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'पान सिंह तोमर' ने जिंदगी आसान बनाई'
नई दिल्ली, एजेंसी First Published:30-12-2012 04:31:37 PMLast Updated:00-00-0000 12:00:00 AM
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फिल्म 'पान सिंह तोमर' में बलवंता के किरदार में दर्शकों की वाहवाही बटोरने वाले अभिनेता रवि भूषण भारतीय के लिए इस फिल्म की सफलता ने फिल्म उद्योग में उनके संघर्ष की राह को आसान बना दिया है।
    
रवि भूषण ने बताया कि यह मेरी पहली फिल्म थी जो मेरे लिए काफी लकी साबित हुई है। इस फिल्म के बाद अब मुझे जाकर लोगों को परिचय नहीं देना पड़ता उल्टे मुझे लोग बुलाकर काम दे देते हैं और कई बार तो ऑडिशन भी नहीं लेते।
    
उन्होंने कहा कि अपनी पहली फिल्म में इरफान खान जैसे मंजे हुए अभिनेता के साथ काम करना मेरे लिए एक जबर्दस्त चुनौती थी। लेकिन जितना मैं इरफान के बारे में सोच सोचकर परेशान था कि मैं कैसे उनके साथ शॉट दूंगा, वहीं काम करते वक्त उनकी सहजता देखकर मैं उनका कायल हो गया। उन्होंने कभी भी मुझे यह अहसास नहीं होने दिया कि मैं एक बड़े स्टार अभिनेता के साथ काम कर रहा हूं।
    
उन्होंने कहा कि इरफान खान अपने आप में अभिनय के एक बड़े संस्थान हैं। उनके साथ काम करना अभिनय की पढ़ाई करने से कम नहीं है।

रवि ने कहा कि फिल्म में मेरी भूमिका पान सिंह के भतीजे बलवंता की थी जो थोड़ा उग्र मिजाज का लड़का है। फिल्म की शूटिंग के दौरान चम्बल की वादियों में मैंने वहां की जुबान सीखी और वहां के लोगों से मुझे बलवंता के बारे में काफी जानकारी मिली जो आज भी जीवित है। इन सब जानकारियों से मुझे उस चरित्र की बारीकियों को समझने में काफी मदद मिली।
    
बिहार के पूर्णिया जिले में पैदा हुए रवि भूषण भारतीय ने वर्ष 2007 में मुंबई आने से पहले भोपाल में रहकर माखनलाल चतुव्रेदी राष्ट्रीय पत्रकारिता विश्वविद्यालय से स्नातक किया और भोपाल में हबीब तनवीर, बंशी कौल, आलोक चटर्जी, अलकनंदन सरीखे अनुभवी नाटक निर्देशकों के साथ चार साल काम किया। इसके अलावा प्रयाग संगीत समिति, इलाहाबाद से उन्होंने तबला वादन में डिप्लोमा भी किया।
    
वर्ष 2003 में वह राष्ट्रीय नाटय विद्यालय की परीक्षा में बैठे जहां चयन नहीं होने पर उन्होंने वर्ष 2004 में पुणे फिल्म संस्थान (एफटीआईआई) से अभिनय में स्नात्कोत्तर डिप्लोमा किया। इस संस्थान में उनके प्रशिक्षकों में नसीरुद्दीन शाह, टॉम ऑल्टर, रजा मुराद, बेंजामिन गिलानी, रवि बासवानी, कंवलजीत पेंटल जैसी हस्तियां शामिल थीं।
    
एफटीआईआई में आखिरी वर्ष में उन्होंने अपनी डिप्लोमा फिल्म वो सुबह किधर निकल गई बनायी जिसके निर्देशक एफटीआईआई के निदेशक त्रिपुरारी शरण थे। इस फिल्म में उनकी भूमिका एक पढ़े लिखे नक्सलवादी समरेश सिंह की थी। इस फिल्म को न्यूयॉर्क फिल्म समारोह के अलावा कई अन्य फिल्मोत्सवों में भी दिखाया गया है।

फिल्म 'पान सिंह' के बाद रवि भूषण ने नितिन कक्कड़ की पहली फीचर फिल्म फिल्मिस्तान की जिसे बुशान इंटरनेशनल फिल्म फेस्टिवल में स्पेशल जूरी अवॉर्ड दिया गया।
    
इसके अलावा उन्होंने एक और फिल्म अभिनेता रणदीप हुडा और सुनील शेटटी के साथ की है जिसकी कहानी गैंगवार पर आधारित है और इस फिल्म में वह एक गैंग की अगुवाई करते हैं। इस फिल्म के मार्च तक रिलीज होने की उम्मीद है।
    
रवि ने एक पोलियोग्रस्त बच्चों की जिजिवीषा भरी कहानी कहने वाली फिल्म रन फॉर फन की है। उनकी एक और फिल्म भगोड़े है जिसके निर्देशक स्वपनिल प्रसाद हैं।
    
फिल्म खेल मंत्र में वह मुख्य भूमिका निभा रहे हैं जो जीवन में सफलता की उंची उड़ान भरने के चक्कर में अंतत: सटटेबाज बन जाता है लेकिन अंत में एक चतुर चालाक महिला के चक्कर में बर्बाद हो जाता है और प्रभु चरण में लौट जाता है। फिल्म का एक हिस्सा पूरा हो चुका है और इस फिल्म के निर्देशक मनोज डाबरा हैं।
    
इसके अलावा रवि की एक और फिल्म की शूटिंग चल रही है जिसका नाम है, बुल बुलबुल बंदूक। इस फिल्म में उनके सह कलाकारों में प्रसिद्ध अभिनेता जिमी शेरगिल हैं।

 
 
 
 
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