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'हेरा-फेरी के बाद एक जैसे किरदारों में बंध गया था'
नई दिल्ली, एजेंसी First Published:05-01-2013 03:43:00 PMLast Updated:00-00-0000 12:00:00 AM
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अभिनेता परेश रावल खुश हैं कि वे 'ओह माई गॉड' के बाद अपनी हास्य कलाकार वाली छवि को तोड़ने में सफल रहे हैं। उनका मानना है कि इस फिल्म ने उन्हें रूचिकर भूमिकाएं दिलाने में मदद की है।
  
62 वर्षीय परेश ने कहा कि एक अभिनेता होने के नाते वे अपनी इस छवि से तंग आ चुके थे। उन्हें वर्ष 2000 की हिट फिल्म 'हेरा फेरी' के बाद से एक ही तरह के किरदार मिल रहे थे।
  
'ओह माई गॉड' के जरिए परेश अपनी इस हंसोड़ छवि को तोड़ने में सफल रहे हैं। इस फिल्म में उन्होंने एक नास्तिक की भूमिका निभाई है जो भूकंप में नष्ट हुई अपनी दुकान के मुआवजे के लिए भगवान पर मुकदमा कर देता है।
  
रावल मानते हैं कि बॉलीवुड में एक निश्चित प्रारूप में ढ़ल जाना ज्यादा आसान है क्योंकि फिल्मकार अभिनेताओं के साथ ज्यादा प्रयोग नहीं करते।
  
परेश ने बताया कि यह हमारी इंडस्ट्री की बड़ी समस्याओं में से एक है। फिल्मकार एक अभिनेता की संभावनाओं को ज्यादा विस्तार नहीं देते। अब चूंकि मुझे दूसरे किस्म के किरदार मिल ही नहीं रहे थे इसलिए मैं कई सालों तक एक ही तरह के किरदार करता रहा। मैं हर वक्त इंकार नहीं कर सकता। 'ओह माई गॉड' के बाद से मुझे एक नया जीवन मिला है और अब मुझे ज्यादा मजेदार किरदार निभाने के प्रस्ताव मिल रहे हैं।

1984 में अपना करियर शुरू करने वाले परेश ने 80 और 90 के दशक में बॉलीवुड में कई मजेदार किरदार निभाए हैं। इनकी गिनती बॉलीवुड के सबसे महंगे कलाकारों में होती है। परेश अब अगली थ्रिलर फिल्म 'टेबल नंबर 21' में नजर आएंगे। यह फिल्म आज सिनेमाघरों में लग चुकी है। इस फिल्म में परेश रिसॉर्ट के मालिक खान की भूमिका में हैं।
  
इस किरदार के बारे में वह बताते हैं, इस फिल्म में मेरे किरदार में कई रंग हैं। यह नकारात्मक भी है और सकारात्मक भी। मेरी कहानी का नायक मैं हूं। मैं राजीव खंडेलवाल और टीना देसाई को अपने रिसॉर्ट में बुलाता हूं और उन्हें एक ऐसे खेल में लगा देता हूं जो उनकी जिंदगी ही बदल देता है।
  
राष्ट्रीय पुरस्कार जीत चुके इस अभिनेता का मानना है कि बॉलीवुड में खलनायकों के चरित्र में वर्षों से कोई ज्यादा बदलाव नहीं आया है। इस फिल्म के लिए परेश ने अपना सिर मुंडवाया है और वह कहते हैं कि उन्हें इस किरदार के लिए अपने बाल कटवाने का कोई मलाल नहीं है।
  
वह कहते हैं कि मैंने अपना करियर थियेटर से शुरू किया और जब मैं कोई प्रोजेक्ट लेता था तो अपने किरदार को ज्यादा से ज्यादा रूचिकर बनाने की कोशिश करता था। मैं यह बिल्कुल नहीं सोचता कि मुझे डिजाइनर कपड़े पहनने को मिलेंगे या फिर मुझे गंजा होना पड़ेगा। मेरा पूरा ध्यान अपने प्रदर्शन पर होता है।
  
अपने अब तक के फिल्मी सफर के बारे में कहते हैं, मेरे लिए यह आराम दायक रहा। हमारी इंडस्ट्री ही भारत की एक ऐसी जगह है जहां कोई नियम या कायदे नहीं हैं। अगर आपमें काबिलियत है तो आप सफल होते हैं वर्ना आप विफल रहते हैं। ये नियम सबके लिए स्पष्ट हैं।
  
'टेबल नंबर 21' के बाद परेश जिला गाजियाबाद, कुसर प्रसाद का भूत और हिम्मतवाला में नजर आएंगे।

 
 
 
 
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