एक बड़े घर में ये चारों रहने लगते हैं। एक दिन अक्षय और पूनम को अहसास होता है कि उनके माता-पिता ने शादी तो कर ली है, लेकिन वे दोनों अब भी एक-दूजे से दूर हैं। वे दोनों को मिलाने का प्रयास करते हैं और वेलेंटाइन डे पर दोनों को एक दिन के लिए बाहर घूमने भेज देते हैं।
पूनम और अक्षय घर पर अकेले होते हैं। अचानक पूनम को अपने पूर्व प्रेमी की याद आती है और वह काफी सारी शराब पी लेती है। अक्षय पूनम को दिलासा देने की कोशिश करता है और इसी दौरान नशे की हालत में दोनों हमबिस्तर हो जाते हैं। अगले दिन जब पूनम को होश आता है तो वह खुद को इस सब के कुसूरवार मानती है।
वापस लौटने पर शोमा को कुछ शक हो जाता है। वह पूनम से उसके रिश्ते की बात छेड़ती है। लेकिन अक्षय किसी भी हालत में पूनम की शादी नहीं होने देता। रोमांचक घटनाक्रम के लिए इससे आगे की कहानी फिल्म में देखने वाली है।
फिल्म के क्लाईमैक्स में निर्देशक में इस दूसरी शादी वाली बात पर कोई ठोस निर्णय न देते हुए उसे एक रचनात्मक मोड़ दे डाला है, जिससे आप सही या गलत के बंधन से मुक्त हो जाते हैं। अभिनय के लिहाज से देखा जाए तो फिल्म में चारों मुख्य किरदारों ने काफी अच्छा अभिनय किया है। संगीत भी अच्छा है। मुख्य कलाकारों के साथ घर के नौकर की अपनी प्रेम-पच्चीसी भी लुभाती है।
हालांकि फिल्म एक मुद्दे की ओर इशारा करती है, लेकिन साथ में उससे होने वाले नफे-नुकसान की भी बात करती है।
हालात का सामना होने पर उससे कैसे निपटा जाए, अंत में ये निर्देशक ने दर्शकों पर छोड़ दिया है। चर्चित फिल्मों की आवक के बीच यह एक रोचक फिल्म है, जिसे देखा जा सकता है।
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