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फिल्म रिव्यूः कृष्ण और कंस
विशाल
First Published:03-08-12 08:42 PM
Last Updated:04-08-12 09:28 AM
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अक्षय कुमार की आने वाली फिल्म ‘जोकर’ ने  अंतिम समय में 3डी इफेक्ट्स से बेशक किनारा कर लिया हो, लेकिन यह सच है कि दर्शकों में 3डी फिल्मों को लेकर अब भी जबरदस्त क्रेज है। इसी साल हिट हुई हॉलीवुड की फिल्मों की ओर देखें तो यह बात साबित होती है। और हिन्दी फिल्म ‘अर्जुन : दि वॉरियर प्रिंस’ की सफलता से तो यह बात और पुख्ता होती है कि आज लोग देवी-देवताओं में एक सुपरहीरो की छवि देखते हैं। इस फिल्म की गुणवत्ता देख इस बात का भी प्रमाण मिला कि अब भारतीय एनिमेशन सही दिशा की तरफ जा रहा है, जिसके तहत अब नए फिल्मकार न केवल कहानी कहने के ढंग में नया और एक बड़ा बदलाव ला रहे हैं, बल्कि तकनीक के सहारे अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर भी अपनी पहचान बना रहे हैं। हनुमान, श्री गणेश, भगवान शिव और भीम आदि के बाद अब बारी है भगवान श्रीकृष्ण की मनोहारी लीला की। इस सप्ताह रिलीज हुई फिल्म ‘कृष्ण और कंस’ एक एनिमेटिड 3डी फिल्म है, जिसमें बॉलीवुड के कुछ जाने-माने सितारों ने अपनी आवाजें दी हैं। फिल्म की कहानी को नए सिरे से बयां करने की जरूरत नहीं है। भगवान श्रीकृष्ण की लीलाओं और उनके अनेक रूपों की कथाएं हम सभी अपने बचपन में सुन चुके हैं। इस फिल्म की कहानी भी उन्हीं कथाओं और प्रसंगों में से एक है। श्रीकृष्ण की बाल लीलाओं और उनके द्वारा कंस के वध की लीला इस फिल्म में दिखाई गई है।

इस फिल्म में कहानी को कुछ इस ढंग से कहने की कोशिश की गई है कि बच्चों उससे कुछ सीखें। श्रीकृष्ण की बाल लीलाओं के अनेक रूपों से प्रेरित इन प्रसंगों को देखना अच्छा लगता है, लेकिन छोटे बच्चों के लिहाज से देखें तो एक गड़बड़ी भी नजर आती है। इन तमाम प्रसंगों के बीच जिस शुद्ध हिन्दी भाषा का इस्तेमाल किया गया है, वो शायद आजकल के अंग्रेजीदां माहौल में पढ़ने वाले बच्चों की समझ न आए। हालांकि उनके हिन्दी ज्ञान में यह फिल्म अच्छी बढ़ोत्तरी कर सकती है। फिल्म में इस बात का ध्यान रखा गया है कि एक्शन के दृश्य बच्चों की मानसिक स्थिति के लिए बुरे न साबित हों। खासतौर से ऐसे दृश्य, जिनमें देवकी के सात बच्चों और कंस का वध दिखाया गया है। ऐसे दृश्यों में संगीतकार शांतनु मोइत्र की रचनात्मकता का कमाल दिखता है। फिल्म में कंस की आवाज अभिनेता ओमपुरी ने डब की है। कृष्ण और कंस के बीच होते संवादों में ओमपुरी की आवाज धमक पैदा करती है। इस आवाज से कंस के किरदार में एक नई जान सी आ गई है। तो उधर, मां यशोदा की आवाज जूही चावला ने डब की है। मनोज बाजपेयी ने नंद की आवाज डब की है। करीब 2 घंटे की इस फिल्म में बच्चों को बांधे रखने के लिए ढेर सारा मसाला है। फिल्म का एनिमेशन काफी साफ-सुथरा है। बड़े परदे पर एनिमेशन का यह निखरा रूप कॉमिक्स सरीखा लगता है। फिल्म की एक और खासियत है इसकी कल्पनाशीलता, जिसमें परंपरागत चीजों की बजाए उन बातों को उकेरा गया है, जिनसे बच्चों दोस्ताना माहौल पा सकें। सहज संगीत के साथ श्रीकृष्ण की बाल लीलाओं का मजा दोगुना हो जाता है। बावजूद इसके यह फिल्म केवल देखने के समय ही अच्छी लगती है। बच्चों इससे सीख कर कुछ घर ले जाएं, ऐसी उम्मीद कम दिखती है। जैसा कि पहले बताया गया कि फिल्म में प्रेरक प्रसंग काफी ज्यादा हैं, लेकिन उन्हें बेहद जटिल ढंग से बुना गया है। खासतौर से भाषा। फिर भी तमाम वयस्क फिल्मों के बीच यह फिल्म इस सप्ताह बच्चों के लिए काफी मनोरंजक साबित हो सकती है।                      
आवाजें : प्राची सावे, ओमपुरी, जूही चावला
निर्देशक : विक्रम वेतुरी, सचिन और सुप्रिया पिल्गांवकर, मनोज बाजपेयी
निर्माता : रिलायंस एनिमेशन/आशीष एसके. क्रिएशंस
संगीत : शांतनु मोइत्र
गीत :  स्वानंद किरकिरे

 
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