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फिल्म रिव्यू : डेंजरस इश्क़
सत्य सिंधु
First Published:11-05-12 10:44 PM
Last Updated:12-05-12 01:04 PM
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कलाकार: करिश्मा कपूर, रजनीश दुग्गल, जिम्मी शेरगिल
निर्देशक: विक्रम भट्ट
निर्माता: रिलायंस एंटरटेनमेंट
संगीत: हिमेश रेशमिया

संजना (करिश्मा कपूर) एक सुपर मॉडल है। वह एक नामचीन उद्योगपति ठकराल के बड़े बेटे रोहन (रजनीश दुग्गल) से प्यार करती है। एक दिन कुछ बदमाश रोहन का अपहरण कर लेते हैं। रोहन को बचाने में संजना को चोट लगती है और वह बेहोश हो जाती है। होश आता है तो उसे पिछले जन्म की बातें याद आने लगती हैं, जब वह पाकिस्तान में थी। इस जन्म की संजना और रोहन उस जन्म में गीता और इकबाल थे। लेकिन गीता को चाहने वाला इकबाल का दोस्त आरिफ तब दोनों के बीच आ गया था।

जब संजना केस सुलझाने वाले एसीपी भार्गव सिंह (जिम्मी शेरगिल) की अपने पिछले जन्म के आधार पर मदद करना चाहती है तो एसीपी सिंह उसकी बातों पर विश्वास नहीं करता। लेकिन बाद में एसीपी को संजना की इस बात पर विश्वास करना पड़ता है और उसे पता चलता है कि रोहन के अपहरण में उसके छोटे भाई राहुल का भी हाथ है।

लेकिन एक दुर्घटना में संजना को एक और जन्म याद आता है, जब वह चित्तौड़गढ़ में दासी पारो होती है। वहां का राजकुमार और पारो एक दूसरे से प्यार करते हैं, लेकिन सेनापति पारो को एकतरफा प्यार करता है। उसी जन्म में पारो को वरदान मिला था कि वह और राजकुमार एक-दूसरे के लिए हैं और जब तक दोनों का मिलन नहीं हो जाता, वे जन्म लेते रहेंगे। सेनापति को भी अपनी तांत्रिक बहन से वरदान मिलता है कि पारो को पाने के लिए बार-बार उसका जन्म होगा, लेकिन जब पारो और उसके प्रेमी से पहले वह मर जाएगा तो उसकी स्मृतियां खत्म हो जाएंगी।

संजना इस जन्म में सेनापति को उस निशान से पहचान लेती है, जो उसकी बहन ने उसके कंधे पर दिए हैं। वह सेनापति इस जन्म में एसीपी सिंह के रूप में आया हुआ है। संजना उसे मारकर उसकी साजिश में फंसे अपने प्रेमी रोहन को आजाद कराती है और दोनों का मिलन होता है।

निर्देशन के नजरिए से देखें तो ‘हॉन्टेड’ के बाद विक्रम भट्ट ने एक बार फिर 3 डी तकनीक का सहारा लिया है, लेकिन यह कुछ असरदार साबित नहीं हुआ। जैसे ही कहानी पूर्व जन्म की ओर मुड़ती है, कई सवाल खड़े करती जाती है। हालांकि भट्ट ने कहानी को सरल रूप में कहने की कोशिश की है, लेकिन कई जन्मों में फैली यह फिल्म कई गुत्थियां सुलझाने की मांग करती रह जाती है।

फिल्म में मुख्य रूप से तीन ही चरित्र याद रहते हैं। करिश्मा, रजनीश और जिम्मी के चरित्र। करिश्मा को विभिन्न जन्मों में अलग-अलग किरदार निभाने का मौका मिला है, जिसमें वह ठीक-ठाक लगी हैं। रजनीश के हिस्से कुछ आया नहीं है और जिम्मी ने एसीपी के रूप में अच्छा काम किया है।

प्रेम कहानी में आमतौर पर दर्शक अच्छे संगीत की भी उम्मीद करते हैं, लेकिन इस फिल्म में रखे गए आधे दर्जन गानों में से बस एक गाना तू ही रब तू ही दुआ.. कुछ पल गुनगुनाने लायक लगता है।

फिल्म में कुछ ऐसे दृश्य हैं, जो 3डी की वजह से रोमांचित करते हैं, जैसे बदमाश के अड्डे पर दीवारों का टूटना और मलबे के टुकड़े का आपके ऊपर गिरने का अहसास कराना। लेकिन इन सबके बावजूद फिल्म बांधने में पूरी तरह से असफल साबित हुई है।

 
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