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मनोबल की कड़ी परीक्षा होती है बिग बॉस में : सिद्धू
नई दिल्ली, एजेंसी First Published:29-11-12 12:29 PM
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नवजोत सिंह सिद्धू ने क्रिकेट की पिच पर कई बार बाउंसर झेले हैं लेकिन बिग बॉस के घर को वह मनोबल की सबसे बड़ी परीक्षा मानते हैं और उनका कहना है कि यदि किसी व्यक्ति को परखना है तो उसे इस रियलटी शो में भेज देना चाहिए।
    
सिद्धू लगभग एक महीने से अधिक समय तक बिग बॉस के घर में रहे। इसके बाद वह भारत और इंग्लैंड के बीच टेस्ट सीरीज के लिये स्टार क्रिकेट पर चल रही हिन्दी कमेंट्री और गुजरात चुनावों को ध्यान में रखकर बाहर आ गये।
    
उन्होंने खास बातचीत में कहा कि मेरे लिये बिग बॉस बहुत बड़ा जोखिम था। वहां जाना काजल की कोठरी में जाने जैसा था जहां से अपनी चादर को किसी भी तरह की कालिख से बचाकर बाहर निकलना लगभग असंभव था। आपके पास घड़ी, फोन, इंटरनेट, परिवार, मनपसंद खाना कुछ नहीं होता। इसलिए बिग बॉस का घर  मनोबल की सबसे कड़ी परीक्षा है।
    
सिद्धू ने कहा कि यदि किसी व्यक्ति को परखना है तो उसे बिग बॉस में भेज दो। उसका असली चरित्र दिख जाएगा।
    
अपनी बेटी राबिया की चुनौती पर इस रियलटी शो में भाग लेने वाले सिद्धू ने इस बात को नकार दिया कि बिग बॉस में बातें तोड़ मरोड़कर पेश की जाती हैं। उन्होंने कहा कि बिग बॉस मुखौटा नहीं यह खालिस असलियत है। यहां असली सूरत नहीं छिप सकती। चौबीस घंटों में आप भूल जाते हो कि आप पर कैमरा लगा हुआ है।

सिद्धू ने बिग बॉस के अपने अनुभवों के बारे में कहा कि निर्माताओं को विश्वास था कि वह भी अन्य भागीदारों की तरह कोई गलती करेंगे लेकिन उन्हें सफलता नहीं मिली। उन्होंने कहा कि मुझे निर्माताओं ने बताया कि पहले छह साल इस कार्यक्रम में गालियां काफी दी जाती थी लेकिन मैंने उसे पारिवारिक कार्यक्रम बना दिया।

पहले वह 11 बजे आता था लेकिन अब उसे नौ बजे दिखाया जाता है। उन लोगों को आशंका थी कि मेरा सब्र भी टूट जाएगा लेकिन आखिर में उन्होंने स्वीकार किया कि मैंने उन पर दबाव बना दिया था।

पिछले साल भी चर्चा थी कि सिद्धू बिग बॉस में जाएंगे लेकिन उन्होंने इस साल इस कार्यक्रम का हिस्सा बनने का फैसला किया। इस पूर्व टेस्ट क्रिकेटर ने खुलासा किया कि उनकी बेटी राबिया की चुनौती स्वीकार करते हुए वह इस रियेल्टी शो में पहुंचे थे।

उन्होंने कहा कि मेरी बेटी कहती है कि मेरे पिता बहुत मजबूत इंसान हैं लेकिन मैं नहीं चाहती कि वह बिग बॉस में जाएं क्योंकि हो सकता है कि वह भी कभी न कभी गलती कर बैठें। इसलिए मेरे लिये यह चुनौती थी। मेरे लिये यह बल्लेबाजी करने से भी बड़ी अग्निपरीक्षा थी और मुझे खुशी है कि मैं इसमें सफल रहा।

 
 
 
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